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Ketan Agarwal: ‘बेटे के बाद बाप भी चला गया’, केतन अग्रवाल के पिता के दुख पर इन्फ्लुएंसर मंचली मिशा का इमोशनल बयान

Ketan Agarwal Murder Case: केतन अग्रवाल की मौत के 20 दिन बाद उनके दादा भी चले गए। इसी को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंचली मिशा ने दुख जाहिर करते हुए बड़ी बात कह दी है।
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Ketan Agarwal Murder Case

Ketan Agarwal Murder Case (सोर्स- ANI)

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में हर दिन कोई न कोई नया घटनाक्रम सामने आ रहा है। पहले 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था और अब उनके परिवार पर एक और दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। केतन के दादा देवीचंद अग्रवाल का भी निधन हो गया है। परिवार का कहना है कि वह अपने पोते के जाने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए।

इसी बीच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंचली मिशा ने इस मामले पर एक भावुक वीडियो शेयर किया है। उन्होंने केतन के परिवार के दर्द का जिक्र करते हुए लोगों से अपील की कि कभी भी किसी दूसरे की जिंदगी को देखकर अपनी जिंदगी का आकलन नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति अपने भीतर कोई न कोई गहरा दुख छिपाए बैठा होता है।

'दूसरे की जिंदगी देखकर कभी ईर्ष्या मत करो'

अपने वीडियो में मंचली मिशा ने कहा कि अक्सर लोग दूसरों की संपत्ति, आलीशान जिंदगी और सुख-सुविधाओं को देखकर सोचते हैं कि उनके पास सब कुछ है और भगवान ने उन्हें कम दिया है। लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग हो सकता है।

उन्होंने कहा कि इंसान को हमेशा भगवान का शुक्रगुजार होना चाहिए कि जितना मिला है, अच्छा मिला है। क्योंकि बाहर से खुश दिखने वाली जिंदगी के पीछे कितना बड़ा दर्द छिपा है, इसका अंदाजा किसी को नहीं होता।

20 दिन के अंदर बेटे और पिता दोनों को खो दिया

मंचली मिशा ने केतन अग्रवाल के परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि पैसा होने के बावजूद परिवार जिस दर्द से गुजर रहा है, उसकी भरपाई कोई दौलत नहीं कर सकती।

उन्होंने कहा कि पहले परिवार ने अपना जवान बेटा खो दिया और उसके कुछ ही दिनों बाद परिवार के बुजुर्ग सदस्य भी इस दुनिया से चले गए। ऐसे दुख की कल्पना भी करना आसान नहीं है।

मिशा ने लोगों से कहा कि अगर कभी किसी दूसरे की जिंदगी देखकर आपको लगे कि उसके पास सब कुछ है, तो पहले यह भी सोचिए कि शायद उसके हिस्से का दर्द आपको दिखाई नहीं दे रहा।

'पैसा है, लेकिन इंसाफ नहीं मिला'

वीडियो में मंचली मिशा ने यह भी कहा कि पैसा होने का मतलब यह नहीं है कि हर समस्या खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा कि केतन का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत जरूर है, लेकिन आज भी अपने बेटे के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहा है।

उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जब किसी मां-बाप का बच्चा चला जाता है तो दुनिया की कोई भी दौलत उस खालीपन को नहीं भर सकती। इसलिए इंसान को अपनी जिंदगी की छोटी-छोटी खुशियों की कद्र करनी चाहिए।

पोते की मौत के 17 दिन बाद दादा का निधन

इधर, परिवार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 71 वर्षीय देवीचंद अग्रवाल का शनिवार रात पुणे के एक अस्पताल में निधन हो गया। बताया गया कि केतन की मौत के बाद से ही उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी।

परिवार का कहना है कि पोते के जाने का सदमा उनके लिए असहनीय साबित हुआ। डॉक्टरों ने शनिवार रात उन्हें मृत घोषित कर दिया।

कैंडल मार्च में भी पहुंचे थे देवीचंद अग्रवाल

बीमारी के बावजूद देवीचंद अग्रवाल अपने पोते को इंसाफ दिलाने की लड़ाई में पीछे नहीं हटे थे। 27 जून को आयोजित कैंडल मार्च में उन्होंने हिस्सा लिया था और लोगों से न्याय की अपील की थी।

उस दौरान उन्होंने भावुक होकर कहा था कि उनका बुढ़ापे का सहारा उनसे छिन गया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि जिन लोगों पर परिवार ने वर्षों तक भरोसा किया, वही विश्वास टूटने की वजह बने। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके परिवार का लड़की के परिवार से कई दशक पुराना संबंध था और उन्हें इस रिश्ते पर पूरा भरोसा था।

सोशल मीडिया पर भावुक हो रहे लोग

देवीचंद अग्रवाल के निधन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स का कहना है कि एक परिवार पर इतना बड़ा दुख एक साथ टूटना बेहद दर्दनाक है।

वहीं मंचली मिशा के वीडियो को भी हजारों लोग शेयर कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि यह घटना याद दिलाती है कि किसी की बाहरी जिंदगी देखकर उसकी खुशियों का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

इंसाफ का इंतजार

फिलहाल केतन अग्रवाल केस की जांच जारी है। परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। इसी बीच दादा के निधन ने इस पूरे मामले को और अधिक भावुक बना दिया है।

यह घटना एक बार फिर यही संदेश देती है कि जिंदगी की असली कीमत रिश्तों में होती है, न कि केवल दौलत में। बाहर से खुशहाल दिखने वाले परिवार भी भीतर से गहरे दर्द में जी रहे होते हैं। इसलिए दूसरों की जिंदगी से तुलना करने के बजाय अपने जीवन और अपनों की अहमियत को समझना सबसे जरूरी है।

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