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तीन साल से रखा था गोदाम में खाद, पत्थर बन गया, किसान होते रहे परेशान

बरोठा स्थित जिला विपणन संघ के गोदाम में आज भी रखे हैं 56 हजार बैग।
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ग्वालियर

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monu sahu

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Updated: 4 Dec 2017, 12:07 AM IST

Kept for three years in the godown became man became a stone farmer

ग्वालियर. जिला विपणन संघ के सरकारी गोदाम में तीन साल से २८ सौ टन यूरिया और डीएपी रखे-रखे खराब हो गया मगर इसे किसानों को नहीं बांटा गया। इसकी कीमत करीब 3 करोड़ रुपए बताई गई है। वर्तमान में सीलन के कारण हजारों बोरियों में में पत्थरनुमा गांठें पड़ गईं। इससे किसान भी इन्हें नहीं ले रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर बाजार में वर्तमान में डीएपी की मांग बढऩे से ५० से १०० रुपए महंगा बिक रहा है और किसान परेशान है।

बरोठा स्थित जिला विपणन संघ के गोदाम में पिछले तीन साल से करीब २८ सौ टन खाद रखा हुआ है। इसमें १३ सौ टन डीएपी और करीब १५ सौ टन यूरिया की करीब ५६ हजार बोरियां रखी हुई है वर्तमान में कई बोरियां खराब हो चुकी है। पत्रिका ने गोदाम में पहुंचकर तीन साल से रखी बोरियों को जायजा लिया तो अधिकतर बोरियों में पत्थरनुमा गांठें पड़ चुकी है जिससे कुछ बोरियां पत्थर का रुप लेने से खराब हो चुकी है। बताया गया है कि जो किसान पहुंचता भी है उन्हें देने से पहले बोरियों में पड़ी गठन को डण्डें मारकर सही करते है जिससे किसान पुराना खाद होने की वजह से नहीं ले रहा है। गोदाम प्रभारी भी इस बात को स्वीकार करते हुए कहते है कि अब किसान खाद को पुराना बताकर नहीं ले रहा है।
गुणवत्ता पर भी पड़ रहा असर : तीन साल से खाद के रखे होने से उसकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। जिससे फसल को भी नुकसान हो सकता है। इस संबंध में कृषि विशेषज्ञ एसडीओ आरपीएस गुर्जर ने बताया कि दो साल में ही खाद की गुणवत्ता कमजोर हो जाती है। ढेले पडऩे से खाद खराब होती है। ७० फीसदी गुणवत्ता कमजोर हो जाती है।

्क्यों रखा रह गया गोदाम: कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक समय तक खाद के रखने से उसकी गुणवत्ता पर असर पडऩे से खराब हो जाती है। सवाल यह उठता है कि तीन साल से सरकारी गोदाम से खाद की बिक्री क्यों नहीं की गई सोसायटियों को उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया। जिसके पीछे संघ और कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ब्लॉक की सभी सोसायटियां ओवर ड्यू है जिस कारण सोसायटियों को खाद का वितरण दो साल से नहीं किया गया।
इनदिनों गेहूं की बुवाई के दौरान डीएपी खाद की आवश्यकता पडऩा शुरू हो गई है। जिससे बाजार में मांग बढऩे से निर्धारित मूल्य १०७६ डीएपी खाद और यूरिया खाद ५० से १०० रुपए महंगी बिक रही है। क्योंकि वर्तमान में रैक भी नहंी आई है जिससे खाद की मारामारी शुरू हो गई है।

डिफाल्टर है ब्लॉक की 22 सोसाइटियां
ब्लॉक में २२ सोसायटियां है लेकिन किसी भी सोसायटियों से खाद का वितरण नहीं किया जा रहा है जिससे परेशानी और बढ़ी हुई है। कृषि विभाग के मुताबिक वर्तमान में सभी सोसायटियां डिफॉल्टर हैं। कृषि विभाग भी खाद का वितरण नहीं कर रही है।


१० दिन पहले डीएपी खाद १०४० रुपए में खरीदी गई थी और दो दिन पहले खरीदने पर दुकानदान ने १०९० रुपए के भाव से खाद दी गई है। वर्तमान में बुवाई के दौरान डीएपी की खाद की आवश्यकता पड़ती है।
भरत रावत, किसान

सोसायटियों के डिफाल्टर होने के कारण वरिष्ठों के आदेश पर खाद नहीं दी गई है। हालांकि फिर भी आदेशानुसार २० टन यूरिया और ३० टन डीएपी खाद दी गई है लेकिन सोसाटियों द्वारा नगद में खाद दिए जाने से किसान वहां से भी खाद नहीं उठा रहा है। कई बोरियों में खाद सख्त हो गई है। इससे किसान खाद नहीं ले रहा है।
गोपाल कृष्ण श्रीवास्तव, गोदाम प्रभारी मार्फेड डबरा

गुणवत्ता पर असर नहीं पड़ा है पिछले साल सैंपल लेकर जांच कराई गई थी जो कि पास हुई है। सिर्फ सीलन के कारण ढ़ेले पड़ गए है। सोसायटियों में नहंी पहुंचने से और बाजार में भी पर्याप्त खाद होने की वजह से वहां कोई नहंी पहुंचा।
बीके मिश्रा, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी डबरा

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