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FIFA 2026: रिफ्यूजी कैंप में जन्मे थे नेस्टोरी ईरानकुंडा, आसान नहीं था सफर, बने वर्ल्ड कप में गोल करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी

नेस्टोरी का जन्म फरवरी 2006 में तंजानिया के किगोमा स्थित एक रिफ्यूजी कैंप में हुआ था। उनके माता-पिता बुरुंडी में चल रहे गृहयुद्ध से बचने के लिए पड़ोसी देश तंजानिया आए थे। हजारों परिवारों की तरह वे भी वहां शरणार्थी जीवन बिता रहे थे। नेस्टोरी बहुत छोटे थे, जब उनका परिवार ऑस्ट्रेलिया चला गया। पहले पर्थ में रहे और फिर एडिलेड के उत्तरी इलाके में बस गए।

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भारत

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Siddharth Rai

Jun 14, 2026

FIFA 2026

तुर्की के खिलाफ गोल दागने के बाद नेस्टोरी ईरानकुंडा (photo - FIFA)

Nestory Irankunda's journey, FIFA World Cup 2026: जब नेस्टोरी ईरानकुंडा ने तुर्की के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के लिए विश्व कप का पहला गोल दागा, तो पूरा स्टेडियम उनके नाम से गूंज उठा। महज 20 साल की उम्र में उन्होंने देश के सबसे युवा विश्व कप गोलस्कोरर बनकर इतिहास रच दिया। लेकिन यह गोल महज एक स्कोरलाइन नहीं था, यह सालों की मेहनत, संघर्ष और एक अनोखी जिंदगी की कहानी का चरम बिंदु था।

तंजानिया के रिफ्यूजी कैंप में हुआ जन्म

नेस्टोरी का जन्म फरवरी 2006 में तंजानिया के किगोमा स्थित एक रिफ्यूजी कैंप में हुआ था। उनके माता-पिता बुरुंडी में चल रहे गृहयुद्ध से बचने के लिए पड़ोसी देश तंजानिया आए थे। हजारों परिवारों की तरह वे भी वहां शरणार्थी जीवन बिता रहे थे। नेस्टोरी बहुत छोटे थे, जब उनका परिवार ऑस्ट्रेलिया चला गया। पहले पर्थ में रहे और फिर एडिलेड के उत्तरी इलाके में बस गए।

ऑस्ट्रेलिया बना नेस्टोरी का नया घर

ऑस्ट्रेलिया उनके लिए नया घर बन गया और फुटबॉल उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा साथी। एडिलेड की गलियों में खेलते हुए नेस्टोरी जल्द ही शहर के सबसे होनहार युवा खिलाड़ियों में शुमार हो गए। उनकी रफ्तार, ताकत, ड्रिब्लिंग और हौसला हर किसी को प्रभावित करता था। लोकल क्लबों से शुरूआत करते हुए वे एडिलेड युनाइटेड की अकादमी पहुंचे और वहां भी अपनी लगन से तेजी से तरक्की करते गए।

सिर्फ 15 साल की उम्र में जनवरी 2022 में उन्होंने ए-लीग में डेब्यू किया। इसके बाद तो जैसे आग लग गई। विंग पर उनकी दौड़, दूर से किए गए तूफानी शॉट्स और हर मैच में बढ़ती चमक ने उन्हें फैनों का चहेता बना दिया। यूरोप की बड़ी क्लबों की नजर उन पर पड़ गई और आखिरकार जर्मनी की दिग्गज टीम बायर्न म्यूनिख ने उन्हें अपने साथ जोड़ लिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका सफर तेजी से आगे बढ़ रहा था। युवा टीमों से होते हुए उन्होंने सॉकरूज (ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय टीम) में जगह बनाई और जल्द ही देश के सबसे विश्वसनीय खिलाड़ियों में गिने जाने लगे।

तुर्की के खिलाफ वो जादुई पल

27वें मिनट का खेल था। एक तरफ अर्दा गुलर का मौका चूक गया, तो दूसरी तरफ नेस्टोरी लेफ्ट विंग पर गेंद लेकर दौड़ पड़े। डिफेंडर्स को छकाते हुए अंदर कट किया और दाएँ पैर से शानदार गोल! सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने लिखा, “उनका दायाँ पैर ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल का अब तक का सबसे घातक हथियार है।” उस एक मूवमेंट में उन्होंने रफ्तार, ताकत, तकनीक और मैच समझ, सब कुछ एक साथ दिखा दिया।

20 साल की उम्र में नेस्टोरी ईरानकुंडा का सफर अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन विश्व कप के सबसे बड़े मंच पर अपना पहला गोल दागकर उन्होंने साबित कर दिया कि यह लड़का खास है। एक शरणार्थी शिविर से निकलकर विश्व कप के मैदान तक पहुँचने वाली यह कहानी न सिर्फ ऑस्ट्रेलिया, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन गई है।