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नहीं कोई परवरिश करने वाला, अनाथ बहनों की पालनहार की राशि भी बंद

हनुमानगढ़. एक साल के भीतर ही मां-बाप का साया सिर से उठने के बाद जैसे-तैसे जिंदगी गुजार रही मानकसर निवासी तीन यतीम बहनों की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।
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हनुमानगढ़

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Adrish Khan

•

Updated: 26 Jun 2021, 11:01 AM IST

नहीं कोई परवरिश करने वाला, अनाथ बहनों की पालनहार की राशि भी बंद

नहीं कोई परवरिश करने वाला, अनाथ बहनों की पालनहार की राशि भी बंद

नहीं कोई परवरिश करने वाला, अनाथ बहनों की पालनहार की राशि भी बंद
- जमीन पर विवाद, एसपी तक गुहार पहुंचाने में आया पसीना
- तीन अनाथ बहनों को लेकर एसपी के पास पहुंचे पीड़ा बताने
- एसपी ने संगरिया डीएसपी को दिया कार्रवाई का निर्देश
हनुमानगढ़. एक साल के भीतर ही मां-बाप का साया सिर से उठने के बाद जैसे-तैसे जिंदगी गुजार रही मानकसर निवासी तीन यतीम बहनों की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। राजस्थान पत्रिका के प्रयासों से पालनहार योजना के तहत आर्थिक मदद मिलनी शुरू हुई थी जो अब कई माह से बंद बताई जा रही है। इतना ही नहीं तीनों बहनों की माता की हिस्से की भूमि को लेकर विवाद है।
इसको लेकर थाना-तहसील हो गए हैं। इस संबंध में संगरिया थाने में मामला दर्ज है। मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर तीनों बच्चियों के साथ उसके मामा, मौसी व अन्य परिजन एसपी कार्यालय पहुंचे। हालांकि एसपी से मिलने के लिए उनको खूब पसीना बहाना पड़ा। एसपी बैठक में व्यस्त होने के कारण रीडर ने उनको बाद में आने का कह दिया। आखिरकार डेढ़ घंटे प्रतीक्षा के बाद बाल कल्याण समिति एवं मीडिया कर्मियों के सहयोग से एसपी तक सूचना पहुंचाई गई। एसपी प्रीति जैन को जैसे ही पता चला उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल बच्चियों एवं उनके अभिभावकों को चैम्बर में बुलाया। उनकी समस्या सुन संगरिया डीएसपी को मामले में शीघ्र कानूनी कार्यवाही का निर्देश दिया। एसपी को सौंपे ज्ञापन में बताया कि उनके हक हिस्से की भूमि पर कुछ लोग जबरन कब्जा करना चाहते हैं। वे हथियार आदि दिखाकर परिवार को डरा रहे हैं। इसको लेकर संगरिया थाने में मामला भी दर्ज कराया गया है।
गौरतलब है कि मजदूर माही खान (32) की टीबी रोग से 2018 के अंत में मौत हो गई। उसकी पत्नी मुरादा बेगम (30) ने भी नवम्बर 2019 में टीबी की बीमारी से दम तोड़ दिया। दंपती की मौत के बाद उनकी तीन बेटियां कुलसुमा (12), सानिया (8) व अल्लाहमाफी (3) मां-बाप के प्यार व दुलार से महरूम हो गई है। मामा इरशाद खान के भरोसे जीवन व्यतीत कर रही हैं। मंझली बहन सानिया दिव्यांग है। उसे बीमारी के कारण रीढ़ की हड्डी व पैरों में परेशानी है। एक साल के भीतर मां-बाप तो जाकर कब्र में लेट गए। पीछे 14 से 6 वर्ष के बीच की उम्र की तीन पुत्रियों की जिंदगी जहन्नुम सी हो गई। बच्चियों के ना तो दादा-दादी हैं और ना ही ननिहाल में नाना-नानी हैं।
तीन बहनें, एक दिव्यांग
माही खान व मुरादा बेगम के गुजरने के बाद पीछे रह गई उनकी तीनों पुत्रियों की परवरिश बड़ा सवाल बन गई है। उनके पालन-पोषण को लेकर कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं। फिलहाल लड़कियों का मामा इरशाद खान उनको संभाल रहा है।
मिल रहा था लाभ, अब बंद
राजस्थान पत्रिका ने जनवरी 2020 को 'अब कौन करेगा हमारे लिए दुआ, कौन देगा हौसलाÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मां-बाप के साये से महरूम बच्चियों के दर्द को बयां किया था। इसके बाद प्रशासन ने बालिकाओं को मदद पहुंचाने की कोशिशें शुरू की। इसके तहत सीएमएचओ डॉ. अरुण चमडिय़ा के निर्देश पर चिकित्सा विभाग की टीम ने टीबी आदि की शंका के दृष्टिगत बालिकाओं की जांच की। तत्कालीन कलक्टर जाकिर हुसैन के निर्देश पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों ने पालनहार आदि योजना का लाभ दिलाने की कवायद शुरू की। बच्चियों के मामा इरशाद ने बताया कि कई माह तक तो पालनहार योजना के तहत राशि मिली। मगर अब कई महीनों से कागजी प्रक्रिया के चलते राशि बंद है।