28 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘पति पत्नी और वो दो’ पर छिड़ी नई बहस, क्या एडल्टरी को कॉमेडी बनाना सही है?

Pati Patni aur Woh Do film: 'पति पत्नी और वो 2' की रिलीज के बाद एडल्टरी को लेकर नई बहस छिड़ गई है कि क्या इसे कॉमेडी के रूप में पेश करना सही है या नहीं। एडल्टरी जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को कॉमिक आइडलोगी में दिखाना कुछ दर्शकों को मनोरंजक लग सकता है, जबकि कई लोग इसे गैरजिम्मेदाराना और गलत संदेश देने वाला मान रहे हैं।

2 min read
Google source verification
'पति पत्नी और वो 2' पर छिड़ी नई बहस, क्या एडल्टरी को फिर कॉमेडी बनाना सही है?

कॉमेडी फिल्में (फोटो सोर्स: IMDb)

Pati Patni aur Woh Do film: साल 2026 में जब इंसान चांद के दूसरी ओर की तस्वीरें खींच रहा है, लेकिन भारतीय सिनेमा एक बार फिर वहीं खड़ा है जहां दशकों पहले था। 'पति पत्नी और वो दो' (Pati Patni aur Woh Do) और 'है जवानी तो इश्क होना है' जैसी आने वाली फिल्मों के टीजर ने एक पुरानी और थकी हुई बहस को फिर से ताजा कर दिया है बॉलीवुड में बेवफाई को कॉमेडी की तरह पेश करने की परंपरा, जो घिसी-पिटी कहानियां दे रहा है।

1978 की फिल्म और 2019 की रीमेक क्लिप्स का है यूज

15 मई को रिलीज होने वाली फिल्म 'पति पत्नी और वो दो' में आयुष्मान खुराना एक अलग तरह के स्पर्म डोनर का किरदार निभाने वाले है। बता दें, इसके टीजर में वो वामिका गब्बी, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह के साथ रोमांस करते दिखे हैं। फिल्म के टीजर में 1978 की फिल्म और 2019 की रीमेक के क्लिप्स का यूज करके ये संदेश देने की कोशिश की गई है कि "पतियों की फितरत कभी नहीं बदलती।" लेकिन सवाल ये है, क्या ये किसी समस्या को स्वीकार करने की कोशिश है या मर्दों की बेवफाई को उनके स्वभाव का हिस्सा बताकर नॉर्मल बनाने की?

फिल्म के टीजर में 2 बच्चे अपने पिता को लेकर उलझे

बता दें, 22 मई को रिलीज होने वाली वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मृणाल ठाकुर स्टारर इस फिल्म के टीजर में 2 बच्चे अपने पिता को लेकर उलझे हुए हैं। साथ ही, वरुण दो महिलाओं के साथ रोमांस करते दिखाए गए हैं और शायद दोनों से उनके बच्चे भी होंगे। मजेदार या दुखद बात ये है कि इस फिल्म का नाम 'बीवी नंबर 1' के एक गाने से लिया गया है, जो खुद एक शादीशुदा आदमी की बेवफाई पर बेस्ड फिल्म थी, लेकिन एडल्टरी को कॉमेडी बनाना सही नहीं है।

दिक्कत बेवफाई दिखाना नहीं बल्कि घिसी-पिटी कहानियां देना है

इतना ही नहीं, यहां पर दिक्कत बेवफाई दिखाना नहीं है। हिंदी सिनेमा ने हमेशा से इस विषय को अलग-अलग तरीकों से पर्दे पर उतारा है, जहां 'पहेली', 'कभी अलविदा ना कहना', 'अस्तित्व', 'मर्डर', 'हसीन दिलरुबा' जैसी कई फिल्मों में असली समस्या है बेवफाई के टोन और ट्रीटमेंट में।

इतना ही नहीं, जब पुरुषों की गंभीर गलतियों को हंसी-मजाक में बदल दिया जाता है और उन्हें उनके जेंडर का स्वाभाविक गुण बताया जाता है, तो ये सिनेमा नहीं बल्कि एक खतरनाक सामाजिक संदेश बन जाता है। दरअसल, 'मस्ती' फ्रेंचाइजी की 4 फिल्मों में तीन पति बार-बार अपनी पत्नियों को धोखा देते हैं और हर बार ये सब हंसाने के लिए किया जाता है। 'सलाम-ए-इश्क', 'बीवी नंबर 1', 'एक ही भूल' जैसी फिल्मों में बेवफा पतियों को अंत में माफी मिल जाती है जब वे थोड़ा पछतावा दिखाते हैं, जो हमेशा मजेदार नहीं होती।

कॉमेडी फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन के लिए बनाए जाते है

बता दें, बॉलीवुड की इस दुनिया में कहानी के दोहरा दिखाया जाता है। बेवफा पतियों को कॉमेडी का हीरो बनाया जाता है, लेकिन बेवफा पत्नियों को हमेशा गंभीर नतीजे भुगतने पड़ते हैं। ऐसी ही एक और फिल्म है 'अस्तित्व' जिसमें तब्बू का किरदार एक गलती की वजह से अपनी पूरी शादी खो देता है, जो हालात की वजह से गलत रास्ते पर जाती है न कि बोरियत या मजे के लिए। महिला किरदार कभी भी सिर्फ इसलिए बेवफाई नहीं करतीं कि उन्हें मजा करना है या उनकी फितरत ऐसी है। बता दें, इन सभी कॉमेडी फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन के जरिए से ही बनाया जाता है, कोई भी गलत संदेश देने के लिए नहीं।

बड़ी खबरें

View All

मनोरंजन

ट्रेंडिंग