
सरकार के इस पैनल ने की यूपीए सरकार की तारीफ की, कहा दो बार जीडीपी दहार्इ तक पहुंची
नर्इ दिल्ली। कुछ समय पहले पीएम नरेंद्र मोदी का बयान आया था कि देश की जीडीपी के आंकड़े को दहार्इ तक पहुंचाना है। तब ही देश एक विकसित राष्ट्र बन सकता है। लेकिन शायद वो भूल गए थे कि यूपीए 1 आैर यूपीए 2 दोनों में ही देश की जीडीपी दहार्इ तक पहुंच चुकी थी। उस वक्त देश के प्रधानमंत्री दुनिया के जाने माने इकोनाॅमिस्ट मनमोहन सिंह थे। अब इस बात को मौजूदा सरकार का पैनल की पुष्ट कर रहा है। खास बात ये है कि पैनल ने अपनी रिपोर्ट में मौजूदा समय की जीडीपी को कम आंका है। आइए अापको भी बताते हैं आखिर उन्होेंने अपनी रिपोर्ट क्या कहा है…
ये रही थी मनमोहन के समय में जीडीपी
मनमोहन सिंह सरकार के दस साल के कार्यकाल के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था दहार्इ तक पहुंची थी। रियल सेक्टर के आंकड़ों पर एक पैनल द्वारा दिए गए जीडीपी के बैक-डेट डेटा में इस बात को दर्शाया गया है। आंकड़ों से पता चला है कि 2007-08 में सकल घरेलू उत्पाद में 10.23 फीसदी और 2010-11 में 10.78 फीसदी की वृद्धि हुई। नई श्रृंखला 2011-12 में आधार वर्ष और पहले की श्रृंखला 2004-05 और 1993-94 के रूप में है। हालांकि नए आंकड़े विकास में गिरावट दिखाते हैं। उदाहरण के लिए, 2008-09 में पहले 6.72 फीसदी के मुकाबले नई संख्या के मुताबिक विकास दर 4.15 फीसदी है, जब वैश्विक वित्तीय मंदी के चलते भारत पर प्रभाव पड़ा है।
संकेतक है पैनल द्वारा दिया आंकड़ा
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के अधिकारियों ने रिपोर्ट जारी कर कहा कि पैनल द्वारा प्रदान किया गया आंकड़ा "संकेतक" था और राष्ट्रीय लेखा इन आंकड़ों के आधार पर अंतिम चार सप्ताह में काम करेगा। 2011-12 से नई श्रृंखला के अनुरूप होने के लिए बैक सीरीज़ डेटा अब सकल घरेलू उत्पाद के लिए 1994-95 पर जा रहा है। वास्तविक क्षेत्र के आंकड़ों की समिति का नेतृत्व सुदीप मंडल कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और चौदहवें वित्त आयोग के सदस्य हैं। पैनल ने जीडीपी बैक-सीरीज़ उत्पन्न करने के लिए दो तरीकों का इस्तेमाल किया।
अपेक्षित लाइनों पर थे मतभेद
राष्ट्रीय वित्त और नीति संस्थान, एनआर भानुमूर्ति जो समिति के सदस्य हैं, ने कहा कि "हमने उपलब्ध आधार डेटा लिया है और फिर पिछली गणना की है। हमने पुरानी श्रृंखला और नई श्रृंखला के बीच अंतर लिया है। पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रणब सेन ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि और नई श्रृंखला के पहले अनुमानों के बीच मतभेद अपेक्षित लाइनों पर थे। उन्होंने कहा कि नई संख्या 2004-05 से 2007-08 के लिए पुरानी श्रृंखला की तुलना में उच्च वृद्धि दर्शाती है, जिसकी उम्मीद थी।
Published on:
18 Aug 2018 12:15 pm
