
यश की Toxic पर कोर्ट का फैसला (सोर्स: X-@societytweet25)
Toxic court Case: कन्नड़ सुपरस्टार यश की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' रिलीज से पहले कानूनी वजहों से चर्चा में आ गई है। बेंगलुरु की एक कोर्ट ने फिल्म से जुड़े झूठे, गलत इरादे वाले, बदनाम करने वाले या अपमानजनक कंटेंट के पब्लिकेशन और सर्कुलेशन पर एकतरफा अस्थायी रोक लगा दी है। ये आदेश फिल्म के प्रोड्यूसर केवीएन प्रोडक्शंस की अंतरिम याचिका पर दिया गया है।
हालांकि, इस आदेश की खास बात ये है कि इसमें फिल्म के रिव्यू और आलोचना पर सीधे तौर पर रोक नहीं लगाई गई है। कोर्ट का आदेश खासतौर पर झूठे, बदनाम करने वाले और अपमानजनक कंटेंट को लेकर है।
केवीएन प्रोडक्शंस ने कोर्ट में दायर अंतरिम एप्लीकेशन में एक्स कॉर्प और 'जॉन डो अशोक कुमार' समेत कई प्रतिवादियों के खिलाफ स्थायी रोक की मांग की थी। 'जॉन डो' का इस्तेमाल ऐसे अज्ञात व्यक्ति के लिए किया गया है जिसकी पहचान फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
प्रोड्यूसर्स ने मांग की थी कि फिल्म से संबंधित किसी भी तरह की झूठी, गलत इरादे वाली, बदनाम करने वाली या अपमानजनक खबर को रिलीज से पहले या बाद में किसी भी माध्यम से कम्युनिकेट, पब्लिश, सर्कुलेट, शेयर, पोस्ट या स्ट्रीम करने से रोका जाए। इसके अलावा ऐसे कंटेंट तक पहुंच उपलब्ध कराने या किसी अन्य तरीके से उसे स्ट्रीम करने पर भी रोक लगाने की मांग की गई थी।
कर्नाटक में फिल्मों को लेकर दिए गए कुछ पिछले जॉन डो ऑर्डर से ये मामला अलग है। इस बार कोर्ट के आदेश में फिल्म के रिव्यू या आलोचना को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
पिछले कुछ मामलों में फिल्म प्रोड्यूसर्स ने ऑनलाइन कंटेंट की व्यापक श्रेणी पर रोक लगाने की मांग की थी। इनमें रिव्यू, वीडियो, रिएक्शन, ट्रोलिंग और यहां तक कि 'चैलेंजिंग फीडबैक' जैसी चीजें भी शामिल थीं। ऐसे मामलों ने फिल्म रिलीज से पहले सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल खड़े किए थे।
कोर्ट ने शुरुआती तौर पर प्रोड्यूसर्स के पक्ष में मामला पाया। शिकायत, दस्तावेजों और अंतरिम एप्लीकेशन की जांच के बाद कोर्ट ने ये भी माना कि 'बैलेंस ऑफ कन्वीनियंस' प्रोड्यूसर्स के पक्ष में है। ये एक कानूनी सिद्धांत है, जिसे अदालतें अंतरिम राहत या रोक देने पर विचार करते समय देखती हैं।
कोर्ट ने कहा कि सीमित अवधि के लिए अंतरिम इंजंक्शन दिया जा सकता है। ऐसा नहीं करने पर मुकदमा दायर करने का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है और आगे कई तरह की कानूनी कार्यवाही की स्थिति बन सकती है।
कोर्ट की ओर से दी गई यह अस्थायी एकतरफा रोक 28 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक लागू रहेगी। साथ ही प्रोड्यूसर्स को सिविल प्रोसीजर कोड के ऑर्डर 39 रूल 3A का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
इसके तहत प्रोड्यूसर्स को शिकायत, संबंधित दस्तावेज और अंतरिम एप्लीकेशन की कॉपी उपलब्ध करानी होगी। नियम के मुताबिक अदालतों को एकतरफा रोक दिए जाने की तारीख से 30 दिनों के भीतर संबंधित आवेदन के अंतिम निपटारे की कोशिश करनी होती है। अगर ऐसा संभव नहीं हो पाता, तो देरी की वजह रिकॉर्ड करनी होती है। बता दें, कोर्ट ने प्रोड्यूसर्स को ये भी निर्देश दिया है कि किसी प्रतिवादी के अदालत में पेश होने के बाद 30 दिनों के भीतर अंतरिम एप्लीकेशन के निपटारे में सहयोग करें।
कोर्ट ने ये भी साफ किया कि दी गई रोक का इस्तेमाल उस उद्देश्य से अलग किसी दूसरे मकसद के लिए नहीं किया जा सकता, जिसके लिए इसे जारी किया गया है। यानी इसका उद्देश्य सिर्फ झूठे, गलत इरादे वाले, बदनाम करने वाले या अपमानजनक कंटेंट के पब्लिकेशन और सर्कुलेशन को रोकना है। अगर प्रोड्यूसर्स कोर्ट की ओर से तय शर्तों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो ये अस्थायी रोक रद्द भी की जा सकती है।
गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' एक एक्शन ड्रामा है। फिल्म की कहानी 1940 और 1970 के दशक के बीच गोवा की पृष्ठभूमि में सेट है। फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत नजर आएंगी। ये फिल्म 26 अगस्त को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
'टॉक्सिक' के लिए आया ये आदेश ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में फिल्म प्रोड्यूसर्स रिलीज से पहले जॉन डो इंजंक्शन के लिए अदालतों का रुख कर रहे हैं।
इससे पहले भी कई कन्नड़ और तेलुगु फिल्मों से जुड़े मामलों में ऐसे आदेश सामने आए हैं। कुछ मामलों में रिव्यू, वीडियो, रिएक्शन, ट्रोलिंग और 'चैलेंजिंग फीडबैक' समेत ऑनलाइन कंटेंट की कई श्रेणियों को रोकने की मांग की गई थी। ऐसे कुछ मामलों में टिकटिंग प्लेटफॉर्म बुकमायशो ने भी अपने प्लेटफॉर्म से रिव्यू फीचर हटा दिया था।
Updated on:
25 Aug 2026 06:24 pm
Published on:
25 Aug 2026 06:24 pm
