5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

इन 6 बैंकाें के लोन देने पर लग सकती है रोक, RBI कर रहा PCA में डालने की तैयारी

6 बैंकों की वित्तीय हालात देखने के बाद RBI इन्हें पीसीए में डालने की योजना बना रही है।
2 min read
Google source verification
INR

इन 6 बैंकाें के लोन देने पर लग सकती है रोक, RBI कर रहा PCA में डालने की तैयारी

नर्इ दिल्ली। देश के कर्इ बड़ें बैंक कर्ज की बोझ से जूझ रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआर्इ) इस बात की संज्ञान लेते हुए पहले ही 11 बैंकों को प्राॅप्प्ट करेक्टिव एक्शन(पीसीए) कैटेगरी में डाल चुका है। अब खबर ये आ रही है कि पीसीए कैटेगरी में 6 आैर बैंकों को भी डाला जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार इनमें पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक आॅफ इंडिया आैर सिंडिकेट बैंक के नाम भी शामिल हो सकते हैं। वर्तमान में इस कैटेगरी में इलाहाबाद बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉरपोरेशन बैंक, आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, देना बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र शामिल हैं।


अारबीआर्इ दे सकती है कुछ रियायत

यदि आरबीआर्इ आने वाले एक माह में इन 6 बैंकों को पीसीए कैटेगरी में डाल देता है तो इस कैटेगरी में आने वाले कुल बैंकों की संख्या 17 हो जाएगी। पिछले माह ही इलाहाबाद को इस कैटेगरी में डाला गया था। इसके साथ ही देना बैंक काे भी लोन देने से मना किया गया है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इन 6 बैंकाें का प्रदर्शन सभी मानकों पर खराब नहीं है आैर हो सकता है कि इस वजह से आरबीआर्इ इन बैंकाें को कुछ रियायत दे सकता है। उन्हाेंने बताया कि, 'सरकार और आरबीआई से इन बैंकों ने बातचीत की है और उन्होंने कहा है कि अाने वाले एक या दो तिमाही में वे अपने माैजूदा हालात से रिकवर कर जाएंगे। हालांकि अगर आरबीआई पीसीए के तहत उन पर बंदिशें लगाता है तो उनके लिए जल्द रिकवर करना मुश्किल हो जाएगा।' अधिकारी ने कहा कि आरबीआई इन बैंकों के साथ कुछ दरियादिली दिखा सकता है।


लटक सकती है वित्त मंत्रालय की ये योजना

आरबीआर्इ के इस फैसले से वित्त मंत्रालय काे भी झटका लग सकता है। क्योंकि वित्त मंत्रालय कमजोर बैंकों के अच्छे कर्ज को मजबूत बैंकों को बेचने की योजना बना रहा था। एक दूसरे अधिकारी के मुताबिक, यदि इन तीन बैंकों को पीसीए में डाला जाता है तो इस कैटेगरी के बैंकाें के हेल्दी लोन को दूसरे बैंकों की तरफ से खरीदने के योजना लटक सकती है। क्योंकि इनके पीसीए में डाले जाने के बाद लोन देने पर रोक लग सकती है। एेसे में बैंकाें के ग्रुप को हेल्दी लोन खरीदने में कम रूचि हो सकती है।


क्या है पीसीए

जब केन्द्रीय बैंक को लगता है कि किसी बैंक का जोखिम का सामना करने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है, आैर उधार दिए गए धन से न आय हो रहा आैर न ही मुनाफा तो आरबीआर्इ इन बैंकों को पीसीए में डाल देता है। इसके लिए आरबीआर्इ ने कुछ इंडिकेटर्स तय किया है जिसके अाधार पर वो इसका फैसला करती है। जिन बैंकों को पीसीए में डाला जाता है, वे ब्रान्च की संख्या नहीं बढ़ा सकते। उन्हें डिविडेंड पेमेंट रोकना पड़ता है। लोन देने पर भी कई शर्तें लगाई जाती हैं। वहीं जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक ऑडिट और रिस्ट्रक्चरिंग का भी आदेश दे सकता है।