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‘आज के फिल्ममेकर नकलची हैं’, एक्टर शेखर सुमन ने बॉलीवुड पर कसा तंज

Shekhar Suman on Bollywood: एक्टर शेखर सुमन ने बॉलीवुड के आज के फिल्ममेकर्स को फॉर्मूला और नकल पर निर्भर बताया। उन्होंने कहा कि पुरानी क्लासिक फिल्में इसलिए यादगार हैं क्योंकि उनमें अलग सोच और क्रिएटिविटी थी।
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मुंबई

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Rashi Sharma

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Updated: 21 May 2026, 4:17 PM IST

Shekhar Suman Tonite Show

एक्टर शेखर सुमन ने बॉलीवुड पर कसा तंज। (फोटो सोर्स: IMDb)

Shekhar Suman on Bollywood: शेखर सुमन जब फिल्म इंडस्ट्री में आए, तब वो महज 21 साल के थे और उनकी पहली फिल्म थी 'उत्सव'। अपनी पहली फिल्म में रेखा के साथ काम करने से लेकर 90 के दशक के सबसे मशहूर सिटकॉम में से एक का हिस्सा बनने और एक टॉक शो होस्ट के तौर पर अपनी पहचान बनाने तक, इस अनुभवी एक्टर ने एक लंबा सफर तय किया है। कैमरे से कई सालों तक दूर रहने के बाद, शेखर सुमन कुछ साल पहले संजय लीला भंसाली की 'हीरामंडी' से अभिनय जगत में में वापसी की। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में, 62 साल के शेखर सुमन ने अब तक के अपने सफर और हिंदी सिनेमा के बदलते रूप पर अपने विचार शेयर किए।

21 साल की उम्र में रेखा के साथ मिला पहला ब्रेक

21 साल की उम्र में, शेखर सुमन को गिरीश कर्नाड की फिल्म 'उत्सव' से बड़ा ब्रेक मिला। इस फिल्म में रेखा, शशि कपूर, अमजद खान, अनुपम खेर और नीना गुप्ता जैसे कई बड़े कलाकार थे। फिल्म पर बात करते हुए शेखर सुमन ने बताया कि 1983 में मुंबई आने के महज 15 दिनों के अंदर ही उन्हें यह फिल्म मिल गई थी। वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि मैं बस किस्मतवाला था। किस्मत भी कोई चीज होती है।" वो आगे कहते हैं, "आपको सही प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना होता है, और एक एक्टर को सही मौका मिलना जरूरी है। मैं बॉम्बे आया और 15 दिनों के अंदर ही, मुझे रेखा जी के साथ (फिल्म 'उत्सव' में) हीरो के तौर पर चुन लिया गया।"

'मूवर्स एंड शेकर्स' से मिली घर-घर में पहचान

बता दें कि दो महीने के अंदर ही, शेखर सेट पर थे। 'उत्सव' रिलीज हुई, और एक्टर को 'नाचे मयूरी', 'संसार' और 'त्रिदेव' जैसी फिल्मों में और काम मिला। 90 के दशक में, जब फिल्मों में काम कम होने लगा, तो एक्टर ने टेलीविजन की ओर रुख किया। यहां भी, वो अपनी सफलता का श्रेय किस्मत को ही देते हैं। उनका कहना है, "यह किस्मत ही है। वरना, जया बच्चन मुझे 'देख भाई देख' के लिए क्यों चुनतीं या विनोद पांडे मुझे 'रिपोर्टर' के लिए क्यों चुनते?" 'रिपोर्टर' और 'देख भाई देख' दोनों ही बहुत कामयाब रहे। और बाद में 90 के दशक में, शेखर 'मूवर्स एंड शेकर्स' के होस्ट के तौर पर घर-घर में पहचाने जाने लगे। कहा जाता है कि ये भारत का पहला हिंदी लेट-नाइट टॉक शो था।

‘आज के फिल्ममेकर नकलची हैं’

इसके साथ ही आज के डायरेक्टर्स पर निशाना साधते हुए शेखर सुमन ने कहा, "आज के फिल्म क्रिएशन में फॉर्मूले पर बहुत ज्यादा निर्भरता है। ये लोग नकलची हैं, न कि के. आसिफ, बिमल रॉय, गुरु दत्त या राज कपूर जैसी सोच वाले। उनकी फिल्में करीब 60-70 सालों तक चलीं। मैं आज भी 'गंगा जमुना' देखता हूं। 'मुगल-ए-आजम' देखकर आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ‘कागज के फूल’, ‘प्यासा’ और ‘मेरा नाम जोकर’ जैसी फिल्में आज भी याद की जाती हैं, क्योंकि उनकी कहानी और सोच बिल्कुल नई और अलग थीं।" इसके आगे शेखर ने कहा, 'आज जो बदलाव आया है, वो यह है कि फिल्म को रचनात्मक रूप से सुंदर बनाने के बजाय, उसे सफल बनाने पर ज्यादा जोर दिया जाता है। यह कोई अच्छा संकेत नहीं है। हमें फिर से मौलिक बनना होगा और अपनी ताकतों और अपनी पहचान (DNA) पर टिके रहना होगा। ये बहुत जरूरी है।"

शेखर सुमन का नया शो

इन दिनों शेखर इस समय अपना नया टॉक शो 'शेखर टुनाइट' होस्ट कर रहे हैं, जिसकी स्ट्रीमिंग पिछले हफ्ते से यूट्यूब पर शुरू हो चुकी है। इस शो में हर हफ्ते एक नया मेहमान आता है। जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इस शो के पहले मेहमान थे, और आने वाले एपिसोड्स में बॉबी देओल, मनोज बाजपेयी, अली फजल और फराह खान जैसी हस्तियां इसमें नजर आ सकती हैं।