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शिव मंदिर में तोड़फोड़ करने वाला शिवभक्त निकला, पुलिस ने 5 लोगों को बेवजह जेल भेज दिया

मध्य प्रदेश के गुना में 31 जनवरी को शिव मंदिर में हुई तोड़फोड़ का आरोपी एक शिवभक्त ही निकला है। इस मामले में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया था। उसके बाद एक धर्म विशेष के पांच लोगों को जेल भेजा गया था।

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शिव मंदिर में तोड़फोड़ करने वाला शिवभक्त निकला, पुलिस ने 5 लोगों को बेवजह जेल भेज दिया

मध्य प्रदेश के गुना जिले के बमोरी में स्थित शिव मंदिर में 31 जनवरी की रात को तोड़फोड़ हुई थी। उस दौरान शिवलिंग और नंदी की मूर्ति को उखाड़कर मंदिर के बाहर फैंक दिया गया था। उक्त घटना के बाद शहर में बवाल मच गया था। कई हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए थे। इसपर पुलिस ने एक धर्म विशेष के 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। हालांकि, बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि जिन 7 लोगों पर केस दर्ज किया गया था उनमें से 2 तो घटना वाली रात शहर में ही नहीं थे। इसपर पुलिस ने दो के नाम हटाकर पांच लोगों पर धारा 151 के तहत कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया था। लेकिन अब पुलिस जांच में ही एक और चौंकाने वाला खुलासा है। पुलिस ने जिन पांच लोगों को हिरासत में लेकर जेल भेजा था, दरअसल वो तो दोषी थे ही नहीं, बल्कि एक शिवभक्त ने ही मंदिर में तोड़फोड़ की थी।


मामले की जानकारी देते हुए गुना एसपी संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि उक्त घटना की जांच के लिए एक एसआईटी गठित की गई थी। जांच में पता चला कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग समेत अन्य मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने वाले वो पांच आरोपी नहीं, बल्कि भगवान शिव का ही एक भक्त 40 वर्षीय ग्यारसा प्रजापति मरघट शाला के पास बमोरी में रहने वाला है। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

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आरोपी ने कबूल किया जुर्म

एसपी ने बताया कि पूछताछ में ग्यारसा प्रजापति ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उसने पुलिस को बताया कि उसने भगवान से कई बार शादी कराने की प्रार्थना की थी, बावजूद इसके उसकी शादी नहीं हो रही थी। 31 जनवरी की रात उसने बहुत अधिक शराब पी ली थी। उसे नशे में भगवान पर गुस्सा आ गया, जिसके बाद रात करीब 2 बजे उसने मंदिर के बाहर पड़े पत्थर उठाकर मंदिर में भगवान शिव और नंदी की मूर्तियों पर पटक दिए थे। इससे मूर्तियां खंडित हो गई थीं।


जांच पर उठ रहे सवाल

इस मामले में संदेह के आधार पर अनवर खान समेत 5 को आरोपी बनाया गया था। अनवर के अनुसार घटना में पुलिस द्वारा 7 लोगों को आरोपी बनाया था। फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य जांच में पुलिस को पता चला कि जिन 7 को आरोपी बनाया है उनमें से 2 तो घटना के समय शहर में थे ही नहीं। फिर दो को छोड़कर बाकी पांच को जेल पहुंचा दिया गया। उन्होंने बताया कि हम पांच लोगों को 3 फरवरी तक जेल में रखा गया। हम लोग बेगुनाह थे। इसके बाद भी पुलिस ने हमें जेल भेजा।


पुलिस नहीं जताएगी खेद

हालांकि, इस मामले में बमोरी थाना प्रभारी अरविंद सिंह गौड़ ने कहा कि संदेह के आधार पर पांचों को पकड़ा गया था। लेकिन अब स्थिति स्पष्ट हो गई है तो फाइनल चालान पेश किया जाएगा। उसमें आरोपियों का नाम खुद-ब-खुद हट जाएगा। जो असली गुनहगार है, उसके नाम से ये चालान पेश किया जाएगा। एएसपी मान सिंह ठाकुर ने कहा कि कार्रवाई बॉन्ड ओवर के तहत की गई थी। ताकि इलाके में हालात न बिगड़ें। प्रकरण दर्ज नहीं किया गया था। इस वजह से जो कुछ भी हुआ, पुलिस उस पर कोई खेद नहीं जताएगी।


हिंदू संगठनों ने किया था जमकर विरोध

आपको बता दें कि मंदिर में तोड़फोड़ के बाद आक्रोशित हिंदू संगठनों ने बाजार बंद कर मुख्य चौराहे पर धरना दिया था। वहीं, कई मार्गों पर चक्काजाम भी किया था। पुलिस द्वारा काफी समझाइश के बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पा रहे थे। हिंदू संगठन आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए थे। इसी बीच पुलिस ने पांच आरोपितों को हिरासत में लेकर जेल भेजा, तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ। फिलहाल, मामले में नया मोड़ आने के बाद अबतक किसी संगठन की ओर से प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।