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असम में बाढ़ का पानी घटा तो सामने आई तबाही, 105 की मौत; पीड़ित बोले- ‘हालात सामान्य होने में लगेंगे 20 साल’

Assam floods 105 dead: असम के शिवसागर और चराईदेव में विनाशकारी बाढ़ के एक महीने बाद पानी तो घटा, लेकिन 105 लोगों की मौत और भारी तबाही ने पीड़ितों को झकझोर कर रख दिया है। अवैध खनन को इस तबाही की वजह माना जा रहा है।
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Assam floods 105 dead

असम में बाढ़ का पानी घटा तो सामने आई तबाही, फोटो सोर्स- IANS

Assam man made flood disaster: असम के शिवसागर और चराईदेव जिलों में 19 जुलाई को आई विनाशकारी बाढ़ को एक महीना बीत चुका है। नदियों का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए यह तबाही खत्म होने का नाम नहीं ले रही। अब तक इस विनाशकारी बाढ़ में कम से कम 105 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से अकेले शिवसागर जिले में ही 54 मौतें हुई हैं। बिहुबोर, नेपालीखूंटी और नजीरा जैसे इलाकों में जब लोग अपने घरों को लौटे, तो उन्हें अपना बसा-बसाया संसार मिट्टी और मलबे के ढेर में तब्दील मिला।

'20 साल भी कम पड़ेंगे जिंदगी को पटरी पर लाने में'

हिंदुस्तान टाइम्स के रिपोर्ट के मुताबिक, 65 साल की चंद्रावती मांझी बाढ़ के 15 दिन बाद जब अपने गांव बिहुबोर लौटीं, तो उन्हें अपने घर की पहचान करने के लिए पास के एक पक्के निर्माण का सहारा लेना पड़ा। नागालैंड की पहाड़ियों से आए भूस्खलन और कीचड़ के सैलाब ने उनके घर को पूरी तरह दफना दिया था। पत्थर खदान (स्टोन क्रशर) में मजदूरी करने वाली चंद्रावती बताती हैं कि '19 जून को अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने लगा और upstream (ऊपरी इलाके) से एक भयानक गर्जना सुनाई दी। हम समझ गए कि खतरा बड़ा है। हम छोटी नावों के सहारे जैसे-जैसे निकल पाए, लेकिन देखते ही देखते पानी घर में घुस गया। अब मदद और मुआवजे से ज्यादा जरूरी हमारे लिए कमाने के साधन तलाशना है, क्योंकि राहत सामग्री के भरोसे पूरी जिंदगी नहीं काटी जा सकती।'

नेपालीखूंटी गांव की प्रमीला मांझी की कहानी भी अलग नहीं है। वे कहती हैं कि हमारे पास लहराती खेती थी, हर घर में गाय-भैंसें थीं। लेकिन महज 4-5 घंटों में सब कुछ खत्म हो गया। अब पहले जैसी सामान्य जिंदगी में लौटने के लिए 20 साल भी कम पड़ेंगे।'नजीरा के स्थानीय व्यवसायी निर्मल लाहन और सेवानिवृत्त पत्रकार अनिल कुमार गुप्ता के मुताबिक, यह कोई सामान्य मानसूनी बाढ़ नहीं बल्कि 'प्रलय' जैसी त्रासदी थी। नागालैंड की पहाड़ियों में कटाई के काम में इस्तेमाल होने वाला एक भारी-भरकम उत्खनक (Excavator) पानी के तेज बहाव में बहकर मीलों दूर नेपालीखूंटी तक आ गया। इसके अलावा कई हाथी भी पानी में बह गए। वहीं, असम-नागालैंड सीमावर्ती इलाकों में पिछले 25 वर्षों से बालू, पत्थर और कोयले के अनियंत्रित और अवैध खनन को इस तबाही का मुख्य कारण माना जा रहा है।

प्राकृतिक आपदा या मानव निर्मित त्रासदी?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुरुआती बयानों में पड़ोसी राज्य नागालैंड में क्लाउडबर्स्ट (बादल फटने) को इस कीचड़युक्त भीषण बाढ़ की वजह बताया था, जिसे बाद में अत्यधिक बारिश का परिणाम कहा गया।