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भारत की पहली Spy Lady की कहानी सुन उड़ जाएंगे होश… कभी गर्भवती महिला तो कभी नौकरानी बन करती थीं ये काम

Rajni Pandit Aka James Bond: नौकरानी और गर्भवती महिला बन करतीं थीं जासूसी, स्टूडेंट्स में जोश भर देगी भारत की पहली Spy Lady की कहानीरजनी पंडित…जिन्हें भारत की पहली महिला जासूस और लेडी जेम्स बॉन्ड कहा जाता है, उनकी कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। इसे हर हर स्टूडेंट को पढ़ना चाहिए, जो जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको रजनी के जीवन के वे अनसुने वाकयात बताने वाले हैं, जिन्हें सुनकर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे, कि कोई महिला इतने बड़े खतरे बिना डरे कैसे झेल सकती है। उन्होंने केवल रिस्क को नहीं चुना, बल्कि अपने आत्मबल और विश्वास से हर मिशन में कामयाब भी रहीं।

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भारत

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Mohsina Bano

Jan 05, 2026

Rajni Pandit Aka James Bond Story

Rajni Pandit inspirational Story ( Image Saurce: File Photo)

Rajni Pandit Aka James Bond Story: जासूसी शब्द सुनते ही जो चेहरे, आपके मन में उभरते होंगे… मुमकिन है, वो पुरुषों के ही होंगे। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि ज्यादातर जासूस पुरुष ही रहे हैं… लेकिन इस सोच को एक 18 साल की लड़की ने करीब 45 साल पहले अपने जुनून से बदल डाला था। जिस उम्र में युवा ये सोच रहे होते हैं, कि उन्हें 10वीं कक्षा के बाद कौन-सा विषय चुनना है… उस उम्र में रजनी पंडित नाम की इस किशोरी ने जासूसी को लक्ष्य के रूप में चुन लिया था। रजनी बाद में, लेडी जेम्स बोंड के नाम से मशहूर हुईं। इनकी स्टोरी डराती है, सोचने पर मजबूर करती है और हर सिचुएशन में रिस्क लेकर आगे बढ़ने की सीख भी देती है। इस लेख में जानते हैं, रजनी पंडित उर्फ भारत की लेडी जेम्स बोंड की अनसुनी कहानी…

कभी नहीं ली ट्रेनिंग

रजनी ने अपने जीवन में कभी ट्रेनिंग नहीं ली। मुंबई के रुपारेल कॉलेज से मराठी साहित्य में ग्रेजुएशन किया। शुरुआत में क्लर्क की नौकरी की। पढ़ाई के साथ ही अपना ट्रेनिंग सिस्टम शुरू किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि रजनी कि ट्रेनिंग पीरियड बस स्टैंड, अस्पताल और दफ्तरों जैसे प्रैक्टीकल क्लास रुमों में बीता। उन्होंने धीरे-धीरे ह्यूमन बिहेवियर को पढ़ने की कला सीख ली। कब आंखें घूमती हैं, कब आवाज बदलती है, और कौन कब झूठ बोलता है। वह मानती थीं कि, केस कागज से नहीं…इंसान की साइकोलॉजी को पढ़कर सोल्व होता है।

अपनी हर गलती लिखती थीं

रजनी के जीवन की सबसे खास बात यह थी कि वह हर केस के बाद खुदको आंकती थीं। वह नोट करती थीं कि, कहां गलती हुई, कौन सा सवाल पहले पूछना था और कब चुप रहना बेहतर होता। लगातार सेल्फ-ऑडिट (Self-Audit) करने की आदत ने उन्हें, भारत की सबसे बेस्ट निजी जासूस बनने में काफी मदद की।

रजनी पंडित ने जासूस बनने का फैसला क्यों किया?

जानकारी के अनुसार, रजनी का जासूस बनने का फैसला 'पैदाइशी' था। कॉलेज टाइम में उन्होंने एक लड़की को बुरी संगती से बचाने में मदद की। इसकी कामयाबी ने उन्हें मोटिेवेट किया। उनके पिता CID में सब-इंस्पेक्टर थे। रजनी के पिता शुरुआत में तो उनके फैसले के खिलाफ थे, लेकिन मां ने शुरु से पूरा साथ दिया। बाद में पिता ने भी इस सफर में रजनी को सपोर्ट किया।

नौकरानी और गर्भवती महिला बनती थी

रजनी पंडित ने अपने इंटरव्यूज में ये खुलासा किया है कि, जासूसी के दौरान उन्हें कई बार अपना रूप बदलना पड़ा। नौकरानी, गर्भवती महिला, कामवाली बाई से लेकर कई तरह के किरदार उन्होंने निभाए। अपने मिशन की कामयाबी के लिए, उन्हें जो भी करना पड़ता था…वे बिना डरे करती थीं।

रजनी के जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज

रजनी के जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज समाज और पुरुष-प्रधान पेशे को चुनना था। 1980 के दशक में, एक महिला जासूस की काबिलियत पर शक किया जाता था। जानकारी के मुताबिक, एक अखबार ने उनका विज्ञापन तक छापने से मना कर दिया था। कई बार क्लाइंट्स ने फंसाने के लिए झूठे केस भी दिए। इन सबके बावजूद रजनी कभी हालातों के सामने झुकी नहीं और अंत तक अपने सपने का पीछा किया।

अपनी मर्जी से नहीं की शादी

रजनी ने जासूसी को अपने जीवन का लक्ष्य बनाने के बाद से ही अकेला रहने का मन बना लिया था। आप को बता दें कि, रजनी ने शादी इसलिए नहीं की, ताकि वो अपने पैशन और काम को पूरा वक्त दे सकें। रिपोर्ट्स के अनुसार, रजनी ने 80 हजार से ज्यादा केस सुलझाए हैं। इनमें मर्डर और कॉर्पोरेट जासूसी जैसे टफ केस भी शुमार हैं।

रजनी पंडित कैसे केस सुलझाती थीं?

रजनी किसी सरकारी एजेंसी जैसे RAW या IB की एजेंट नहीं हैं। वह एक प्राइवेट डिटेक्टिव (निजी जासूस) हैं। इतना ही नहीं रजनी की इन्वेस्टिगेटिव ब्यूरो नाम से प्राइवेट स्पाई एजेंसी भी है। उनका काम भारत में नागरिक, पारिवारिक और कॉर्पोरेट से जुड़े मामलों पर केंद्रित रहा है। मीडिया ने उनकी बहादुरी, अंडरकवर और रिस्क टेकिंग स्कील्स के कारण ही उन्हें 'लेडी जेम्स बॉन्ड' का नाम दिया है।

रजनी पंडित की कहानी सिखाती है कि, जासूस बनने के लिए हथियार नहीं, बल्कि दिमाग, हिम्मत और खुद पर भरोसा होना सबसे जरूरी है। यदि आप भी खुद पर विश्वास रख किसी काम को पॉजिटिव थिंकिंग के साथ शुरु करते हैं, तो सफलता मिलना तय है।