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देश की सभी सरकारी कंपनियों को बेचना चाहता है नीति आयोग, सरकार नाराज

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इस समय ज्यादा सरकारी होल्डिंग वाली कई कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। एेसे में उनकी ओनरशिप और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर बदलना ठीक नहीं है।
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PM Modi

देश की सभी सरकारी कंपनियों को बेचना चाहता है नीति आयोग, सरकार नाराज

नई दिल्ली। देश को मजबूत बनाने के लिए कोई कोर कसर न छोड़ने वाली केंद्र की मोदी सरकार ने एक एेसा कदम उठाया है जिसे जानने के बाद आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। सरकार ने हाल ही में नीति आयोग के एक एेसे प्रस्ताव को नकार दिया है जिससे मोदी सरकार को करीब एक लाख करोड़ रुपए की कमाई होने वाली थी। साथ ही सरकार ने एेसा प्रस्ताव बनाने पर नाराजगी भी जताई है।

क्या था नीति आयोग का प्रस्ताव

दरअसल नीति आयोग ने केंद्र सरकार को अपेक्षाकृत कम महत्व (नॉन-स्ट्रैटेजिक) वाली सरकारी कंपनियों में अपना हिस्सा घटाकर 50 फीसदी से कम करने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में नीति आयोग ने कहा था कि एेसा करने से सरकार को करीब एक लाख करोड़ रुपए की कमाई होगी। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने कहा था कि एेसा करने से नॉन स्ट्रैटेजिक कंपनियों को कामकाज की स्वायत्ता मिलेगी। साथ ही सरकार के बचे हुए हिस्से की वैल्यू बढ़ने की बात भी कही गई थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

250 से अधिक सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज

एक अनुमान के मुताबिक इस समय 250 से अधिक सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSE) में सरकार की 51 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी है। इसमें एनटीपीसी, पावर ग्रिड और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया जैसी नवरत्न कंपनियां भी शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इस समय ज्यादा सरकारी होल्डिंग वाली कई कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। एेसे में उनकी ओनरशिप और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर बदलना ठीक नहीं है।

सरकार को चुनावी मुद्दा बनने का डर

नीति आयोग के इस प्रस्ताव को ठुकराने के पीछे विशेषज्ञों ने कई अलग-अलग वजहें बताई हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी कम करना सरकार के लिए गले की फांस बन सकता था। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार को अगले साल चुनावों में जाना है। एेसे में सरकार नहीं चाहती है कि विपक्ष को बैठे बिठाए कोई मुद्दा मिल जाए।