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‘बिहारी होने की वजह से भेदभाव?’ एक्टर क्रांति प्रकाश झा ने गिनाईं बिहार की 5 भाषाएं, बोले- ‘लोगों को पता ही नहीं ये’

Kranti Prakash Jha Interview: क्रांति प्रकाश झा ने शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में बिहार की भाषाओं और सिनेमा पर बात की। उन्होंने भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और वज्जिका का जिक्र किया और ‘नदिया के पार’ को लेकर भी सफाई दी।
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मुंबई

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Shiwani Mishra

•

Updated: 8 Sep 2026, 2:46 PM IST

Kranti Prakash Jha

एक्टर क्रांति प्रकाश झा ने बिहारी होने पर कही ये बात (IMDb)

Kranti Prakash Jha Statement: एक्टर क्रांति प्रकाश झा ने शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में बिहार की भाषाओं और वहां के सिनेमा को लेकर खुलकर बात की। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि बिहार को अक्सर सिर्फ भोजपुरी भाषा और सिनेमा से जोड़कर देखा जाता है, जबकि राज्य में कई अन्य भाषाएं भी बोली जाती हैं। उन्होंने भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और वज्जिका का जिक्र किया।

'बिहार में सिर्फ भोजपुरी नहीं, पांच भाषाएं हैं'

क्रांति प्रकाश झा ने कहा कि बिहार में केवल भोजपुरी ही नहीं बोली जाती। उनके मुताबिक, भोजपुरी के अलावा मैथिली, मगही, अंगिका और वज्जिका भी बिहार की प्रमुख भाषाओं में शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि लोगों को इन भाषाओं के बारे में ज्यादा जानकारी क्यों नहीं है।

एक्टर ने बातचीत में कहा कि आज के दौर में सिनेमा को साहित्य का एक अहम माध्यम माना जा सकता है, लेकिन बिहार के संदर्भ में लोगों की जानकारी अक्सर भोजपुरी सिनेमा तक ही सीमित रह जाती है।

'लोग भोजपुरी सिनेमा से ज्यादा रिलेट करते हैं'

क्रांति प्रकाश झा के मुताबिक, बिहार से जुड़े सिनेमा की बात होने पर आमतौर पर भोजपुरी फिल्मों का ही जिक्र किया जाता है। उन्होंने कहा कि दर्शक भोजपुरी सिनेमा से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं, जबकि मैथिली में भी पहले अच्छी फिल्में बन चुकी हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ जैसी फिल्मों का नाम भोजपुरी सिनेमा के साथ लिया जाता है। वहीं, ‘नदिया के पार’ को लेकर उन्होंने कहा कि लोग अक्सर इसे भोजपुरी फिल्म समझ लेते हैं, जबकि यह अवधी भाषा की फिल्म थी।

'नदिया के पार' को भोजपुरी समझते हैं लोग

क्रांति ने ‘नदिया के पार’ का उदाहरण देते हुए भाषा को लेकर होने वाली गलतफहमी की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म भोजपुरी नहीं, बल्कि अवधी भाषा से जुड़ी थी।

उनकी इस बात का मुख्य जोर यही था कि किसी क्षेत्र की पहचान को सिर्फ एक भाषा या एक तरह के सिनेमा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। बिहार की अपनी कई भाषाएं और सांस्कृतिक पहचान हैं, जिन्हें व्यापक स्तर पर समझने की जरूरत है। क्रांति प्रकाश झा ने ये बातचीत शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में की, जहां उन्होंने बिहार की भाषाई विविधता और उससे जुड़े सिनेमा पर अपनी राय साझा की।