12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

नॉर्थ चैनल पार करने वाले देश के पहले पैरा स्विमर हैं सतेंद्र सिंह

satyendra singh lohiya interview- कभी निराश थे जीवन से, ठान लिया तो नार्थ चैनल को भी कर लिया पार

3 min read
Google source verification
satyendra1.png

ग्वालियर. इरादे मजबूत हों तो इंसान कुछ भी कर सकता है। यह कर दिखाया है अंतरराष्ट्रीय पैरा स्विमर सतेंद्र सिंह लोहिया (satyendra singh lohiya) ने। उन्होंने हाल ही में आयरलैंड में 36 किमी लम्बे नॉर्थ चैनल को 14 घंटे 39 मिनट में पार कर रेकॉर्ड बनाया है। वह देश के पहले पैरा स्विमर हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। वह पैरालिम्पिक और वर्ल्ड स्विमिंग चैम्पियनशिप में कई पदक हासिल कर चुके हैं। एक समय था जब पैरों में खराबी आ जाने से वह निराश हो गए थे, लेकिन फिर अपने मन को मजबूत किया और अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बनाकर वर्ल्ड रेकॉर्ड तक पहुंच गए। उनकी इस उपलब्धि पर पत्रिका ने उनसे बातचीत की।

Q. आज आप अंतरराष्ट्रीय पैरा स्विमर हैं। शुरूआती सफर कैसा रहा?

a. बचपन संघर्षों में गुजरा, परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पढ़ाई के लिए पिताजी ने घर और जमीन बेच दी थी। 2007 में बीएससी का फॉर्म भरा, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई नहीं कर पाया। बाद में एक निजी कॉलेज से बीए किया। पापा सिक्योरिटी गार्ड थे, जिससे घर मुश्किल से चलता था। हालातों को देखते हुए एक कंपनी में मैंने भी 1 महीने काम किया।

Q. आपकी स्विमिंग में दिलचस्पी कैसे हुई?

a. हम चार भाई हैं। मैं जब 10-12 साल का था तब किसी चीज के रिएक्शन से मेरे पैर खराब हो गए। इससे मैं बहुत निराश था, लेकिन मैंने अपनी विकलांगता को भूलकर मन को मजबूत किया। मेरे गाता गांव (भिंड ) में बेसली नदी है, मुझे तैरने का बहुत शौक था। मैं नदी में तैरता तो गांव वाले चिल्लाते थे, ये अपाहिज है नदी में इतनी फुर्ती से तैरता है, इसको चोट लग जाएगी, लेकिन मैंने किसी की नहीं सुनी।

Q. तैराकी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे पहुंचे?

a. पिताजी के एलएनआइपीई में गार्ड होने के कारण मैं अक्सर उनके साथ वहां जाता था। वहां प्रोफेसर बीके डबास की नजर मुझ पर पड़ी। वे उस समय विकलांग बच्चों को ट्रेनिंग देते थे। वहां मेरे पैरों की थेरेपी की गई। उसके बाद जिले से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक समां बंधता चला गया।

Q. कई खिताब आपने अपने नाम किए हैं, कभी निराशा भी हाथ लगी?

a. शुरुआत में राज्य स्तर के खेलों में पीछे रह जाता था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। मेरा सपना था इंग्लिश चैनल पार करने का, शुरुआत में कामयाबी नहीं मिली। प्रयास करता रहा और 2019 में कैथलीना चैनल पार किया। 20 सितंबर-22 को नॉर्दर्न आयरलैंड और स्कॉटलैंड के बीच के पास नार्थ चैनल पार किया। इसका टेम्प्रेचर 10 से 12 डिग्री रहता है।

Q. अपनी कामयाबी का श्रेय किसे देते हैं?

a. माता-पिता और कोच डबास सर और रोहन मौर्य ने हर मुश्किल परिस्थिति में मेरा साथ दिया। आज इस मुकाम तक पहुंचा हूं, तो उनका बड़ा योगदान है।

Q. पुरस्कार मिलने की शुरूआत कब से हुई?

संबंधित खबरें

a. जिला स्तर पर कई पुरस्कार मिले। 2009 में पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। अब तक 25 राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। 3 दिसंबर-2019 को विश्व दिव्यांगता दिवस के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सर्वश्रष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी का खिताब दिया। मार्च 2020 में प्रधानमंत्री ने सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी के खिताब से सम्मानित किया। 2020 में राष्ट्रपति ने तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कार से नवाजा। मैं पहला दिव्यांग हूं, जिसे यह अवार्ड मिला।

Q.सरकार से किस तरह की मदद मिली?

a. तेनजिंग अवार्ड के समय सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 15 लाख की सहयता दी। इंग्लिश चैनल पार किया तो 10 लाख रुपए भारत सरकार ने दिए। कैटलीना चैनल पार करने पर 6 लाख रुपए मिले। मैं अभी कमर्शियल सेल्स टैक्स इंदौर में पदस्थ हूं। इंदौर रहता हूं और ग्वालियर आता- जाता रहता हूं। वाणिज्यिक विभाग में हमारे कमिश्नर लोकेश जाटव बहुत मदद करते हैं।

Q. आगे का विजन क्या है?

a. मैं अब सेवन ओसियन पार करना चाहता हूं और ओलम्पिक में गोल्ड लाने प्रयास करता रहूंगा। एक अकादमी खोलना चाहता हूं, जहां उन दिव्यांग बच्चों को सीखने का मौका मिलेगा, जिन्हें प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता है। ग्वालियर में भी कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जो दिशाहीन हैं, उनकी भी मदद करना चाहता हूं।