
गोठ/मुरैना। दिमनी क्षेत्र के पायका पुरा गांव में शुक्रवार को सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल हुकुम सिंह परमार का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए जहां सीआरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची, साथ ही हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने नम आंखों से जवान को अंतिम विदाई दी।
उल्लेखनीय है कि सीआरपीएफ में हेड कांस्टेबल हुकुम सिंह उर्फ बंटू १९ अप्रैल को छुट्टी लेकर आए थे। भतीजे निरंजन का शुक्रवार को फलदान आना था, इसलिए पूरा परिवार समारोह की तैयारी में जुटा था और खुशियां मनाई जा रही थी। हुकुम सिंह ग्वालियर स्थित आदित्यपुरम कॉलोनी में अपने घर का निर्माण करा रहे थे। जिससे पूरा परिवार उन्होंने गांव भेज दिया और उनकी पत्नी संगीता और ११ वर्ष का बेटा अंकित ग्वालियर ही रुक गए। लेकिन इसी बीच करंट लगने से गुरुवार को हुकुम सिंह की मौत हो गई। जिससे शादी का माहौल मातम में बदल गया।
शुक्रवार को हुकुम सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव पायका पुरा में किया गया। जैसे ही पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हजारों की संख्या में ओर पास के गांवों के लोग इकट्ठा हो गए। वहीं सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर विभु सिंह के नेतृत्व में टीम पहुंची। जिन्होंने जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। वहीं ग्रामीणों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। मुखाग्नि हुकुम सिंह के बड़े बेटे दीपक परमार (१६) ने दी। इस अवसर पर दिमनी थाना पुलिस सहित गोठ, रानपुर, पायकापुरा, श्यामपुर खुर्द सहित अन्य गांवों के हजारों लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
फलदान के बाद २ मई को गृह प्रवेश करना चाहते थे हुकुम सिंह : शुक्रवार को भतीजे का फलदान आना था, लेकिन जवान हुकुम ङ्क्षसह के शहीद होने पर फलदान का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। उधर हुकुम सिंह अपने घर का तेजी से निर्माण कराना चाहते थे, जिससे छुट्टियों में ही २ मई को ग्रह प्रवेश का कार्यक्रम किया जा सके। लेकिन इससे पूर्व ही हादसा हो गया।
चार भाई और दो भतीजे हैं देश की सेवा में
हुकुम सिंह के सात भाईयों में तीसरे नंबर के थे। हुकुम सिंह सहित चार भाई सीआरपीएफ में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दो भतीजे भी आर्मी में सेवा दे रहे है। बेटा दीपक १६ साल अभी पढ़ाई कर रहा है वहीं बेटी शिवानी (१४) छोटा बेटा अंकित (११) को भी हुकुम सिंह छोड़ गए हैं।
पिता का शव देख सदमें आ गया बेटा अंकित: हुकुम सिंह को जब करंट लगा उस समय उनका छोटा बेटा अंकित उनके पास ही था। पिता का शव देखकर अंकित सदमें आ गया और मुंह से सिर्फ पापा-पापा ही कह पा रहा था। अंतिम संस्कार के समय भी अंकित बेहोश हो गया। जिस पर उसे खटिया पर लिटाकर ले जाया गया। वहीं उनकी पत्नी संगीता का भी रो-रो कर बुरा हाल था।
Published on:
28 Apr 2018, 1:55 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.