
बेणेश्वर धाम। फोटो: पत्रिका
साबला (डूंगरपुर)। दक्षिण राजस्थान का प्रसिद्ध धाम बेणेश्वर का टापू तीन नदियों के पानी के घुमाव से हो रहे कटाव के कारण लगातार छोटा होता जा रहा है। पिछले आठ साल में इसका आकार 4.42 हेक्टेयर से ज्यादा घट गया है। यह चिंताजनक है। यहां करोड़ों रुपए के प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
सोम, माही और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर यह आस्थाधाम स्थित है। बेणेश्वरधाम बरसात के दिनों में तीनों नदियों के पानी से घिर जाता है। पानी घूमकर आगे बढ़ने से लगातार मिट्टी का कटाव हो रहा है। बरसात के दौरान नदियों के उफान पर होने से टापू के किनारे मिट्टी कटकर बह जाती है। ऐसे में धाम की जमीन धीरे-धीरे सिमट रही है। श्रद्धालुओं और संत समाज में इसे लेकर चिंता है।
बेणेश्वरधाम संत मावजी की तपोभूमि और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां श्री राधाकृष्ण मंदिर, ब्रह्मा मंदिर, शिव मंदिर, वाल्मीकि मंदिर, हनुमानजी और गायत्री मंदिर सहित कई देवालय स्थित हैं। धाम तीनों ओर से सोम, माही और जाखम नदियों से घिरा हुआ है, जिससे यह क्षेत्र मत्स्याकार टापू के रूप में विकसित हुआ।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार बेणेश्वरधाम को गैर आबादी वाला गांव घोषित किया गया। यहां किसी भी व्यक्ति का आवास या निजी मकान नहीं है। यह धाम ग्राम पंचायत दौलपुरा के अधीन है। यहां किसी प्रकार के पट्टे आवंटित नहीं किए जा सकते, ताकि धार्मिक स्थल पर अतिक्रमण न हो सके।
राजस्व आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 में किए गए सर्वे में बेणेश्वरधाम टापू का क्षेत्रफल 80.75 हेक्टेयर दर्ज था, जो वर्ष 2024 के सर्वे में घटकर करीब 76.33 हेक्टेयर रह गया। यानी नदियों के कटाव से वर्षों में कई हेक्टेयर जमीन कम हो चुकी है। आशंका है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में करीब पांच हेक्टेयर भूमि और कटाव की चपेट में आ सकती है।
वर्ष 2015-16 में राज्य सरकार ने बेणेश्वरधाम के विकास के लिए करीब 255 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया था। इसके तहत राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं मेला प्राधिकरण, देवस्थान विभाग ने टापू की जमीन का सर्वे कराया और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर इसे दौलपुरा पंचायत में शामिल किया गया। हालांकि कटाव रोकने के ठोस उपाय अब तक धरातल पर नहीं उतर सके।
बरसात में नदियों के उफान से धाम टापू में तब्दील हो जाता है। सरकार ने एनीकट, आबुदर्रा घाट, सोम घाट सहित कई कार्यों के लिए करीब 130 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। धाम की जमीन बचाने के लिए चारों ओर मजबूत सुरक्षा दीवार बनाना अत्यंत आवश्यक है।
-महंत अच्युतानंद, पीठाधीश्वर, बेणेश्वरधाम
धाम को गैर आबादी वाला राजस्व गांव घोषित किया गया, ताकि यहां अवैध निर्माण और अतिक्रमण न हो सके, लेकिन कटाव और अतिक्रमण की समस्या लगातार बनी हुई है। प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।
-बलवंतसिंह वालाई, अध्यक्ष, शिवालय ट्रस्ट
Published on:
16 Mar 2026 07:23 am
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