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ग्वालियर। वैश्य मतदाताओं की बहुलता वाले भिण्ड नगर के वैश्य समाज द्वारा भिण्ड विधानसभा सीट से उम्मीदवारी की जाएगी। भिण्ड विधानसभा क्षेत्र में वैश्य समाज की जैन, गुप्ता, अग्रवाल, शिवहरे, सोनी आदि जातियों के लगभग 60 हजार से ज्यादा मतदाता हैं। इनमें से जैन मतदाता सबसे ज्यादा लगभग २५ हजार हैं। वैश्य वर्ग को अक्सर राजनीतिक दल टिकट देने से बचते रहे हैं। हाल में ही वैश्य समाज द्वारा आयोजित की गई बैठकों मेंं तय किया गया है कि विधानसभा चुनाव में भिण्ड सीट से वैश्य समाज का एक सर्वमान्य प्रत्याशी खड़ा किया जाए।
अगर समाज का कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक दल से टिकट लाता है तो उसे मिलकर सपोर्ट किया जाए ताकि समाज की एकजुटता व वोटिंग पॉवर जाहिर हो सके जिसके आधार पर भविष्य में भिण्ड नगर निगम में महापौर के चुनाव में दावेदारी की जा सके। वैश्य समाज की इन बैठकों में कांग्रेस व भाजपा के आधा दर्जन बड़े वैश्य नेताओं ने भी भागीदारी की है।
लगभग आधा दर्जन संभावित प्रत्याशियों के नाम भी इन बैठकों में तय किए गए हैं। यहां बताना जरूरी होगा कि १९७२ में भिण्ड विस सीट से पहली बार गुजराती वैश्य नवीनन्द्र भूता विधायक बने थे। उनके बाद से अब तक कोई वैश्य प्रत्याशी विधायक नहीं बन पाया। भिण्ड शहरी क्षेत्र में वैश्य समुदाय की बहुलता है। इसी वजह से भिण्ड नगर पालिका में समय-समय पर वैश्य समाज का अध्यक्ष बनता रहा है।
मप्र के गठन के बाद भिण्ड नपा के पहले अध्यक्ष वैश्य समाज के हरिकिशनदास जाधव भूता बने थे तत्पश्चात् डॉ स्वरूपचन्द्र जैन, डॉ उत्तमचंद्र जैन, रामस्वरूप जैन केप्टन, प्रभूदयाल गुप्ता अध्यक्ष बने। नगर पालिका में आखिरी वैश्य अध्यक्ष १९९० के दशक में रवीसेन जैन बनाए गए थे। इसके बाद कोई वैश्य वर्गका कोई व्यक्ति नगर पालिका में अध्यक्षी नहीं कर पाया।
Updated on:
25 Oct 2018 07:36 pm
Published on:
25 Oct 2018 07:36 pm
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