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UP assembly elections 2022: बाहुबली रमाकांत को बेटे के साथ सपा के दूसरे गुट से भी मिलेगी चुनौती, आसान नहीं होगी राह

UP assembly elections 2022 कभी फूलपुर में अजेय रहे बाहुबली रमाकांत यादव को मैदान में उतार सपा ने बड़ा दाव खेला है लेकिन इस बार रमाकांत यादव के सामने चुनाव में कई चुनौतियां होगी। पहले तो उनका अपना पुत्र विरोधी पार्टी बीजेपी का विधायक है और टिकट की दावेदारी कर रहा है। वहीं सपा के पूर्व विधायक भी रमाकांत के धुर विरोधी है। वहीं बीएसपी यहां मुस्लिम प्रत्याशी उतार यहां सपा की मुश्किल और बढ़ा सकती है।
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आजमगढ़

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Ranvijay Singh

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Updated: 29 Jan 2022, 11:22 AM IST

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. UP assembly elections 2022 यूपी की सत्ता हासिल करने की जद्दोजहद में जुटे राजनीतिक दल एक के बाद एक दाव चल रहे हैं। इसी के तहत सपा मुखिया ने बीजेपी की एक मात्री जीती हुई सीट छीनने के लिए फूलपुर पवई से पूर्व सांसद बाहुबली रमाकांत यादव को मैदान में उतारा है लेकिन पहली बार रमाकांत चुनौतियों से घिरे दिख रहे हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उनका अपना पुत्र विधायक अरूणकांत यादव हैं जो बीजेपी से इसी सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे है। दूसरी तरफ सपा के पूर्व विधायक श्याम बहादुर यादव भी रमाकांत यादव के घुर विरोधियों में शामिल हैं। यही नहीं बसपा भी यहां से मुस्लिम प्रत्याशी उतारने में मूड में है। ऐसे में यहां लड़ाई काफी दिलचस्प होने की उम्मीद है।

बता दें कि रमाकांत यादव की गिनती पूर्वांचल के मजबूत नेताओं में होती है। रमाकांत यादव ने 1985 में फूलपुर सीट से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी और 1993 तक लगातार चार बार विधायक चुने गए। वर्ष 1996 में उन्होंने अपनी पत्नी रंजना यादव को फूलपुर पवई सीट से लड़ाया और खुद लोकसभा का चुनाव आजमगढ़ सीट से लड़ गए। उनकी पत्नी विधायक नहीं बन सकी, बाद में उन्होंने यह सीट बेटे अरुणकांत यादव लिए छोड़ दी। अरुणकांत 2007 में यहां से सपा के विधायक बने थे। वहीं रमाकांत यादव विभिन्न दलों से चार बार सांसद चुने गए। वर्ष 2009 में रमाकांत यादव बीजेपी से सांसद चुने गए थे। वहीं वर्ष 2017 में अरूणकांत यादव बीजेपी से विधायक चुने गए।

वर्ष 2019 में बीजेपी ने रमाकांत यादव को लोकसभा टिकट नहीं दिया तो वे कांग्रेस में शामिल हो गए और भदोही से लोकसभा चुनाव लड़ा और जमानत भी नहीं बचा पाए। उन्हें मात्र 26 हजार मत मिले। इसके बाद रमाकांत यादव सपा में शामिल हो गए लेकिन पार्टी में वे लगातार हाशिए पर दिख रहे थे। अब पार्टी ने बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें फूूलपुर पवई सीट से उम्मीदवार बना दिया है। वर्तमान में यह सीट बीजेपी के पास है और रमाकांत के पुत्र अरूणकांत यादव यहां से विधायक हैं। अरूणकांत यहां से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। वहीं अब रमाकांत यादव मैदान में उतर चुके हैं। सपा से यहां पूर्व विधायक श्याम बहादुर यादव भी टिकट की दावेदारी कर रहे थे।

रमाकांत के धुर विरोधी है श्याम बहादुर
श्याम बहादुर यादव को रमाकांत का धुर विरोधी माना जाता है। कई मौकों पर दोनों आमने सामने हो चुके हैं। यहां तक दोनों के बीच थाने में सार्वजनिक रुप से विवाद हो चुका है। अब रमाकांत यादव मैदान में हैं और श्याम बहादुर को पार्टी ने किनारे कर दिया है। ऐसे में उनके समर्थकों में गुस्सा साफ दिख रहा है। श्याम बहादुर के साथ यादवों का एक बड़ा गुट है जो सीधे तौर पर रमाकांत को पसंद नहीं करता है। इन्हें साधना रमाकांत के लिए बड़ी चुनौती होगी।

बेटे से ही अच्छे नहीं हैं संबंध
रमाकांत और अरूणकांत के संबंध भी बहुत अच्छे नहीं है। रमाकांत यादव द्वारा पहली पत्नी के रहते रंजना यादव से शादी करने के बाद दोनों के बीच दरार पड़ी जो आज तक कायम है। पिछले निकाय चुनाव में अरूणकांत ने अपनी मां को माहुल से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ाया तो अंदर खाने से रमाकांत ने विरोध किया था। यही नहीं अभी हाल में हुए पंचायत चुनाव में अरूण ने अपने भाई वरूणकांत को पवई सीट से ब्लाक प्रमुख चुनाव लड़ाया था। उस समय सपा प्रत्याशी और अरूणकांत में विवाद हुआ था। उस समय भी रमाकांत सपा के साथ खड़े हुए थे। अरूण मीडिया के सामने भी कह चुके हैं। पिता मैदान में उतरे या कोई और उनकी वैचारिक लड़ाई है और पूरी ताकत से लड़ेगे।

रमाकांत ने बेटे को हराने की कही थी बात
हाल में जब रमाकांत ने फूलपुर से टिकट मांगा था तो उस समय सवाल उठा था कि बेटे के खिलाफ कैसे लड़ सकते है। उस समय उनका कहना था कि खिलाफ चुनाव लड़ने वाला सिर्फ प्रतिद्वंदी होता है। बीजेपी को आजमगढ़ में एक भी सीट नहीं जीतने देंगे। अगर बीजेपी का खाता खुला तो राजनीति से सन्यास लें लेंगे।

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