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सीता के नजरिए से दिखाई गई Ramayana पर छिड़ा था विवाद, जानिए क्यों भड़के थे हिंदू संगठन

Sita Sings the Blues: रणबीर कपूर की 'रामायण' की चर्चा के बीच 2008 की विवादित फिल्म 'सीता सिंग्स द ब्लूज' फिर सुर्खियों में है। जानिए क्यों इस फेमिनिस्ट रामायण अडैप्टेशन का हिंदू संगठनों ने विरोध किया था और बैन की मांग उठी थी।
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मुंबई

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Shiwani Mishra

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Updated: 4 Aug 2026, 7:28 PM IST

Sita Sings the Blues

रणबीर कपूर की 'रामायण' की चर्चा के बीच विवादित फिल्म 'सीता सिंग्स द ब्लूज' सुर्खियों में (सोर्स: x-@StriderEl)

Ramayan adaptation: रणबीर कपूर की 'रामायण: पार्ट वन' के ट्रेलर के बाद फिल्म को लेकर चर्चा तेज है। इसी बीच रामायण पर आधारित एक पुराने विदेशी अडैप्टेशन की फिर से चर्चा शुरू हो गई है। साल 2008 में रिलीज हुई अमेरिकी एनिमेटेड फिल्म 'सीता सिंग्स द ब्लूज' (Sita Sings the Blues) ने अपने अलग नजरिए की वजह से जहां इंटरनेशनल लेवल पर तारीफ बटोरी, वहीं भारत और विदेशों में कुछ हिंदू संगठनों के विरोध का भी सामना किया।

फेमिनिस्ट नजरिए से बनाई गई थी Sita Sings the Blues

अमेरिकन आर्टिस्ट नीना पाले ने 2008 में 'सीता सिंग्स द ब्लूज' (Sita Sings the Blues) नाम की एनिमेटेड म्यूजिकल फिल्म बनाई थी। उन्होंने इसे "अब तक की सबसे बड़ी ब्रेक-अप स्टोरी" के तौर पर पेश किया था। साथ ही, फिल्म में रामायण की कहानी को सीता के दृष्टिकोण और आधुनिक फेमिनिस्ट नजरिए से दिखाने की कोशिश की गई थी। रिलीज के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली और बाद में इसे ऑनलाइन फ्री डाउनलोड के लिए भी उपलब्ध कराया गया।

और फिर धीरे-धीरे लोकप्रियता बढ़ने के साथ विवाद भी गहरा गया। साल 2009 में 'हिंदू जनजागृति समिति' ने फिल्म पर बैन लगाने की मांग करते हुए एक ऑनलाइन याचिका शुरू की। संगठन का आरोप था कि फिल्म में धार्मिक किरदारों और घटनाओं को ऐसे रूप में दिखाया गया है, जिससे आस्था आहत हो सकती है।

राम के चित्रण पर भी उठाए सवाल

फिल्म को लेकर सबसे बड़ा विवाद भगवान राम के चित्रण को लेकर हुआ। समाज के एक वर्ग ने सीता के नजरिए से कहानी दिखाने के प्रयोग की तारीफ की, जबकि दूसरे वर्ग का कहना था कि फिल्म में भगवान राम को आदर्श और मर्यादा पुरुषोत्तम की पारंपरिक छवि से अलग दिखाया गया है। इसी वजह से कई धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध किया।

बता दें, नीना पाले ने 2010 में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि कुछ लोगों के लिए 1980 के दशक का टीवी वर्जन ही रामायण की एकमात्र सही व्याख्या है और वे किसी दूसरे रूपांतरण को एक्सेप्ट नहीं करना चाहते।

फिल्म की स्क्रीनिंग हुई कैंसिल

इस फिल्म के विवाद के चलते 2011 में फिल्म की कुछ स्क्रीनिंग भी प्रभावित हुईं। न्यूयॉर्क के स्टारलाइट पैवेलियन और गोवा के आर्ट चैंबर में शोज कैंसिल कर दिए गए। तो वहीं, सैन जोस म्यूजियम ऑफ आर्ट के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुए। हालांकि, फिल्म पर कभी आधिकारिक रूप से पूर्ण बैन नहीं लगाया गया और ये आज भी YouTube पर उपलब्ध है।