
रेणुकास्वामी मर्डर केस में फिर बढ़ी दर्शन की मुश्किलें (सोर्स: X-@ihsan21792)
Darshan High Court Petition: कन्नड़ एक्टर दर्शन थुगुदीपा ने रेणुकास्वामी मर्डर केस की सुनवाई के दौरान फिजिकल तौर पर कोर्ट में पेश होने की मांग को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बेंगलुरु की ट्रायल कोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया था। अब दर्शन ने 59वें सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट (CCH) के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
दर्शन ने अपनी रिट याचिका में मांग की है कि जब केस में गवाह कोर्ट के सामने अपने बयान दर्ज कराएं, तब उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद रहने की अनुमति दी जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट की बेंच आने वाले दिनों में इस याचिका पर सुनवाई कर सकती है।
ट्रायल कोर्ट ने दर्शन को सुनवाई के दौरान फिजिकली कोर्ट लाने की उनकी मांग को सुरक्षा कारणों के चलते खारिज किया था। कोर्ट का कहना था कि एक्टर को जेल से अदालत तक लाने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती करनी पड़ेगी।
कोर्ट ने यह भी माना था कि इससे अदालत परिसर में भीड़ बढ़ सकती है और पहले भी ऐसी परिस्थितियां सामने आ चुकी हैं। कोर्ट के मुताबिक, इस तरह के सुरक्षा इंतजाम उसके नियमित प्रशासनिक कामकाज में दखल डाल सकते हैं।
अब तक ट्रायल में 23 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। अपनी याचिका में दर्शन ने कहा है कि गवाहों की गवाही के दौरान उन्हें सुनने और देखने का अधिकार होना चाहिए। उनका तर्क है कि गवाहों के बयान आरोपी की मौजूदगी में दर्ज किए जाने चाहिए।
दर्शन ने मौजूदा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है। याचिका के मुताबिक, बेंगलुरु सेंट्रल जेल और कोर्ट में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को नियमित तौर पर अपग्रेड नहीं किया गया है, जिसके कारण वर्चुअल सुनवाई के दौरान तकनीकी समस्याएं आती हैं।
रेणुकास्वामी मर्डर केस में दर्शन, उनकी पार्टनर पवित्रा गौड़ा और 15 अन्य आरोपियों के खिलाफ जून 2024 में 33 वर्षीय रेणुकास्वामी के कथित अपहरण, टॉर्चर और हत्या का मामला दर्ज किया गया था।
केस के मुताबिक, चित्रदुर्ग के रहने वाले दर्शन के फैन रेणुकास्वामी ने कथित तौर पर पवित्रा गौड़ा को आपत्तिजनक मैसेज भेजे थे। इसके बाद उसे कथित तौर पर अगवा कर बेंगलुरु के एक शेड में ले जाया गया, जहां उसके साथ मारपीट और टॉर्चर किया गया। बाद में उसका शव कथित तौर पर एक स्टॉर्मवॉटर ड्रेन के पास फेंक दिया गया था।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट दर्शन की जमानत रद्द कर चुका है और उन्हें दोबारा गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि बेंगलुरु में ट्रायल जारी रहने तक उन्हें किसी वीआईपी विशेषाधिकार के बिना रखा जाए।
अब गवाहों की गवाही के दौरान फिजिकल मौजूदगी की मांग दर्शन की ओर से हाई कोर्ट के सामने उठाया गया नया कानूनी मुद्दा है। उनकी याचिका पर हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद यह साफ होगा कि उन्हें आगे की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने की अनुमति मिलती है या नहीं।
Updated on:
7 Sep 2026, 4:07 PM IST
Published on:
7 Sep 2026, 4:07 PM IST
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