7 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अब जीएसटी का हर अहम पत्र बोलेगा-‘मैं असली हूं…’

जीएसटी विभाग के नाम से आने वाला कोई पत्र असली है या फर्जी, अब करदाता को अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग ने विभागीय पत्राचार को सुरक्षित और पारदर्शी ..
2 min read
Google source verification
जीएसटी विभाग

ग्वालियर. जीएसटी विभाग के नाम से आने वाला कोई पत्र असली है या फर्जी, अब करदाता को अंदाजा लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग ने विभागीय पत्राचार को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (डीआइएन) और क्यूआर कोड आधारित नई व्यवस्था लागू कर दी है। 1 अक्टूबर 2026 से लागू इस व्यवस्था में निर्धारित विभागीय पत्रों की अपनी डिजिटल पहचान होगी। करदाता मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर पत्र की प्रामाणिकता जांच सकेगा।

फर्जी नोटिस दिखाकर डराना होगा मुश्किल

अब केवल विभाग का नाम, मुहर या अधिकारी के हस्ताक्षर वाला पत्र दिखाकर करदाता को भ्रमित करना आसान नहीं होगा। डीआइएन और क्यूआर कोड के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि दस्तावेज वास्तव में विभागीय सिस्टम से जारी हुआ है या नहीं। इससे फर्जी नोटिस, गलत पत्राचार और विभाग के नाम के दुरुपयोग पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

एक स्कैन में खुलेगा पत्र का सच

करदाता को पत्र पर दिए क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करना होगा। इसके बाद मध्यप्रदेश कर विभाग के पोर्टल पर डीआइएन का सत्यापन किया जा सकेगा। सत्यापन में डीआइएन के साथ जीएसटीआइएन, करदाता या प्राप्तकर्ता का नाम, जारी करने वाला कार्यालय और डिस्पैच की तारीख जैसी जानकारी सामने आएगी। यानी हाथ में आए पत्र और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान कुछ ही क्षण में किया जा सकेगा।

एक नंबर में छिपी होगी पत्र की पूरी पहचान

नई व्यवस्था में जीएसटी पंजीकृत करदाता को पत्र जारी करते समय विभाग के कॉरेस्पॉन्डेंस मॉड्यूल में उसका जीएसटीआइएन दर्ज किया जाएगा। सिस्टम इससे करदाता का नाम, पैन, सर्किल, कार्यालय या डिवीजन, जिला, राज्य और पिन कोड जैसी जानकारी स्वत: लेगा। अधिकारी पत्र की पीडीएफ तैयार कर उसे डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित करेंगे। पीडीएफ अपलोड होते ही सिस्टम यूनिक डीआइएन और क्यूआर कोड तैयार करेगा। यही डीआइएन उस दस्तावेज की डिजिटल पहचान बनेगा।

बिना जीएसटी नंबर वाले व्यक्ति भी दायरे में

यह व्यवस्था केवल पंजीकृत करदाताओं तक सीमित नहीं है। अनरजिस्टर्ड डीलर या अन्य व्यक्ति को भेजे जाने वाले निर्धारित पत्रों में नाम, पूरा पता, जिला, राज्य और पिन कोड दर्ज कर डिजिटल हस्ताक्षर के बाद डीआइएन और क्यूआर कोड जनरेट किया जाएगा। वैधानिक कार्यवाही, प्राधिकरण पत्र तथा ई-ऑफिस से जारी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया है।

भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी

निर्धारित दस्तावेजों पर डिजिटल पहचान और क्यूआर कोड होने से करदाता पत्र की वास्तविकता आसानी से जांच सकेंगे। इससे विभाग के नाम पर होने वाले फर्जी पत्राचार और भ्रम की स्थिति को रोकने में मदद मिलेगी।
अनय द्विवेदी, आयुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग, मप्र