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UP Assembly Election 2022: बनारस कांग्रेस का टिकट बंटवारा विवाद हाईकमान के पाले में

UP Assembly Election 2022 के लिए बनारस कांग्रेस के घोषित प्रत्याशियों को लेकर वाराणसी में घमासान मचा है। विपक्ष भी इस मसले को लेकर नजरें बनाए हुए हैं। विधानसभा प्रभारियों और स्थानी कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के मान मन्नौवल के बाद अब ये पूरा मामला हाई कमान के पाले में चल गया है। बताया जा रहा है कि एक-दो दिन में फैसला हो जाएगा।

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कांग्रेस फ्लैग

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वाराणसी. UP Assembly Election 2022 में एकला चलो के सिद्धांत पर चल रही कांग्रेस के लिए बनारस के प्रत्याशी चयन का मामला बड़ा सिरदर्द साबित हो रहा है। वाराणसी में दावेदारों और उनके समर्थकों के विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। इस बीच यह पूरा मसला अब कांग्रेस हाईकमान के पाले में चला गया है। इस संबंध में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और टिकट वितरण में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले राजेश तिवारी ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि बनारस का प्रकरण हाईकमान को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में पूरा प्रकरण हल कर लिया जाएगा।

पत्रिका से बातचीत में तिवारी ने कहा कि पिछले दो-तीन दिन से जो चल रहा है वाराणसी में उस पर हम सभी का ध्यान है। हम सभी ये चाहते है कि जल्द से जल्द मामले का निबटारा हो जाए। यही वजह है कि इस प्रकरण को हाईकमान को भेज दिया गया है। अब केंद्रीय टिकट वितरण कमेटी ही इस पर अपना निर्णय करेगी।

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वैसे इधर बनारस में घोषित प्रत्याशियों का विरोध करने वालों की बात करें तो उनका कहना है कि वाराणसी के दिग्गजों की सलाह पर ही टिकट फाइनल हुआ है। वाराणसी कांग्रेस की गुटबाजी के मद्देनजर यहां के दो दिग्गजों के बीच ही सारे टिकट बांट दिए गए। ऐसे में वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में से 5-3 के तहत बंटवारा हो गया है। इसमें उनका कहना है कि जो भी टिकट बंटा है उसमें चुनाव संचालन समिति, सर्वे रिपोर्ट और स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट को ताख पर रख दिया गया है। विरोध की सबसे बड़ी वजह यही है। इस बीच शहर की सीटों के बंटवारे में पैसे के खेल का आरोप भी लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं विरोध करने वाले ये भी कह रहे हैं कि किसी उच्च स्तरीय नेताओं के घर के इंटीरियर डेकोरेशन को मूर्त रूप देने वालों को बदलने में टिकट दे दिया गया।

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विरोध करने वालों का तर्क है कि टिकट बंटवारे में स्थानीय नेताओं और टिकट वितरण प्रभारी की सहमति से ही ये टिकट बांटे गए हैं। सोची समझी रणनीति के तहत काम किया गया है, जिसके तहत शहर की दो सीटें दक्षिणी और उत्तरी में महिला प्रत्याशी उतारा गया। उनका आरोप है कि रणनीति के तहत महिलाओं को टिकट देने की सिफारिश की गई ताकि इस पर यूपी प्रभारी और राष्ट्रीय महाचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को भी कोई आपत्ति नहीं होगी।

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ऐसे में अब माना ये जा रहा है कि टिकट वितरण पर मचे कोहराम में बहुत कुछ होने नहीं जा रहा। जिसे जहां से टिकट मिला है वो ही अंतिम अधिकृत उम्मीदवार होंगे। इसके पीछे नामांकन दाखिले में सीमित समय भी बड़ा कारण बताया जा रहा है। हालांकि रेखा शर्मा के प्रति पार्टी के बड़े पदाधिकारी सहानुभूत जता रहे हैं और वो भी मानते हैं कि रेखा जुझारू और कर्मठ नेता हैं।