
पृथ्वीनाथ मंदिर पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु
Gonda News: गोंडा जिले में कजरी तीज पर्व को लेकर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। गुरुवार को कर्नलगंज स्थित पवित्र सरयू नदी से जल भरकर शिव भक्त पृथ्वी नाथ और दुखारन नाथ मंदिर पहुंच रहे हैं। शिव भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए दोनों मंदिरों पर आधी रात से जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया है। जिसके आज देर शाम तक चलने की उम्मीद है। एक अनुमान के मुताबिक इस बार 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के जलाभिषेक करने का अनुमान है। भारी सुरक्षा के बीच जलाभिषेक का सिलसिला जारी है। पूरी रात जिले के अधिकारी पूरे व्यवस्था का जायजा लेते रहे।
Gonda News: गोंडा जिले के दो प्रमुख मंदिरों पृथ्वीनाथ व दुखहरण नाथ मंदिर पर गुरुवार की देर रात से शुरू हुआ जलाभिषेक का सिलसिला शुक्रवार को देर शाम तक चलेगा। देवीपाटन मंडल के सबसे बड़े पर्व अब जनपद तक सीमित ना रह रह कर प्रदेश स्तर तक का यह मेला हो गया है। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा ना हो इसके लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए है। कर्नलगंज के सरयू घाट से लेकर पृथ्वीनाथ मंदिर व दुखहरण नाथ मंदिर तक चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सरयू घाट पर नदी के अंदर बैरीकेटिंग कराने के साथ-साथ भारी संख्या में जल पीएसी व नाव पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रखा गया था। इसके अतिरिक्त पूरे घाट की सुरक्षा सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन कैमरे से निगरानी कराई जा रही थी। सुबह तक सरयू घाट से लगभग श्रद्धालु अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुके थे। जीवनदायिनी पवित्र सरयू नदी से जल भर कर शिव भक्त पृथ्वीनाथ, दुखहरण नाथ व बरखंडी नाथ महादेव मंदिर पर नंगे पैर चलकर जलाभिषेक करते हैं। हर हर महादेव ओम नमः शिवाय बोल बम जैसे तमाम प्रकार के नारों से रास्ते से लेकर मंदिर परिसर तक सोमवार की सुबह से शुरू हुआ जयकारा मंगलवार की देर रात्रि तक चलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शिव भक्तों की सेवा के लिए कर्नलगंज सरजू घाट से लेकर पृथ्वीनाथ मंदिर वह दुखहरण नाथ मंदिर तक जगह जगह पर समाजसेवी लोगों द्वारा पंडाल लगाया गया था। इस दौरान शिव भक्तों के लिए चाय नाश्ता भोजन फल मिष्ठान के साथ-साथ दवा व पैर धुलने के लिए गरम पानी की निशुल्क व्यवस्था की गई थी। प्रत्येक पंडाल पर शिव भक्तों की सेवा के लिए भारी संख्या में लोग अपना योगदान दे रहे थे।
गोंडा जिले के मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर खरगूपुर कस्बे के निकट पृथ्वीनाथ मंदिर में भगवान शिव के साक्षात दर्शन होते हैं। पांडवों के अज्ञातवास के दौरान यहां भीम द्वारा स्थापित साढ़े 5 फुट ऊंचा एशिया महाद्वीप का सबसे विराटतम शिवलिंग है। प्राचीनतम समय में इस क्षेत्र में पांडव अपनी मां कुंती के साथ रहते थे। इस क्षेत्र के लोग ब्रह्म राक्षस से पीड़ित थे। भीम ने उसका वध कर दिया था। अभिशाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के मार्गदर्शन के बाद भगवान शिव की उपासना के लिए इस विराटतम शिवलिंग की स्थापना किया था।
पुरातत्व विभाग की मानें तो एशिया महाद्वीप का सबसे बड़े शिवलिंग में से है। जिसकी जमीन के अंदर 64 फीट गहराई ,जबकि जमीन के ऊपर अरघे समेत साढ़े 5 फीट ऊंचा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार खरगूपुर के राजा गुमान सिंह के अनुमति से यहां के पृथ्वी सिंह ने मकान निर्माण के लिए खुदाई शुरू की, उसी रात स्वप्न में पता चला कि जमीन के नीचे सात खंडों में शिवलिंग है। स्वप्न के अनुसार उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया तभी से इस मंदिर का नाम पृथ्वीनाथ मंदिर पड़ा। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के साथ ही पृथ्वीनाथ मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। मंदिर के पुजारी जगदंबा प्रसाद तिवारी ने बताया कि वैसे यहां तो प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। यद्यपि श्रावणमास व हर तीसरे साल पड़ने वाले अधिमास मे यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। महाशिवरात्रि पर्व व कजलीतीज के अवसर पर यहां की बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को करीब 5 से 6 किलोमीटर तक बैरिकेडिंग करनी पड़ती है।
मुख्यालय के स्टेशन रोड स्थित बाबा दुखहरण नाथ मंदिर अति प्राचीनतम है। बताया जाता है कि पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान यहां पर एक शिवलिंग की स्थापना की गई थी। बाद में इस मंदिर का निर्माण गोंडा नरेश ने करवाया। यह मंदिर पूरी तरह पत्थरों से बना भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि यहां पर जलाभिषेक व पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यहां पर पूरे वर्ष प्रत्येक शुक्रवार व सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। सावन मास में सोमवार व शुक्रवार को शिव भक्तों की अपार भीड़ जलाभिषेक करती है। जिसके लिए प्रशासन को रूट डायवर्जन के साथ-साथ सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने पड़ते हैं। कजली तीज के अवसर पर कर्नलगंज स्थित पवित्र सरयू नदी से नंगे पैर लाखों की संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान प्रशासन द्वारा करीब 4 किलोमीटर तक जलाभिषेक के लिए वेरीकेटिंग की जाती है।
Updated on:
06 Sept 2024 10:10 am
Published on:
06 Sept 2024 10:09 am
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