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इस अधिकारी ने High Court से ही कर डाली धोखाधड़ी, ऐसे आया पकड़ में

यह कृत्य धोखा देने के साथ ही गुमराह करने तथा न्यायिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करने वाला है
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ग्वालियर

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monu sahu

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Updated: 21 Apr 2018, 7:54 PM IST

High Court Gwalior

ग्वालियर। मध्यप्रदेश में प्रतिबंधित विदेशी शराब के ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पकड़े जाने के मामले में आरोपियों को बचाना सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुनील दत्त भट्ट को भारी पड़ गया है। उच्च न्यायालय ने सुनील दत्त भट्ट द्वारा आरोपी को लाभ दिलाने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज छिपाए जाने के कृत्य को प्रथम दृष्टया न्यायालय के साथ धोखाधड़ी माना है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि भट्ट का यह कृत्य धोखा देने के साथ ही गुमराह करने तथा न्यायिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करने वाला है।

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न्यायमूर्ति जीएस अहलुवालिया ने आबकारी एक्ट के तहत आरोपी बनाए गए पवन कुमार के मामले में उक्त महत्वपूर्ण आदेश देते हुए सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुनील दत्त भट्ट के खिलाफ उनके द्वारा प्रकरण से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज केस डायरी में नहीं लगाए जाने पर प्रकरण दर्ज करने के आदेश देते हुए नोटिस जारी किया है क्यों न उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना का प्रकरण चलाया जाए।

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न्यायालय ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि जो दस्तावेज सीधे सुनील दत्त भट्ट को प्राप्त हुए थे उन्होंने उन दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं किया। यह दस्तावेज अग्रिम जमानत का आवेदन लेकर न्यायालय में आए आरोपी के खिलाफ थे। इन दस्तावेजों को अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय में प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सुनील दत्त भट्ट की ही थी।

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हरियाणा सरकार के दस्तावेजों को छुपाया
न्यायालय ने कहा कि यह स्पष्ट है कि सुनील दत्त भट्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा उन दस्तावेजों को न्यायालय में पेश नहीं किया जिसमें कहा गया कि सक्षम बेवरी प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा के अलावा अन्य किसी राज्य में शराब को बेचने के लिए अधिकृत नहीं है। इस संबंध में विभिन्न अधिकारियों द्वारा भट्ट से ही पत्राचार किया गया था।

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शराब की बोतल फूटने पर पता चला की रेल से भेजी जा रही थी शराब
इंदौर के एक होटल को ९६० बॉटल इंग्लिश शराब सक्षम बेवरी हरियाणा से खरीदने की परमिशन आबकारी विभाग द्वारा दी गई थी। इसके लिए परमिट भी जारी किया गया था। यह शराब हबीबगंज से रेल के द्वारा इंदौर भेजी जा रही थी। जबकि रेल के जरिए यह शराब भेजी जानी प्रतिबंधित थी। शराब भेजे जाने के दौरान कुछ बोटलों के फूटने से पता चला कि बुक किए गए सामान में शराब भेजी जा रही है।

इस पर रेलवे के चीफ पार्सल सुपरवाइजर ग्वालियर ने शिकायत करते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन कर शराब भेजी गई है। ११ मार्च १७ को ग्वालियर में जब इसकी जांच की गई तो पता चला यह नियम विरुद्ध शराब भेजी जा रही थी। इस पर आरोपीगण के खिलाफ आबकारी एक्ट की विभिन्न धाराओं में ग्वालियर में मामला दर्ज किया गया था।

जांच में पता चला था कि सक्षम बेवरी को विदेशी शराब हरियाणा से बाहर भेजने का अधिकार ही नहीं था। इस पर सक्षम ब्रेवरी के पवन कुमार व अन्य को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद पवन कुमार ने अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की थी जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया।

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