
हिना खान समेत इन सितारों ने उठाए ब्रांड्स की सोच पर रखी अपनी राय (सोर्स: x-@Jeredwiliam/Instagram-realhinakhan)
Hina Khan Statement: रक्षा बंधन के मौके पर एक ब्रांड के विज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं रहा है। इस मुद्दे पर रुबीना दिलैक, हिना खान, रॉकी जायसवाल और अभिनव शुक्ला ने एक शो में खुलकर अपनी राय रखी। स्टार्स ने फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन, पर्सनल चॉइस, धार्मिक भावनाओं, ब्रांड मैसेजिंग और ऑनलाइन ट्रोलिंग जैसे कई पहलुओं पर चर्चा की।
शो में इस बात पर बहस हुई कि किसी ब्रांड को त्योहार और संस्कृति से जुड़े विज्ञापन बनाते समय कितनी संवेदनशीलता बरतनी चाहिए और क्या किसी कलाकार के कपड़ों को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा करना सही है।
स्टार्स में इस बात पर चर्चा हुई कि किसी व्यक्ति के कपड़ों को लेकर विवाद खड़ा करने से पहले पूरे संदर्भ को समझना जरूरी है। इस दौरान यह बात भी सामने आई कि 'माय बॉडी, माय रूल' जैसी सोच हर संदर्भ में लागू नहीं की जा सकती, खासकर जब मामला किसी धार्मिक त्योहार से जुड़ा हो।
शो की चर्चा में ये सवाल भी उठाया गया कि फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन पूरी तरह से अब्सोल्यूट नहीं है और किसी भी ब्रांड या व्यक्ति को अपनी बात रखते समय सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए।
शो में कलाकारों की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा हुई। स्टार्स का कहना था कि एक्टर्स के पास किसी विज्ञापन का हिस्सा बनने या न बनने का विकल्प होता है। हालांकि, कई बार कलाकार शायद यह अंदाजा नहीं लगा पाते कि विज्ञापन में उनकी किसी खास चीज को ही चर्चा का केंद्र बना दिया जाएगा।
इस दौरान यह भी कहा गया कि अगर किसी विज्ञापन को किसी त्योहार से जोड़कर पेश किया जाता है तो ब्रांड के लिए यह समझना जरूरी है कि त्योहार का इस्तेमाल सिर्फ प्रोडक्ट प्रमोशन के लिए नहीं किया जा सकता। हिना के मुताबिक, त्योहार की लहर का इस्तेमाल करके चर्चा बटोरना और फिर लोगों की भावनाओं से टकराने वाली चीज सामने आना विवाद की वजह बन सकता है।
चर्चा के दौरान ब्रांड्स की रणनीति पर भी सवाल उठे। हिना ने कहा कि किसी प्रोडक्ट को प्रमोट करने के लिए त्योहार का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन इसके साथ आने वाली सांस्कृतिक संवेदनशीलता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इसका एक अहम हिस्सा ये भी था कि ब्रांड्स को सिर्फ चर्चा पैदा करने के लिए पब्लिक सेंटीमेंट के साथ नहीं खेलना चाहिए। अगर किसी विज्ञापन का उद्देश्य लोगों का ध्यान खींचना है, तो भी उसे संस्कृति और त्योहार से जुड़े संदर्भों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।
स्टार्स ने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और फैनडम पर भी चर्चा की। इस दौरान डिजिटल हिपोक्रिसी और टॉक्सिक फैनडम जैसे मुद्दे सामने आए। सवाल यह भी था कि क्या सोशल मीडिया पर किसी सेलिब्रिटी की बात से असहमति जताते हुए लोग जरूरत से ज्यादा व्यक्तिगत हमले करने लगते हैं।
शो के इस सेगमेंट पर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। एक यूजर ने लिखा कि मामला सिर्फ महिलाओं के कपड़ों का नहीं, बल्कि संस्कृति, एथिक्स और त्योहार से जुड़ा है। वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि कोई कुछ भी पहने, लेकिन यह समझ होनी चाहिए कि कब और क्या पहनना है। एक यूजर ने पैनल में शामिल लोगों को लेकर लिखा, "वो 4 लोग जिनके बारे में मेरे माता-पिता बताया करते थे।" वहीं एक अन्य यूजर ने हिना खान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह अब खुद वही बातें कर रही हैं, जिनकी आलोचना से उन्हें पहले दुख होता था।
Updated on:
7 Sep 2026, 1:51 PM IST
Published on:
7 Sep 2026, 1:51 PM IST
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