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Sawan 2021 नदी से निकली थी पिंडी, एक रात में तैयार हो गया मंदिर

ग्वालियर-चंबल इलाके में शैव परंपरा के अनेक प्राचीन मंदिर हैं. इन्हीं में से एक है धूमेश्वर महादेव मंदिर

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Gwalior Dhumeshwar Mahadev Mandir Gwalior Dhumeshwar Mahadev Temple

Gwalior Dhumeshwar Mahadev Mandir Gwalior Dhumeshwar Mahadev Temple

ग्वालियर. ग्वालियर-चंबल इलाके में शैव परंपरा के अनेक प्राचीन मंदिर हैं. इन्हीं में से एक है धूमेश्वर महादेव मंदिर. यह मंदिर डबरा से करीब 27 किमी और भितरवार से करीब 12 किमी दूर सिंध और पार्वती नदी के संगम स्थल पर स्थित है. यहां के शिवलिंग का उदगम नदी से ही माना जाता है. इतिहासकारों का मानना है कि मंदिर में भगवान शिव की जो पिंडी है वह नदी से निकली है जिसकी गहराई आज तक कोई माप नहीं पाया है.

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यह मंदिर अनेक ऐतिहासिक गाथाएं संजोए हुए हैं. कहते हैं कि ओरछा नरेश वीरसिंह जू ने इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में करवाया था. धूमेश्वर मंदिर के चारों ओर कलकल बहता झरना इस स्थान को और मनमोहक बनाता है. इसके नाम को लेकर भी एक बात प्रचलित है. कहते हैं सिंध नदी का पानी काफी ऊपर से झरने के रूप में गिरता है. पानी की यह धार धुएं के रूप में प्रतीत होती है. इसलिए इसे धूमेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है.

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सिंधिया राजवंश ने कराया जीर्णोद्धार
महंत अनिरुद्ध महाराज बताते हैं कि यह मंदिर पहले नागवंशीय शासकों द्वारा बनवाया गया था. यह मंदिर नरबलि के लिए प्रसिद्ध था. बताते हैं कि मुगल शासकों ने मंदिर नष्ट कर दिया था. बाद मे ओरछा नरेश वीरसिंह ने एक ही रात में मंदिर का निर्माण कराया. जीर्णोद्धार 1936 में ग्वालियर नरेश जीवाजी राव सिंधिया के कार्यकाल में किया गया.