
गाजियाबाद. आधी सर्दी बीतने के बाद भी प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को स्वेटर नहीं मिलने से जहां बच्चे ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं। वहीं, सरकार एक के बाद एक सिर्फ आदेश जारी कर रही है। जमीन पर अमल होता नहीं दिख रहा है। दरअसल, स्वेटर खीरीदी और वितरण में देरी की वजह खमीशनखोरी को माना जा रहा है। कारोबारियों का दावा है कि एक स्वेटर के लिए लगभग 60 फीसदी तक का कमीशन निर्धारित है। गौरतलब है कि सरकार ने एक स्वेटर के लिए 200 रुपए निर्धारित किया है। अब अगर इस में से 60 प्रतिशत कमीशन निकाल दें तो मात्र 80 रुपए ही बचता है। लिहाजा, कोई भी व्यापारी इतने कम दाम पर स्वेटर उपलब्ध कराने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि गाजियाबाद जनपद के 593 परीषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले 80175 छात्र-छात्राओं को आधी जनवरी बीतने के बाद भी स्वेटर नहीं मिल पाए हैं, जिसकी वजह से बच्चे ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं।
स्कूल कमेटी स्वेटर के लिए 200 रुपए को बता रही नाकाफी
योगी सरकार ने ठंड को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग को जल्द से जल्द स्वेटर वितरण करने के दिशा-निर्देश जारी किए हुए हैं। बावजूद इसके स्कूल कमेटी स्वेटर वितरण से हाथ खड़े कर रही है। स्कूल कमेटी के लोग जहां स्वेटर की तय कीमत 200 रुपए को कम बता रहे हैं। वहीं, व्यापारी इस कीमत को तो सही बता रहे हैं, लेकिन कमीशनखोरी को स्वेटर वितरण के केाम में एक बड़ी बाधा बता रहे हैं।
व्यापारियों ने एक स्वेटर के लिए 200 रुपए को बताया काफी
गाजियाबाद के गारमेंट्स कारोबारी रजनीश बंसल के मुताबिक सरकार की तऱफ से स्वेटर तय की गई 200 रूपए राशि बिल्कुल ठीक है। इतने दाम में अच्छा स्वेटर बच्चों को मिल सकता है। लेकिन, कमीशनखोरी की वजह से कोई भी इस विवाद में पड़ना नहीं चाहता है। आज के समय में एक स्वेटर के लिए 60 प्रतिशत तक कमीशन तय है। इसमें स्कूल कमेटी से लेकर बेसिक शिक्षा विभाग, स्वेटर के बिल का पेमेंट करने वाले और अन्य लोगों हिस्सा होता है। ऐसे में अस्सी रूपए में छात्रों तक स्वेटर कैसे पहुंच सकता है।
कमीशन नहीं देने पर व्यापारियों को किया जाता है परेशान
अगर किसी को कमीशन का हिस्सा नहीं दिया गया तो क्वालिटी खराब बताकर दुकानदार की मुश्किलें बढ़ा दी जाती है। या फिर उसके पेमेंट को रोक दिया जाएगा। इसकी वजह से कोई अच्छा और बड़ा व्यापारी इसमें जुड़ने के लिए तैयार नहीं है।
अभी कोटेशन में ही उलझे हैं बीएसए
गाजियाबाद के बीएसए विनय कुमार ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर बनाई गई विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमएसी) को स्वेटर का कोटेशन दे दिया गया है। छात्रों की उपस्थिति के अनुसार ही उनकी संख्या को निर्धारित किया जाएगा। संख्या के अनुसार ही एसएमसी अपनी कोटेशन बनाकर विभाग को सौंपेगा।
योगी सरकार के लिए गले की फांस बनीं स्वेटर योजना
दरअसल, योगी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद यूपी के प्राइमरी स्कूलों का कायाकल्प करने के साथ ही इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सभी जरूरी सामान मुहैया कराने का वादा किया था। इसी वादे के सहत इस सत्र से सरकार ने बच्चों को स्वेटर भी उपलब्ध कराने का वादा किया था। इसके लिए पहले यूपी सरकार ने प्रत्येक जिले को खुद ही स्वेटर खरीदने की जिम्मेदारी दी थी। इस पर अमल करते हुए स्कूलों ने अपने प्रपोजल जब शासन को भेजे तो उसमें दाम को लेकर काफी भिन्नताएं थी। सरकार एक स्वेटर पर 200 रुपए से ज्यादा खर्च करने को तैयार नहीं थी। लेकिन, कई स्कूलों के प्रपोजल में यह दाम काफी ऊंचा था। इसके बाद सरकार ने खुद ई-टेंडरिंग के जरिए स्कूलों में स्वेटर मुहैया कराने की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए 20 दिसंबर 2017 की डेडलाइन तय की गई। लेकिन, इस पर कोई काम नहीं हो सका। बाद में सरकार ने 25 दिसंबर 2017 की दूसरी डेडलाइन तय की। अफसोस कि इस बार भी सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे स्वेटर की खरीदारी का काम अटक गया, जिसका खामियाजा मासूम बच्चे भुगत रहे हैं। अब एक बार फिर से सरकार ने एक आदेश जारी कर जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्वेटर बांटने के आदेश दिए हैं। लेकिन, अभी तक किसी स्कूल में बच्चों को स्वेटर बांटा नहीं जा सका है।
Published on:
11 Jan 2018 03:21 pm
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