
जीएसटी विभाग की ओर से ग्वालियर के फिटनेस क्लबों की जांच-पड़ताल नहीं की जा रही है।
ग्वालियर. शहर में बॉडी बनाने के नाम पर फिटनेस क्लबों में हर महीने लाखों का कारोबार हो रहा है, लेकिन टैक्स के मामले में कई क्लब संचालकों की ‘फिटनेस’ सवालों के घेरे में है। 30 से ज्यादा बड़े फिटनेस क्लबों में रोजाना 150 से 200 सदस्य पहुंच रहे हैं। फीस 1500 से 3000 रुपए महीना है। इसके अलावा पर्सनल ट्रेनिंग, डाइट प्लान और सप्लीमेंट के नाम पर अलग कमाई हो रही है। इसके बावजूद कई क्लबों के कागजों में सालाना टर्नओवर 15 से 18 लाख रुपए के आसपास ही बताया जा रहा है। सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता के साथ फिटनेस कारोबार अब जीएसटी विभाग की निगाह में भी है। हाल ही में सीजीएसटी भोपाल की निवारक शाखा ने कई बड़े फिटनेस क्लबों में एक करोड़ रुपए से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा करते हुए कार्रवाई की है। इसके बाद ग्वालियर के क्लब भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
रोज 200 सदस्य, कमाई लाखों में
एक औसत क्लब में रोजाना 150 से 200 सदस्य आने का दावा है। यदि मासिक फीस 1500 से 3000 रुपए मानें तो सदस्यता से ही हर महीने करीब 3 से 6 लाख रुपए की आय बनती है। यानी सालाना 36 से 72 लाख रुपए। पर्सनल ट्रेनिंग और अन्य सेवाओं की कमाई अलग।
कैश में फीस, कागजों पर कम सदस्य
सूत्रों के मुताबिक, कथित खेल दो स्तर पर चल रहा है। एक ओर सदस्यता शुल्क का बड़ा हिस्सा कैश में लिया जाता है और हर भुगतान की रसीद नहीं दी जाती। दूसरी ओर रिटर्न में सदस्यों की वास्तविक संख्या और कारोबार कम दर्शाने की बात सामने आ रही है। कई क्लबों में ग्राहकों का व्यवस्थित रजिस्टर या एंट्री रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराया जाता।
30 क्लबों पर बन सकता है बड़ा टैक्स
जीएसटी जानकारों के मुताबिक, यदि 30 क्लबों का औसत सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए भी माना जाए तो कुल कारोबार करीब 12 करोड़ रुपए बैठता है। इस पर 5 फीसदी जीएसटी करीब 60 लाख रुपए बनता है। वास्तविक टर्नओवर इससे अधिक होने पर देनदारी भी बढ़ेगी।
ग्वालियर में सर्वे का इंतजार
भोपाल में कार्रवाई के बाद ग्वालियर के फिटनेस क्लबों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कारोबारी गतिविधियों और घोषित टर्नओवर के बीच अंतर की जांच के लिए विभागीय सर्वे की जरूरत महसूस की जा रही है।
ईमानदारी से टैक्स फाइलिंग जरूरी
हर फिटनेस क्लब संचालक को इनवॉइसिंग सॉफ्टवेयर और रिकॉर्ड अपडेट रखना चाहिए। 20 लाख रुपए से अधिक टर्नओवर होने पर लागू नियमों के अनुसार जीएसटी की देनदारी का पालन करना जरूरी है। इससे भविष्य में ब्याज, जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकता है। जिम सर्विसेज पर जीएसटी दर में कमी का लाभ ग्राहकों को भी मिला है।
Updated on:
08 Oct 2026 11:25 am
Published on:
08 Oct 2026 11:25 am
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