
गाजियाबाद. मुरादनगर क्षेत्र के हिसाली गांव निवासी शहीद अमरीश त्यागी का पार्थिव शरीर मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गया। पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना के जवान और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा भारी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ शहीद के अंतिम दर्शनों के लिए उमड़ पड़ी। सभी लोगों ने नम आंखों से भारत के सपूत को श्रद्धांजलि दी। वहीं, पहली बार पिता के दर्शन कर बेटी ईशू बिलख-बिलखकर रोने लगी। बेटी ने कहा कि वह भी सेना में जाकर पिता की तरह ही देश की सेवा करेगी। यह सुनकर सभी की आंखे नम हो गईं।
बता दें कि हिसाली गांव के रहने वाले अमरीश त्यागी ड्यूटी के दौरान 23 सितंबर 2005 को उत्तराखंड में गहरी जिगजैग खाई में गिर जाने के कारण बर्फ में दब गए थे। उनके साथ सेना के तीन और जवान भी बर्फ में दबे थे। उसी दौरान अन्य तीन सैनिकों के पार्थिव शरीर तो बर्फ से बरामद हो गए थे, लेकिन अमरीश त्यागी का कहीं कुछ पता नहीं चल सका था। अब ठीक 16 साल बाद 23 सितंबर 2021 को आर्मी कैंप की तरफ से आई एक कॉल ने अमरीश के परिवार में खलबली मचा दी और उनके जख्म हरे गए। आर्मी के जवानों ने परिजनों को बताया कि अमरीश का पार्थिव शरीर 16 साल बाद बर्फ पिघलने के बाद उसी जगह से बरामद किया गया है। जहां उनके साथ वह दुर्घटना हुई थी। इसके बाद जहां एक ओर परिजनों में उनकी शहादत को लेकर थोड़ी मायूसी है तो वहीं दूसरी ओर उनके पार्थिव शरीर को 16 साल बाद पाने के बाद उन्हें यह सब्र हो गया कि आखिर उनके लाल का कुछ तो पता चल ही गया।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
जैसे ही मंगलवार को अमरीश का पार्थिव शरीर हिसाली गांव पहुंचा रिश्तेदार समेत लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अमरीश त्यागी की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोगों ने भारत माता की जय के नारे के साथ अंतिम यात्रा में भाग लिया। पूरे जोश के साथ एक सैनिक की अंतिम यात्रा को स्मरणीय बनी। सैनिक के पार्थिव शरीर को 16 साल बाद अपने गांव की मिट्टी मिली और उसी गांव की मिट्टी और लोगों ने पूरे उत्साह के साथ सैनिक के पार्थिव शरीर का सम्मान किया।
शादी के एक साल बाद ही लापता हो गए थे अमरीश
बता दें कि अमरीश त्यागी का विवाह लापता होने से एक साल पहले ही हुआ था। जिस दौरान उनके लापता होने के सूचना मिली थी। उस दौरान उनकी पत्नी गर्भवती थी। उनके जाने के बाद पत्नी ने बेटी ईशू को जन्म दिया था। तब से लेकर अब तक ईशू भी पिता की एक झलक पाने को आतुर थी। वहीं जब पहली बार ईशू ने पिता के दर्शन किए तो वह बिलख-बिलखकर रोने लगी। बेटी ने कहा कि वह भी सेना में जाकर पिता की तरह ही देेश की सेवा करेगी। यह सुनकर सभी की आंखे नम हो गईं।
Published on:
29 Sept 2021 10:51 am
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