
अटल सभागार में आतंकी हमले का मॉक ड्रिल (Photo Source- Patrika Input)
Mock Drill : अगर आतंकी हमला हो जाए तो हालात से कैसे निपटना है, इसका जीवंत अभ्यास बुधवार रात मध्य प्रदेश के ग्वालियर में देखने को मिला। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की 140 कमांडो की टीम ने पुलिस, प्रशासन और आपात सेवाओं के साथ मिलकर हाई इंटेंसिटी मॉकड्रिल की। इस दौरान अटल सभागार और स्टेशन बजरिया स्थित मॉल में आतंकी हमले का वास्तविक दृश्य रचा गया, जिसमें वीआईपी और आम नागरिकों को बंधक बनाए जाने की स्थिति दिखाई गई। मॉक ड्रिल के दौरान रेलवे स्टेशन के पास देर रात तक खुलने वाले रेस्टोरेंट और दुकानें भी पुलिस ने कराईं बंद, कई जगह लोगों और कार चालकों को रोका भी गया।
मॉक ड्रिल से पहले एनएसजी टीम ने कलेक्टोरेट में प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा, फायर ब्रिगेड, पीडब्ल्यूडी और अन्य एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक की। एनएसजी अधिकारियों ने बताया कि किसी भी आतंकी हमले में सबसे पहला सामना स्थानीय पुलिस को करना होता है। हालात बिगड़ने पर काउंटर टेररिस्ट स्क्वॉड और अंत में एनएसजी को बुलाया जाता है, जो देश में कहीं भी दो घंटे के भीतर पहुंचकर ऑपरेशन शुरू कर सकती है।
बैठक के बाद देर शाम मॉक ड्रिल की शुरुआत हुई। पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि अटल सभागार में एक बड़े राजनेता का कार्यक्रम चल रहा है, तभी आतंकी अंदर घुस आए हैं। आतंकियों ने वीआईपी सहित लोगों को बंधक बना लिया और गोलीबारी में कुछ लोग घायल हो गए, जिन्हें बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा।
सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय सर्किल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सभागार को घेर लिया। हालात काबू में न आने पर काउंटर टेररिस्ट ग्रुप ने मोर्चा संभाला, लेकिन कुछ जवान घायल हो गए। इसके बाद प्रशासन ने एनएसजी को बुलाया। ऑपरेशन से पहले मनोचिकित्सकों की टीम ने आतंकियों से बातचीत की कोशिश की, लेकिन शर्तें पूरी न होने पर एनएसजी कमांडो ने सभागार में प्रवेश किया। करीब चार घंटे चले ऑपरेशन में आतंकियों को ढेर कर वीआईपी सहित सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया।
अटल सभागार ऑपरेशन के तुरंत बाद सूचना मिली कि स्टेशन बजरिया स्थित मॉल में भी आतंकी घुस गए हैं। एनएसजी टीम वहां पहुंची, पूरे इलाके की बिजली बंद कराई गई और आम आवाजाही रोकी गई। देर रात तक दूसरा ऑपरेशन जारी रहा।
एनएसजी ने बताया कि आतंकी हमले की स्थिति में पुलिस सबसे पहले क्षेत्र को सील करेगी, घायलों के लिए मेडिकल और फायर टीम पहुंचेगी। यदि पुलिस असफल रहती है तो एटीएस और अंत में एनएसजी मोर्चा संभालती है। एनएसजी को बुलाने से पहले प्रशासन को इलाके का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार करना होता है।
Updated on:
05 Feb 2026 11:25 am
Published on:
05 Feb 2026 10:42 am
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