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एमपी में बदली खेती की तस्वीर, 90% किसान ड्रिप और मल्चिंग से उगा रहे सब्जियां

Advance Farming Technique in MP : गांव के ज्यादातर खेतों में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, फर्टिगेशन, स्टैकिंग और उन्नत हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल हो रहा है। कभी कम उपज देने वाली मुरमी और ढालू जमीन आज आधुनिक तकनीकों की बदौलत भरपूर उत्पादन दे रही है।
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Advance Farming Technique in MP

Advance Farming Technique in MP (एमपी में बदली खेती की तस्वीर Photo Source- Patrika)

Guna News :मध्य प्रदेश के गुना जिले के बमोरी विकासखंड का भटोदिया गांव इन दिनों जिले में आधुनिक खेती की वजह से चर्चाओं में है। गुना से करीब 10 किलोमीटर दूर बसे इस गांव को अब लोग देखने तक पहुंच रहे हैं। वजह है यहां के किसानों द्वारा अपनाई गई आधुनिक तकनीक, जिसने न केवल खेती का तरीका बदला बल्कि किसानों की आमदनी भी कई गुना बढ़ा दी। करीब 110 किसान परिवारों वाले इस गांव में 97 किसान अब वर्षाकाल में वैज्ञानिक तरीके से सब्जियों की खेती कर रहे हैं।

गांव के अधिकांश खेतों में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, फर्टिगेशन, स्टैकिंग और उन्नत हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कभी कम उपज देने वाली मुरमी और ढालू जमीन आज आधुनिक तकनीकों की बदौलत भरपूर उत्पादन दे रही है।

किसानों की आय में दिख रहा फायदा

आधुनिक खेती का सबसे बड़ा फायदा किसानों की आय में दिखाई दिया है। पहले जहां परंपरागत खेती से प्रति एकड़ 40 से 50 हजार तक का शुद्ध लाभ मिलता था, वहीं अब सब्जी उत्पादन से किसान प्रति एकड़ 3 से 4 लाख तक का मुनाफा कमा रहे हैं। ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत हो रही है, फर्टिगेशन के जरिए उर्वरक सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंच रहे हैं, जबकि मल्चिंग से नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं। स्टैकिंग तकनीक से बेल वाली फसलों का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर हुई हैं।

सब्जियों की कई किस्में उगाई जा रहीं

भटोदिया में मुख्य रूप से तोरई, खीरा, करेला, लौकी सहित कद्दू वर्ग की बेल वाली सब्जियां उगाई जाती हैं। यहां की उपज केवल गुना की मंडियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ग्वालियर, मथुरा और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक पहुंचती है। बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन के कारण यहां की सब्जियों की अच्छी मांग बनी रहती है।

किसानों का उत्साह बढ़ा

ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी रामकुमार दिवाकर बताते हैं कि कुछ साल पहले तक गांव में परंपरागत खेती होती थी। लागत ज्यादा और उत्पादन कम होने से किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था। इसके बाद किसानों को आधुनिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया और ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इन तकनीकों पर मिलने वाले 50 प्रतिशत तक के अनुदान ने भी किसानों का उत्साह बढ़ाया। इसका नतीजा यह रहा कि कई फसलों का उत्पादन दो से तीन गुना तक बढ़ गया।

97 हेक्टेयर रकबे में सब्जियां बोई

भटोदिया गांव में नहीं तकनीक की वजह से बदलाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आठ-दस वर्ष पहले गांव में केवल तीन हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों की खेती होती थी। आज ये रकबा बढ़कर 97 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। खेती के इस बदलाव ने गांव की आर्थिक तस्वीर भी बदल दी है। कई किसानों ने अपनी आय बढ़ाकर जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है। उद्यानिकी विभाग अब इसी मॉडल को जिले के अन्य गांवों में भी विकसित करने की तैयारी कर रहा है। विभाग का मानना है कि यदि किसान समूह बनाकर आधुनिक तकनीकों के साथ उच्च मूल्य वाली उद्यानिकी फसलों की खेती करें तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। भटोदिया इसका जीवंत उदाहरण बन चुका है, जहां वैज्ञानिक खेती ने पूरे गांव की पहचान बदल दी है।