
गाजियाबाद. लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में छठ पर्व के दिन गो तस्करों से मुठभेड़ में पुलिस ने 7 आरोपियों को पैर में एक ही स्थान पर गोली मारकर पकड़ने के दावा किया था। लेकिन, आरोपियों के परिजन एनकाउंटर को पूरी तरह से फर्जी बता रहे हैं। परिजन पुलिस की इस कार्रवाई पर तमाम तरह के सवाल भी उठा रहे हैं। वहीं, टीम पत्रिका यह जानने का प्रयास कर रही है कि आखिर एनकाउंटर में घायल हुए आरोपी सातों युवक किस पृष्ठभूमि से आते हैं और उनका आचरण कैसा था? इसी कड़ी में पत्रिका संवाददाता तेजेश चौहान ने चौथे आरोपी 20 वर्षीय मोनू के घर का हाल जाना और उसके परिजनों से विशेष बात की। पेश है ग्राउंड जीरो से पत्रिका कि ये रिपोर्ट-
जब पत्रिका टीम चौथे आरोपी माेनू के प्रेम नगर स्थित घर पहुंची तो वहां मोनू की मां से मुलाकात हुई। जब हमने उनसे मोनू के बारे में पूछा तो उनकी आंखे भर आईं। वह फफक-फफक कर रोने लगीं। हमने उन्हें ढांढस बंधाया तो मोनू की बुजुर्ग मां कौसर ने बताया कि वह मूलरूप से बुढ़ाना के उमरपुर के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले 20 साल से प्रेम नगर में ही किराए के मकान में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोनू के पिता अब इस दुनियां में नहीं हैं। उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। उन्होंने बताया कि एक बेटी की शादी हो चुकी है। वहीं मोनू के बड़े भाई रिजवान का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। इसलिए परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी माेनू के कंधों पर ही है। उन्होंने बताया कि घटना से 20 दिन पहले ही माेनू की शादी हुई है। पहले माेनू शादी समारोह में जनरेटर चलाने का कार्य करता था। लॉकडाउन में वह काम बंद हो गया। घटना के 12 दिन पहले ही माेनू ने कबाड़ के गोदाम में मजदूरी शुरू की थी। उसके साथ-साथ वह ड्राइवरी भी करता था। 11 नवंबर की रात मोनू की पत्नी घर नहीं थी। इसलिए वह रात को गोदाम पर ही रुक गया था। उन्होंने बताया कि माेनू के जेल जाने से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया है, क्योंकि परिवार में कोई और कमाने वाला भी नहीं है।
वीडियो और फोटो देखकर हुई जानकारी
मोनू की मां ने बताया कि 11 नवंबर को दोपहर के समय अन्य लोगों से जानकारी मिली कि पुलिस ने मोनू को गोली मारकर गिरफ्तार किया है। जब उन्होंने वीडियो और फोटो में अपने बेटे को देखा तो उनके होश उड़ गए। थाने जाकर मोनू से मिलने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने मिलने नहीं दिया। मोनू की मां का कहना है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मोनू पर जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं। वह पूरी तरह बेबुनियाद हैं। वह ऐसा काम बिल्कुल नहीं कर सकता। क्योंकि अभी तक किसी तरह का कोई विवाद मोनू का नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उसके ऊपर इतनी जिम्मेदारी थी कि वह इस तरह के काम के बारे में सोच भी नहीं सकता था।
फिलहाल पड़ोस वाले ही दे रहे हैं खाना खर्चा
उन्होंने बताया कि हमारे पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि मोनू की जमानत करा सकें और घर चलाने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं हैं। फिलहाल पड़ोस के लोग ही उन्हें खाना खर्चा दे रहे हैं। हमारी टीम जब मोनू के घर पहुंची तो वहां पर रिश्तेदारों के अलावा मोहल्ले वाले भी मौजूद थे। उनमें से एक क्षेत्रीय नेता भी शामिल थे, जिन्होंने बताया कि यह मुठभेड़ पूरी तरह फर्जी है और बेवजह इन युवकों को फंसाया गया है। इसलिए इस मुठभेड़ की गहनता से जांच होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और इन सभी युवकों को दोषमुक्त किया जाए।
तीन बार में भी जेल में नहीं हो पाई मिलाई
मोनू की मां ने कहा कि तीन बार वह जेल में अपने बेटे से मिलाई करने जा चुकी हैं, लेकिन तीनों बार ही कोरोना की सही रिपोर्ट न होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा है। अब वह केवल और केवल यह चाहती हैं कि किसी तरह से भी उनका बेटा जेल से वापस आ जाए, ताकि अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल सके। बता दें कि उक्त आरोप आरोपियों के परिजनों ने लगाए हैं और पुलिस इस मामले में गहनता से जांच कर रही है।
Published on:
23 Nov 2021 04:58 pm
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