
देशभक्ति फिल्मों के असली नायक होते हैं फौजी दिमाग। (फोटो सोर्स- इंस्टाग्राम- excelmovies and tseriesfilms)
Indian Army Day 2026: हिंदी सिनेमा में देशभक्ति और युद्ध की कहानियां कोई नई बात नहीं हैं। दशकों से फिल्मों में भारतीय सेना की वीरता, बलिदान और शौर्य को बड़े पर्दे पर दिखाया जाता रहा है। हालांकि, वक्त के साथ इन फिल्मों की तस्वीर बदली है। जहां पहले इमोशनल डायलॉग्स और ड्रामा को ज्यादा तवज्जो जी जाती थी, वहीं अब दर्शक सच्चाई के ज्यादा करीब की कहानियां देखना चाहते हैं। इसी बदलाव की सबसे बड़ी वजह हैं- रिटायर्ड फौजी।
भारतीय सेना दिवस के मौके पर यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर वॉर फिल्मों के निर्माण में इन रिटायर्ड अफसरों की भूमिका क्या होती है और वो फिल्मों को कितना वास्तविक बनाते हैं। 'बॉर्डर 2', 'इक्कीस', '120 बहादुर' जैसी फिल्मों में सेना से जुड़े विशेषज्ञों से 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने बात की है, जिन्होंने बताया है कि आखिर कैसे इन फिल्मों को पर्दे पर उतारा जाता है।
सेना से रिटायर कर्नल मनीष सरीन के मुताबिक इन फिल्मों में मिलिट्री कंसल्टेंट्स का बढ़ता चलन सकारात्मक संकेत है। उनके मुताबिक, एक-एक सीन पर बारीकी से काम किया जाता है। हथियार, वर्दी, रैंक, भाषा और युद्ध की रणनीति- हर पहलू पर रिसर्च जरूरी होती है। इतिहास में हुए युद्धों के दस्तावेजों का सहारा लिया जाता है, जबकि हालिया घटनाओं के लिए मैदान में रहे सैनिकों से बातचीत की जाती है।
वहीं मेजर संदीप सांगवान का कहना है कि कंसल्टेंट्स का काम सिर्फ शूटिंग तक सीमित नहीं होता, बल्कि स्क्रिप्ट लिखे जाने के समय से ही शुरू हो जाता है। सेना के आचरण से जुड़ी किसी भी गलत जानकारी को शुरुआती स्तर पर ही सुधारा जाता है। हालांकि, सिनेमाई स्वतंत्रता की कुछ छूट होती है, लेकिन कई नियम ऐसे होते हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
फिल्म 'इक्कीस' से जुड़े ब्रिगेडियर बृजेंद्र सिंह के लिए यह अनुभव खास रहा। एक ही रेजिमेंट से होने और असली युद्ध के नायक से व्यक्तिगत जुड़ाव के कारण वो उस दौर की मानसिकता और माहौल को पर्दे पर उतारने में मदद कर सके। उनका मानना है कि सेना समय के साथ बदलती है- वर्दी, बोलचाल और रणनीति सब कुछ। ऐसे में उस दौर को जी चुके व्यक्ति की मौजूदगी फिल्म को प्रमाणिक बनाती है।
वहीं निर्देशक रजनीश घई और तेजस विजय देवस्कर जैसे फिल्ममेकर मानते हैं कि जब उद्देश्य ईमानदार हो, तो सिनेमाई आजादी और वास्तविकता के बीच टकराव नहीं होता। सेना के सलाहकारों के सुझावों को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि वो न सिर्फ सच्चाई लाते हैं बल्कि कहानी को मजबूत भी बनाते हैं। जाहिर है मिलिट्री कंसल्टेंट्स की मौजूदगी का फायदा सिर्फ फिल्मों को ही नहीं, बल्कि सेना की छवि को भी होता है।
बता दें गणतंत्र दिवस के मौके पर 23 जनवरी को फिल्म 'बॉर्डर 2' सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। फिल्म का ट्रेलर और गाने रिलीज हो गए हैं जिनमें सनी देओल, दिलजीत दोसांझ, वरुण धवन और अहान शेट्टी नजर आ रहे हैं। इन दिनों फिल्म का प्रमोशनल भी जबरदस्त तरीके से चल रहा है।
Updated on:
15 Jan 2026, 3:10 PM IST
Published on:
15 Jan 2026, 3:05 PM IST
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