
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का छलका दर्द ( सोर्स: instagram: old_songs_status_king/IMDb)
Pawan Khera sister death: 1973 की फिल्म ‘नमक हराम’का सदाबहार गाना ‘मैं शायर बदनाम’ आज भी लोगों की भावनाओं को छूता है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने लेखक और एडिटर निमिश दुबे की एक सोशल मीडिया पोस्ट को रीट्वीट करते हुए इस गाने से जुड़ी अपनी निजी और भावुक याद साझा की। उन्होंने बताया कि बहन के निधन के कुछ महीनों बाद जब वह मुंबई स्थित उनके फ्लैट की सफाई कर रहे थे, तब पड़ोसी के फ्लैट से यही गाना सुनाई दे रहा था। उस मुश्किल वक्त में इस गाने ने उन्हें भीतर तक छू लिया था।
निमिश दुबे ने ‘नमक हराम’ से राजेश खन्ना का एक वीडियो शेयर करते हुए ‘मैं शायर बदनाम’ से अपने पुराने जुड़ाव के बारे में लिखा। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार ये गाना देखा था, तब उनकी उम्र करीब 8 साल थी। निमिश दुबे के मुताबिक, गाना देखकर वह इतना रोए थे कि उनकी मां को उन्हें बाहर ले जाना पड़ा था। उन्होंने लिखा कि आज भी इस गाने को सुनकर उनकी आंखें नम हो जाती हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या मौत कभी इतनी दुख भरी कविता जैसी महसूस हो सकती है।
निमिश दुबे की पोस्ट को रीट्वीट करते हुए पवन खेड़ा ने बताया कि करीब पांच साल पहले उनका इस गाने से दोबारा जुड़ाव हुआ। उस समय उनकी बहन के निधन को कुछ महीने ही हुए थे और वह मुंबई स्थित उनके फ्लैट की सफाई कर रहे थे।
पवन खेड़ा ने बताया कि इसी दौरान बगल वाले फ्लैट से ‘मैं शायर बदनाम’ बजने की आवाज आ रही थी। उन्होंने इस गाने को ‘मौत की गाई हुई लोरी’ जैसा बताया, जिसमें दुख बिना किसी झिझक के सामने आता है।
पवन खेड़ा ने इस गाने के भावनात्मक असर की तुलना एरिक क्लैप्टन के चर्चित गीत ‘टियर्स इन हेवन’ से भी की। उन्होंने इस तुलना के जरिए बताया कि किस तरह संगीत किसी निजी नुकसान और गहरे दुख से जुड़ी भावनाओं को शब्द दे सकता है। बता दें, उन्होंने इसे दुख और मातम को गीत के जरिए व्यक्त करने की परंपरा के संदर्भ में देखा।
‘मैं शायर बदनाम’ ऋषिकेश मुखर्जी की 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘नमक हराम’ का गाना है। फिल्म में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे। इस गाने को किशोर कुमार ने आवाज दी थी, जबकि इसके बोल आनंद बख्शी ने लिखे और संगीत आरडी बर्मन ने दिया था।
फिल्म के इमोशनल दृश्यों से जुड़ा ये गाना रिलीज के कई दशक बाद भी लोगों के बीच फेमस है। निमिश दुबे की बचपन की याद और पवन खेड़ा के निजी दुख से जुड़ा अनुभव दिखाता है कि एक ही गीत अलग-अलग लोगों की जिंदगी में अलग मायने रख सकता है।
Updated on:
18 Aug 2026 03:40 pm
Published on:
18 Aug 2026 03:37 pm
