
शोले के सहायक कलाकारों के सीन्स।
Sholay: शोले एक हिंदी सिनेमा को एक ऐसी कल्ट क्लासिक फिल्म है जिसके जितनी बार भी देखो हर बार कुछ नया दिखता है। बात चाहे फिल्म के मुख्य किरदारों की हो या फिर सह कलाकारों की, हर किरदार ने अपने काम से जान फूंक दी है। फिर वो चाहे कालिया के किरदार में विजु खोटे हों या अंग्रेजों के जमाने के जेलर के किरदार में असरानी।
शोले के 50 साल पूरे हो रहे हैं इसलिए आज की इस पेशकश में शोले से जुड़े उन्हीं छोटे-छोटे किरदारों को निभाने वाले सहायक कलाकारों रू-ब-रू कराएंगे।
असरानी ने अंग्रेजों के जमाने के जेलर का छोटा सा रोल शानदार तरीके से निभाया। इतना जबरदस्त की दूसरे निर्देशक उन्हें रोल कोई भी देते उम्मीद ऐसे ही अभिनय की करते वे तो भला हो ऋषिकेश मुखर्जी और प्रियदर्शन जैसे निर्देशकों का जिन्होंने उनकी प्रतिभा को उभारा। हिटलर की वर्दी में चार्ली चेपलिन या कह सकते हैं ऊपर से हिटलर मगर अंदर से मसखरा चार्ली का शानदार अभिनय किया। आज भी वे 'हलचल', 'चुप चुपके', 'बोल बचन', 'ड्रीम गर्ल 2' में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुके हैं।
जलाल आगा पहले हीरो बने फिर चरित्र अभिनेता मगर उनको लोग तीन वजह से जानते है। पान पराग, किशोर दा का गाया समा है, सुहाना सुहाना और शोले का मेहबूबा मेहबूबा गीत।
हेलेन का गाना उन दिनों फिल्मों में होना आवश्यक था। बिंदु और अरुणा ईरानी, प्रेमा नारायण और कल्पना अय्यर के होते हुए भी हेलन की डिमांड जबरदस्त थी। ये तो शोले जैसी बड़ी फिल्म थी और फिर सलीम इसके लेखक थे फिर बिजली सी कौंधती हेलन का डान्स तो होना ही था।
तेरा क्या होगा कालिया… विजु खोटे को देखते ही याद आता है तेरा क्या होगा कालिया। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में छोटे-मोटे मजेदार रोल किये। खासकर श्रीदेवी के साथ उनकी केमिस्ट्री 'नगीना', 'गैर कानूनी' और 'गुरुदेव' आदि फिल्मों मे जबरदस्त लगी।
मेजर आनंद ये तीन डाकू में से एक थे जो रामगढ़ से खाली हाथ लोट आए। ये सेना में मेजर थे, वहां से छोड़कर फिल्मों मे आए छोटे-मोटे रोल ही मिले। इस फिल्म में डाकू बने इसीलिए इसी साल रिलीज 'धर्मात्मा' में पुलिस कमीशनर बने। दो बड़ी सफल फिल्मों के बाद भी इनका कॅरियर फिल्मों में नहीं चला।
बिहारी ये इनका तीसरा साथी था। इन्होंने काफी फिल्मों में काम किया 'गंगा जमुना', 'डॉन', 'आजाद', 'प्रेम प्रतिज्ञा' सहित कई अन्य फिल्मों में काम किया। शरद कुमार ठाकुर के छोटे लड़के निन्नी का छोटा सा रोल निभाया।
गीता सिद्धार्थ ठाकुर की बहु के रोल में थी। शोले के बाद कई फिल्मों में काम किया, इससे पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरुस्कृत 'गरम हवा' में मुख्य भूमिका में थी। इसके अलावा इन्होंने 'परिचय', 'दूसरा आदमी', 'गमन', 'मंडी', 'त्रिशूल', 'नूरी', 'डिस्को डांसर', 'राम तेरी गंगा मैली' आदि सैकडों फिल्मों में छोटे-छोटे मगर यादगार रोल किए।
ओम शिवपुरी ने मणि कौल की 'आषाढ का एक दिन' से अभिनय की शुरुआत की. उन्होंने 70-80 के दशक में चरित्र और विलेन की किरदार निभाए। इसके अलावा वो थिएटर के भी बेहतरीन अदाकारी थे। इन्होंने पत्नी सुधा शिवपुरी (क्योंंकि सास भी कभी बहु थी की बा) के साथ कई नाटको में भी काम किया।
अलंकार जोशी ने ठाकुर के पोते का रोल किया। छोटे से रोल में दादा जी को लेने जाने की जिद्द करना और फिर गब्बर के सामने अपना गुस्सा प्रकट करना से अपनी अभिनय क्षमता सिद्ध की। इसी साल आई दीवार में अमिताभ के बचपन का रोल निभाया। इसके अलावा 'बचपन', 'सीता और गीता', 'अंदाज', 'मजबूर', 'ड्रीम गर्ल', 'छोटा बाप' आदि फिल्मों के बाद पायल की झंकार में बतौर हीरो आए मगर बाल कलाकार की तरह सफलता नहीं मिली और विदेश जाकर बस गए। पल्लवी जोशी इनकी बहन है। इन्होंने वागले की दुनिया के में भी काम किया।
भगवान सिन्हा ने 'आंधियां', 'टैक्सी ड्राइवर', 'फंटूश', 'झुमरू', 'हीर रांझा', 'रेशम की डोरी' आदि फिल्मों में काम किया। इस फिल्म में वो गब्बर के मुखबिर और गांव वालों को जय-वीरू के खिलाफ भड़काने का काम करते हैं।
बेबी भानुमति ने शोले में निर्मला का रोल निभाया। वहीं मुस्ताक मर्चेंट ने शोले में डबल रोल निभाए एक जिसकी बाइक लेकर वीरू और जय भागते हैं, दूसरा ट्रेन ड्राइवर का किरदार।
Updated on:
07 Aug 2025 06:09 pm
Published on:
07 Aug 2025 06:09 pm
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