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दतिया महोत्सव: ये लड़की नहीं देश का गहना है, गौर से देख ये तेरी बहना है

तीन दिवसीय दतिया महोत्सव का आगाज शुक्रवार की शाम स्टेडियम परिसर में धूमधाम से हुआ। मुंबई से आए हास्य कलाकार सुनील पॉल ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को ठ
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ग्वालियर

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Gaurav Sen

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Updated: 21 Oct 2017, 4:01 PM IST

datia mahotsav

ग्वालियर/दतिया। तीन दिवसीय दतिया महोत्सव का आगाज शुक्रवार की शाम स्टेडियम परिसर में धूमधाम से हुआ। मुंबई से आए हास्य कलाकार सुनील पॉल ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। जैसे ही उन्होंने जैसे ही ये लड़की नहीं देश का गहना है, गौर से देख ये तेरी बहना है जुमला सुनाया तो स्टेडियम परिसर तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज गया।

इस दौरान उन्होंने आपकी बातों से गुजरे सारी रतिया, खुले आम बोल रही दतिया व ये दोस्त जहां कांटे मिलें वहां फूल हो जाउंगा, जहां चांटे मिलें वहां गोल हो जाउंगा सुनाकर भी लोगों से हंसाया पर त्योहार के चलते महोत्सव में ज्यादा भीड़ नहीं पहुंची। महोत्सव में मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने दो कलाकारों का सम्मान भी किया। इस दौरान सेवानिवृत प्रोफेसर केबीएल पांडेय, सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य राजेश लिटोरिया व मानस ङ्क्षककर रामहुजूर दांगी को शॉल एवं फल से सम्मानित किया गया। महोत्सव की शुरुआत में आयोजन के मुख्य अतिथि व उत्सव के संरक्षक डॉ नरोत्तम मिश्रा ने सरस्वती प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित किया। इस दौरान उत्सव समिति के भानुप्रताप सिंह ठाकुर, विक्रम बुंदेला व अवधेश नायक समेत अन्य लोग मौजूद थे। स्थानीय कलाकारों विक्की सेन व मनीष श्रीवास्तव ने भी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत में सुनील पॉल के साथ भोपाल से आए अंकित सिसोदिया ने 50 फिल्मी कलाकारों की आवाज व वाहनों की आवाज निकालकर लोगों को जमकर गुदगुदाया। कार्यक्रम का संचालन कपिल मुडिय़ा व जगत शर्मा ने किया।

जॉनी वॉकर मेरे प्रे्ररणा स्त्रोत
प्रस्तुति देने पहुंचे कॉमेडियन सुनील पॉल ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि फिल्मी हास्य कलाकार जॉनी वॉकर उनके प्रे्ररणा स्त्रोत हैं। उन्हीं को देखकर मुझे कॉमेडी करने की इच्छा हुई है। बचपन में गरीबी में दिन काटने वाले सुनील ने बताया कि जब वे दस साल के थे तभी से लोगों को हंसाने की इच्छा हुआ करती थी पर उस वक्त उन्हें ऐसा करने का मौका मिला न ही वक्त। एक निजी होटल में मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने बताया कि परिवार की माली हालत इतनी खराब थी कि उन्हें पढऩे-लिखने का मौका भी नहीं मिला। यही वजह रही कि वे केवल दसवीं तक की पढ़ाई कर सके। उन्होंने कहा कि ये तो मेरा सौभाग्य है कि जनसंपर्क मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा की वजह से मुझे मां पीतांबरा की नगरी में आने का मौका मिला। उन्होंने भविष्य के बारे में बताया कि जल्द ही दो फिल्में आने वाली हैं । उनमे उनका अहम रोल है।