Hannah Herbst Young Scientist (Image- AI)
दुनिया में जब भी एनर्जी क्राइसिस और बिजली की कमी की बात होती है तो, बड़े-बड़े वैज्ञानिक करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट बनाने में लग जाते हैं। लेकिन अमेरिका के फ्लोरिडा की रहने वाली 15 साल की एक स्कूली बच्ची हन्ना हर्बस्ट ने अपनी सोच और लगन से पूरी दुनिया के सामने सफलता की एक नई मिसाल पेश की है। हन्ना ने कबाड़ और रीसायकल किए गए सामान से महज 12 डॉलर यानी लगभग 1000 रुपये में एक ऐसा जनरेटर तैयार किया जो, समुद्र की लहरों से मुफ्त में बिजली पैदा कर सकता है। हन्ना की यह सफलता की कहानी बताती है कि, अगर इरादे नेक हों तो उम्र और पैसा टैलेंट के आड़े नहीं आता।
हन्ना की इस सफलता के पीछे एक बहुत ही भावुक और खास कहानी है। हन्ना का इथियोपिया में रहने वाला एक फ्रेंड (पेन पाल) था। जब हन्ना को पता चला कि, उसका दोस्त एक ऐसे इलाके में रहता है जहां बिजली तक नहीं है, तो उन्हें बहुत दुख हुआ। वह अपने दोस्त और उस जैसे लाखों लोगों के जीवन में रोशनी लाना चाहती थीं। इसी दौरान एक दिन वह अपने परिवार के साथ समुद्र में बोटिंग करने गईं। वहां पानी की तेज और लगातार उठती लहरों को देखकर उनके दिमाग में एक शानदार आइडिया आया कि, क्यों न इस एनर्जी को बिजली में बदला जाए।
अपने आइडिया को सच करने के लिए हन्ना ने दिन-रात मेहनत की। उन्होंने महंगी मशीनों के बजाय सस्ते और कबाड़ के सामान का इस्तेमाल किया। एक पीवीसी पाइप, रीसायकल किया हुआ प्लास्टिक, एक 3D प्रिंटेड पंखा (प्रोपेलर) और एक छोटे हाइड्रोइलेक्ट्रिक जनरेटर की मदद से उन्होंने अपना डिवाइस तैयार कर लिया। उन्होंने इस प्रोजेक्ट का नाम बीकन (BEACON) रखा। जब फ्लोरिडा के समुद्र में इस छोटे से डिवाइस का टेस्ट किया गया तो, पानी की लहरों से पंखा घूमा और उससे पैदा हुई बिजली से एलईडी लाइटें जल उठीं। यह हन्ना की एक बहुत बड़ी जीत थी।
हन्ना की इस खोज ने विज्ञान जगत में तहलका मचा दिया। उनके इस टैलेंट के लिए उन्हें प्रतिष्ठित 3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज का विजेता चुना गया। यह पुरस्कार युवा वैज्ञानिकों के लिए दुनिया के सबसे बड़े सम्मानों में से एक माना जाता है। सोलर पैनल और पवन चक्की के मुकाबले हन्ना का यह जनरेटर हर मौसम में और 24 घंटे बिजली दे सकता है क्योंकि समुद्र की लहरें कभी नहीं रुकतीं।
हन्ना की सफलता सिर्फ एक मशीन बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि, उनकी सोच उन्हें एक सफल और महान इंसान बनाती है। हन्ना चाहतीं तो अपने इस आविष्कार का पेटेंट कराकर करोड़ों रुपये कमा सकती थीं लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। हन्ना ने फैसला किया कि, वह इस जनरेटर की तकनीक को सबके लिए फ्री (ओपन सोर्स) रखेंगी। उनका मकसद है कि दुनिया के किसी भी कोने में बैठा गरीब इंसान इस डिजाइन को देखकर अपने गांव के लिए खुद का सस्ता जनरेटर बना सके। आने वाले समय में इस तकनीक से सुदूर गांवों में अस्पताल की मशीनें और खारा पानी साफ करने वाले प्लांट चलाए जा सकेंगे।
Published on:
22 May 2026 12:08 pm
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