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यूपी के इस शहर में कोरोना नहीं, बंदरों से खाैफ में घरों में कैद हैं लाेग

गाजियाबाद के मोदीनगर इलाके की कॉलोनियों में बंदरों का आतंक। घरों में कैद होने को मजबूर हुए लाेग।

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Due to monkeys in this city, people will not leave home

बदरों का आतंक

गाजियाबाद ( Ghazibad News in hindi ) मोदीनगर क्षेत्र की कई कॉलोनी ऐसी हैं जहां पर बंदरों के आतंक ने लाेगाें को घरों में कैद कर दिया है। यहां सड़क पर चल रहे लोगों पर भी बंदर हमला कर रहे हैं। हाल में ही ऐसे दर्जनों मामले सामने आए हैं जिनमें बंदरों ने लाेगाें काे घायल कर दिया।

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यानि साफ है कि, इस शहर के लाेग कोरोना वायरस ( COVID-19 virus)
नहीं बल्कि बंदरों की वजह से घरों के अंदर कैद हैं। प्रशासन लाेगों से कोरोना वायरस (Corona virus) के खतरे काे देखते हुए घर के अंदर रहने की अपील कर रहा है लेकिन माेदीनगर के लाेगों की शिकायत है कि बंदर उन्हे घरों से बाहर नहीं निकलने दे रहे और उन्हे घर के अंदर कैद कर दिया है।

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माेदीनगर के लाेगाें का कहना है कि, खासतौर से बच्चे महिला और बुजुर्ग घर में कैद रहने को ही मजबूर हैं। अगर किसी को घर से बाहर निकलना होता है तो कई लोग एकत्र होकर एक साथ निकलते हैं ऐसे में वायरस स्प्रैड हाेने का खतरा और बढ़ जाता है। लाेगाें काे यह डर रहता है कि बंदर अचानक हमला ना कर दे। इतना ही नहीं इस इलाके में रहने वाले लोगों ने घर की छत पर जाना भी बंद कर दिया है।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसकी शिकायत कई बार स्थानीय पुलिस और जनप्रतिनिधि को दी जा चुकी है लेकिन इस समस्या का सामाधान नहीं हाे सका। इसका नतीजा यह निकल रहा है कि रोजाना बंदर किसी न किसी को जख्मी कर रहे हैं। मोदीनगर की सुचेता पुरी, गोविंदपुरी, सतीश पार्क आदि कॉलोनी बंदरों के आतंक का गढ़ बन चुकी है। यहां बंदरों का आतंक कितना बढ़ गया है इसका सहज अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोविंदपुरी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हर राेज 100 से अधिक लाेग रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आते हैं। डॉक्टर करण सिंह का कहना है कि बंदरों के हमले पिछले वर्षों की तुलना में इन दिनों बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। जाे राेगी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने आ रहे हैं उनमें से 80 प्रतिशत बंदर के हमले के शिकार हैं।