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हनुमानगढ़ में पंजीयन के बाद सैंपल देने के लिए नहीं आने वाले बढ़ा रहे परेशानी

हनुमानगढ़. कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण का प्रसार बढऩे से वैसे ही चिकित्साकर्मियों के पास काम का बोझ ज्यादा है। ऊपर से लोगों की उदासीनता व लापरवाही समस्या को और ज्यादा बढ़ा रही है।
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हनुमानगढ़

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Adrish Khan

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Updated: 24 May 2021, 8:01 PM IST

हनुमानगढ़ में पंजीयन के बाद सैंपल देने के लिए नहीं आने वाले बढ़ा रहे परेशानी

हनुमानगढ़ में पंजीयन के बाद सैंपल देने के लिए नहीं आने वाले बढ़ा रहे परेशानी

हनुमानगढ़ में पंजीयन के बाद सैंपल देने के लिए नहीं आने वाले बढ़ा रहे परेशानी
- कोरोना सैंपल के लिए पंजीयन के बाद भी लोगों के गैर हाजिर रहने से समस्या
- सैंपल कलेक्शन साइट पर पीपीई किट पहने लैब तकनीशियन को होती है दिक्कतें
हनुमानगढ़. कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण का प्रसार बढऩे से वैसे ही चिकित्साकर्मियों के पास काम का बोझ ज्यादा है। ऊपर से लोगों की उदासीनता व लापरवाही समस्या को और ज्यादा बढ़ा रही है। कोरोना जांच के लिए सैंपल देने में बरती जा रही सुस्ती इसका उदाहरण है। इसका खमियाजा भीषण गर्मी में पीपीई किट पहनकर ड्यूटी कर रहे कोरोना वॉरियर्स लैब तकनीशियन को झेलनी पड़ रही है। लैब तकनीशिनों की माने तो पंजीयन कराने वालों में से हर दिन 20 से 25 प्रतिशत लोग सैंपल देने नहीं पहुंचते हैं।
कोरोना जांच को लेकर लोगबाग पंजीयन कराने के बावजूद सैंपल देने नहीं पहुंचते। जिले में स्थाई रूप से संचालित कोरोना सैंपल संग्रहण केन्द्रों में से लगभग सभी पर हर दिन दर्जनों ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। इससे लैब तकनीशियन को परेशानी झेलनी पड़ती है। क्योंकि पूर्व पंजीयन के आधार पर वे पंजीकृत लोगों के सैंपल लेने का इंतजार करते रहते हैं। ऐसे में उनको निर्धारित से अधिक समय तक सैंपल संग्रहण के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है। एक तो इससे लैब तकनीशियन का महत्वपूर्ण समय व्यर्थ ही खराब होता है। इसके अलावा भीषण गर्मी के इस माहौल में पीपीई किट पहनकर प्रतीक्षा करनी बहुत मुश्किल होती है। ऐसे में जरूरी है कि जो लोग पंजीयन करवाते हैं, वे निर्धारित समय पर आवश्यक रूप से पहुंचकर सैंपल देवे ताकि किसी को कोई परेशानी नहीं उठानी पड़े।


सूचना के बावजूद नहीं आते
राजस्थान लैब तकनीशियन व रेडियोग्राफर संयुक्त कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव प्रदीप शाक्य बताते हैं कि पंजीयन के बावजूद औसतन 25 प्रतिशत लोग सैंपल देने नहीं आते। यह कमोबेश लगभग हर दिन की स्थिति रहती है। नियंत्रण कक्ष की ओर से पंजीकृत लोगों को सूचना भी दी जाती है। इसके बावजूद सैंपल देने सेंटर पर नहीं पहुंचते। इसका दुष्प्रभाव यह रहता है कि लैब तकनीशियन एवं अन्य चिकित्साकर्मियों पर अनावश्यक वर्क लोड बढ़ता है। इसलिए जरूरी है कि संक्रमण संकट के इस दौर में जनता अपने दायित्व समझे। लैब तकनीशियन एवं अन्य चिकित्साकर्मियों पर वैसे ही कार्य का बोझ अधिक है। अत: आमजन सहयोग करे ताकि हम सब मिलकर कोरोना को हरा सके।


इधर, राहत का प्रयास
कोरोना संकट में कार्यभार बढऩे से परेशान चिकित्साकर्मियों को चिकित्सा विभाग ने राहत देने का प्रयास किया है। जिले में अस्थाई तौर पर 69 नर्सिंगकर्मियों एवं लैब तकनीशियन की नियुक्ति की गई है। सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि जिले में 35 एएनएम, 14 जीएनएम एवं 20 लैब तकनीशियन यूटीबी के आधार पर अस्थाई नियुक्ति दी गई है। नव नियुक्त स्टाफ को कोविड संक्रमितों के उपचार, जांच आदि कार्यों में लगाया जाएगा। इस संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी किए गए थे।