
Guna Fake e-attendance: ई-अटेंडेंस सिस्टम में सेंधमारी करने वाले शिक्षक पर शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई (फोटो सोर्स- Chatgpt)
Guna Fake e-attendance: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए करीब 16 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से तैयार किए गए ई-अटेंडेंस सिस्टम में 250 किलोमीटर दूर से ऑनलाइन हाजिरी लगाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पत्रिका ने 25 जुलाई को गुना में 16 करोड़ के ई-अटेंडेंस सिस्टम में बड़ा छेद, 250 किमी दूर से मास्टर ने लगा दी हाजिरी शीर्षक से खबर प्रकाशित कर सिस्टम की तकनीकी खामियों और फर्जी उपस्थिति के मामले को प्रमुखता से उठाया था।
खबर के प्रकाशन के बाद जिला शिक्षा अधिकारी समर सिंह राठौर ने मामले की जांच कराई। जांच में मामला सही पाए जाने पर गुना ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक विद्यालय चक मुसरेड़ी में पदस्थ शिक्षक सुनील कुमार माहौर को निलंबित कर दिया गया है। वहीं उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के लिए संबंधित बीईओ को निर्देश दिए गए है। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब ई-अटेंडेंस सिस्टम की दी निगरानी को लेकर भी सख्ती बढ़ा गई है। जिले के सभी स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की जांच और निगरानी करने के निर्देश दिए गए है, ताकि इस तरह की गड़बड़ी दोबारा न हो सके। विभाग अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि कहीं अन्य स्कूलों में भी शिक्षक सिस्टम की तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर स्कूल से बाहर रहते हुए ऑनलाइन हाजिरी तो नहीं लगा रहे है।
शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद जिले में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर निगरानी और सख्त कर दी गई है। विभाग यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि शिक्षक जिस स्कूल में पदस्थ है, वे वास्तव में वहीं मौजूद रहकर अपनी उपस्थिति दर्ज करें। ऑनलाइन हाजिरी की सुविधा का उद्देश्य शिक्षकों की उपस्थिति में पारदर्शिता लाना था, लेकिन चक मुसरेड़ी के मामले ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि तकनीक के साथ उसकी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होना जरूरी है।
मामला गुना ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक विद्यालय चक मुसरेड़ी का है। यहां पदस्थ शिक्षक सुनील कुमार माहौर मुरैना जिले के निवासी हैं। विभागीय जांच के मुताबिक शिक्षक के लंबे समय से स्कूल नहीं पहुंचने की शिकायत सामने आई थी। इसके बावजूद ई-अटेंडेंस ऐप पर उनकी उपस्थिति दर्ज दिखाई दे रही थी। 18 जुलाई को संकुल प्राचार्य छतर सिंह चौहान ने स्कूल का निरीक्षण किया। इस दौरान रजिस्टर में शिक्षक के हस्ताक्षर नहीं मिले, जबकि ऐप पर उनकी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज थी। स्कूल में मौजूद बच्चों से पूछताछ करने पर भी शिक्षक के नियमित रूप से स्कूल नहीं आने की बात सामने आई।
ई-अटेंडेंस सिस्टम की इस खामी को दूर करने के लिए विभाग ने अब लोकेशन को लेकर नियम और सख्त किए हैं। पहले कथित तौर पर लोकेशन सेट करने में तकनीकी स्तर पर ऐसी स्थिति बन सकती थी, जिसमें स्कूल से अलग स्थान को भी लोकेशन के रूप में सेट किया जा सकता था। अब इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए स्कूल के आसपास करीब 200 मीटर का दायरा निर्धारित किया गया है। उपस्थिति दर्ज करने के लिए शिक्षक को इसी क्षेत्र में होना जरूरी होगा। इस बदलाव के बाद अब स्कूल से दूर बैठकर किसी अन्य स्थान की लोकेशन के आधार पर हाजिरी लगाने की संभावना को कम करने का प्रयास किया गया है। विभाग ने जिलेभर के स्कूलों की ऑनलाइन उपस्थिति पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।
ई-अटेंडेंस सिस्टम में इस तरह की सेंधमारी को लेकर दो प्रमुख आशंकाएं सामने आई है। पहली आशंका यह है कि शिक्षक ने अपने निवास स्थल की लोकेशन को किसी तरह ऐप में सेट कर लिया हो और वहीं से अपनी उपस्थिति दर्ज की हो। दूसरी आशंका यह है कि शिक्षक ने अपना मोबाइल या लॉगिन किसी अन्य शिक्षक को दिया हो और उसकी मदद से स्कूल की निर्धारित लोकेशन से ऑनलाइन उपस्थिति लगाई गई हो। हालांकि इन दोनों संभावनाओं में से वास्तविक रूप से किस तरीके का इस्तेमाल किया गया, यह जांच का विषय है। विभागीय जांच में शिक्षक की उपस्थिति से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की पड़ताल की गई है। अब एफआईआर के बाद पुलिस जांच में यह स्पष्ट हो सकेगा कि सिस्टम में किस तरह सेंधमारी की गई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
स्कूलों में शिक्षकों के समय पर पहुंचने को लेकर ई-अटेंडेंस सिस्टम संचालित है। हालांकि इसमें गड़बड़ी की आशंकाओं को दूर करने के लिए लोकेशन का दायरा तय किया है। फिर भी कोई शिक्षक सिस्टम से अनाधिकृत छेड़छाड़ करते हैं तो एफआइआर जैसी कार्रवाई की जाएगी। इसलिए सभी शिक्षक नियमों का पालन करें, सिस्टम के तहत ही उपस्थिति दर्ज कराएं।- समर सिंह राठौर, डीईओ
Updated on:
29 Jul 2026 12:50 pm
Published on:
29 Jul 2026 12:50 pm
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