जिसके चलते गंदा पानी (Polluted Water) भी पाइप से होकर नलों तक पहुंच रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि तत्कालीन सरकार के साथ ही वर्तमान की भूपेश सरकार और हाईकोर्ट भी स्वच्छ पानी ग्रामीणों को मुहैय्या करवाने के लिए गंभीर है, ऐसे में PHE विभाग की लापरवाही के चलते नल-जल के गेट-वाल से हमेशा पानी का लिकेज होना कहीं न कहीं ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता नजर आ रहा है, हालांकि मामले में PHE के SDO का दावा है कि नल-जल योजना (Tap water scheme) पंचायत को छह महीने पहले हैंडओवर किया जा चुका है, ऐसे में उसकी जिम्मेदारी पंचायत की बनती है।