4 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

NEET में कितने नंबर पर मिलेगा सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश, ये रहेगा संभावित कटऑफ

NEET UG Cutoff 2026: नीट यूजी परीक्षा संपन्न होने के बाद एक्सपर्ट्स ने संभावित कटऑफ जारी कर दी है। जानिए सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस एडमिशन के लिए कितने अंकों की जरूरत होगी।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Mohsina Bano

May 04, 2026

NEET UG expected cutoff

NEET UG Cutoff 2026 (Image- ChatGPT)

NEET UG 2026: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हो गई। परीक्षा देकर निकले कैंडिडेट्स को अब अपने रिजल्ट और कटऑफ का बेसब्री से इंतजार है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट पाने के लिए कितने अंकों की जरूरत होती है तो, आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस बार सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए संभावित स्कोर क्या हो सकता है।

सरकारी मेडिकल कॉलेज क्यों है पहली पसंद

प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस का खर्चा बहुत ज्यादा होता है, जिसे आम परिवारों के लिए चुकाना मुश्किल होता है। वहीं सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फीस नाम मात्र की होती है और पढ़ाई के साथ साथ बेहतरीन क्लिनिकल एक्सपोजर भी मिलता है। यही कारण है कि नीट परीक्षा देने वाले लाखों स्टूडेंट्स के बीच कुछ हजार सरकारी सीटों के लिए बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है।

कितने स्कोर पर मिलेगी सरकारी सीट

पिछले कुछ सालों के परीक्षा परिणामों और पेपर के स्तर को देखते हुए एक्सपर्ट्स ने इस बार का संभावित कटऑफ तैयार किया है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए 650 अंक को सुरक्षित माना जा रहा है। अलग अलग कैटेगरी की बात करें तो नीचे दिए गए अंकों के आधार पर एडमिशन मिल सकता है:

  • जनरल कैटेगरी के लिए कटऑफ 610 से 650 अंकों के बीच रहने की उम्मीद है।
  • ओबीसी वर्ग के लिए यह 590 से 630 अंकों के आसपास रह सकती है।
  • एससी वर्ग के लिए 450 से 520 अंक तक कटऑफ जा सकती है।
  • एसटी वर्ग के लिए कटऑफ 420 से 500 अंकों के बीच रहने का अनुमान है।

काउंसलिंग की भूमिका होती है सबसे अहम

स्टूडेंट्स को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि नीट का रिजल्ट आने के बाद असली प्रक्रिया काउंसलिंग की होती है। कई बार अच्छे नंबर होने के बावजूद सही जानकारी न होने पर छात्र बेहतरीन कॉलेज की सीट से चूक जाते हैं। इसलिए कैंडिडेट्स को ऑल इंडिया कोटा (15 प्रतिशत) और स्टेट कोटा (85 प्रतिशत) दोनों की काउंसलिंग प्रोसेस पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। बता दें इस बारएमबीबीएस कोर्स के लिए भारत में कुल 1.29 लाख से ज्यादा सीटें हैं।