
Book exchange program : उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद केवल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है। दिल्ली से सटा होने के कारण साल में तकरीबन 4 महीने गाजियाबाद के लोगों को प्रदूषित हवा में सांस लेना पड़ता है। दिवाली के आसपास तो यहां आबो हवा बेहद जहरीली हो जाती है। अगर देखा जाए तो प्रदूषण के पीछे कोई और नहीं, बल्कि हम लोग ही जिम्मेदार हैं। इसलिए प्रदूषण को कम करने में आम लोगों की भागीदारी की बेहद आवश्यक है। इसी को देखते हुए गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन ने पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए एक शानदार पहल की है।
गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन की तरफ से बुक एक्सचेंज प्रोग्राम चलाया जा रहा हैं, जिसके तहत छात्र-छात्राएं अपनी किताबों को एक-दूसरे से बदल सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि आपने आठवीं कक्षा पास की है तो आप 8वीं कक्षा की इस्तेमाल की हुई किताबें देकर नौवीं कक्षा की किताबें ले सकते हैं।
बड़े स्तर पर पर्यावरण का संरक्षण का संदेश
गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, बीते कई सालों से एसोसिएशन की ओर से एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। हर साल एक्सचेंज प्रोग्राम से तकरीबन 10 से 15 हजार अभिभावकों को फायदा पहुंचता है। लेकिन, इस साल एसोसिएशन ने तकरीबन एक लाख अभिभावकों को एक्सचेंज प्रोग्राम का फायदा पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक औसतन एक कक्षा में 10 किताबें इस्तेमाल होती हैं। इस साल एक लाख अभिभावकों को फायदा पहुंचाने का लक्ष्य है तो औसतन 10 लाख पुरानी किताबों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे बड़े स्तर पर पर्यावरण का संरक्षण हो पाएगा।
हर साल कटने से बचा रहे पेड़ों को
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि बुक एक्सचेंज अभियान को हर कोई पसंद कर रहा है। उन्हाेंने बताया कि इसके माध्यम से निजी स्कूल संचालकों द्वारा कॉपी किताब और ड्रेस आदि की लूट से अभिभावकों को बचाया जा रहा है। इसके साथ ही कागज बनाने के लिए हर साल कटने वाले पेड़ों का जीवन भी काफी हद तक बचाया जा सकता है।
Published on:
26 Mar 2022 04:48 pm
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