
जातीय समीकरण और बाहुबल से तय होती है पूर्वांचल में जीत
राजनीति हो अपराध। पूर्वांचल के आंचल में हमेशा ही यह पनाह पाते रहे हैं। यही वजह है कि पश्चिम से लड़ाई भले ही किसी की शुरू हो लेकिन पूर्वांचल के हस्ताक्षेप के बिना कभी खत्म नहीं होगी है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जीत तय करने के लिए जातीय समीकरण के अनुरूप 91 प्रत्याशियों को टिकट जारी कर दिया है लेकिन इन टिकटों पर भारी कौन रहता है और जीत किसका दामन थामती है यह तो वक्त बताएगा। पूर्वांचल का शिकागो कहा जाने वाला गोरखपुर इस बार भी गोलघर का चक्कर लगा रहा है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ स्वयं ही गोरखपुर से ताल ठोक रहे हैं। तो उनके धुर विरोधी माने जाने हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी एक बार फिर से चिल्लूपार से ताल ठोंक रहे हैं और उनके सामने हैं राजेश त्रिपाठी। यह वही राजेश हैं जिनसे हार के बाद हरिशंकर तिवारी ने चुनावी राजनीति से सन्यास ले लिया था।
यूं भी पूर्वांचल की कई सीटों पर जीत हार का फैसला कोई पार्टी या फिर समीकरण नहीं बल्कि बाहुबलियों का दबदबा करता है। सपा और भाजपा की सीधी लड़ाई को यहां की कई सीटों पर बसपा त्रिकोणीय मुकाबले में बदल रही है। भाजपा ने जीत पुख्ता करने के लिए छठवीं सूची में 17 विधायकों के टिकट काट दिए हैं लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि इससे विरोधियों का व्यूह किस तरह से बांसी, खलीलाबाद, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, पडरौना, जौनपुर, अकबरपुर, अयोध्या में काट पाएगी। समाजवादी पार्टी भी शनिवार से सोमवार के बीच टिकट जारी कर यहां की सीटों पर रोचक मुकाबला देने की तैयारी में है।
अयोध्या के दंगल में उतरे पवन और वेद
अयोध्या में एक बार से पुराना प्रत्याशियों का ही मुकाबला देखने को मिलेगा। समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री पवन पांडेय को मैदान में उतारा है तो वहीं भाजपा ने एक बार फिर से वेद प्रकाश गुप्ता को टिकट दिया है। यह वही पवन पांडेय हैं जिन्होंने राम मंदिर के नाम पर में जमीनों की हेराफेरी का मसला उठाया था।
बाहुबलियों की लड़ाई
अयोध्या से सटी सीट गोसाईगंज में बाहुबली अभय सिंह और बाहुबली इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। अभय सिंह पूर्व में विधायक रह चुके हैं और खब्बू तिवारी की विधायकी हाल ही में रदद हो चुकी है।
17 का काटा, 21 ब्राह्मण को बांटा
पूर्वाचंल और अवध की राजनीति में ब्राह्मण की ताकत का अंदाजा बखूबी सभी को है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी ने जारी की गई सूची में 21 ब्राह्मणों को टिकट जारी किया है। इतना ही नहीं बसपा के बिगड़ते समीकरण को देखते हुए हाथी और गणेश का लाभ उठाने की पूरी तैयारी में है। यही वजह है कि 20 अनूसचित जाति के प्रत्याशी को भी उतारा है।
स्थानीय विरोध सबसे बड़ा अवरोध
पूर्वांचल की बात हो या फिर अवध की। जातीय समीकरण में उलझी इन सीटों से बने विधायकों के लिए अब सबसे बड़ा अवरोध स्थानीय विरोध बनकर ही उभरा दिखाई दे रहा है। ऐसे में बिना किसी लहर के हो रहे इस विधानसभा चुनाव में विरोधी लहर से बचाना ही बड़ी बाजीगरी होगी। चाहे बस्ती जिले की सीटें हो या बांसी की। गोरखपुर की बात हों या फिर जौनपुर की।
Published on:
30 Jan 2022 10:18 am
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