हनुमानगढ़. सहकारी बैंकों में मनमर्जी से ऋण वितरण के मामले लगातार आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई मामलों में तो ऋण वितरण के बाद ऋणी व्यक्ति ब्याज तो दूर मूलधन भी जमा नहीं करवा रहे। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन सहकारी बैंककर्मियों के हाथों में संस्था की तरक्की रूपी नाव की पतवार दी गई है, उनकी भूमिका भी कई मायने में संदिग्ध नजर आ रही है। ऐसे मामलों में तत्कालीन बैंक स्टॉफ की ओर से गई अनियमितता की जांच व ऋण वसूली को लेकर वर्तमान में बैंक प्रबंधन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में एक ताजा प्रकरण पीलीबंगा का सामने आया है। इसमें हनुमानगढ़ सहकारी भूमि विकास बैंक लिमिटेड की ओर से २२ नवम्बर २००६ को एक व्यक्ति को चार लाख रुपए का आवास ऋण वितरित कर दिया गया था। ऋण वितरण के बाद वसूली नहीं होने पर इसकी जांच की गई तो कुछ बैंक स्टॉफ की मिलीभगत भी सामने आई है। नियम विरुद्ध तरीके से ऋण वितरण करने के मामले में तत्कालीन शाखा सचिव, भूमि मूल्यांकन अधिकारी, ऋण शाखा प्रभारी आदि की भूमिका संदिग्ध होने पर अब वर्तमान में हनुमानगढ़ सहकारी भूमि विकास बैंक लिमिटेड के सचिव पीडी चारण ने प्रकरण की जांच करवाकर इसकी फाइल तैयार कर ली है। इसके बाद शाखा सचिव कृष्ण कुमार जांदू ने नियम विरुद्ध ऋण जारी करने वाले बैंक स्टॉफ व ऋणी किसान के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर जंक्शन थाने में परिवाद सौंपा है। इसमें कूटरचित तरीके से धोखाधड़ी कर बैंक को नुकसान पहुंचाने के आरोपी तत्कालीन शाखा सचिव व एलवीओ जगदीश गोदारा, ऋण शाखा प्रभारी नरोत्तमलाल, तत्कालीन बैंक सचिव बाबुलाल मीणा व ऋणी गुरदीप सिंह के विरुद्ध सक्षम धाराओं में मामला दर्ज कर दोषियों को दंडित करने की मांग की है।