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नवजात की मौत के बाद परिजन ने लगाए लापरवाही के आरोप, बोले इलाज करते तो बच सकती थी जान

सीएमएचओ बोले, डॉ.संध्या नेमा सहित तीनों शिफ्ट की नर्सों को दिए नोटिस, समिति करेगी जांच...

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हरदा. हरदा में बीती रात जिला अस्पताल में एक नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने इसके लिए डॉक्टर संध्या नेमा और स्टाफ नर्स के उपेक्षित रवैए को जिम्मेदार ठहराया। नवजात की मौत से गुस्साए परिजनों ने शनिवार रात से रविवार दोपहर व्यवस्था व स्टाफ की लापरवाही को लेकर विरोध जताया। परिजनों ने कलेक्टर को शिकायत की। अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस बुला ली। सीएमएचओ ने कहा कि डयूटी डॉ.संध्या नेमा से 48 घंटे में जवाब मांगा है। तीनों शिफ्टों की नर्सो को भी नोटिस दिया है। मामले की जांच के लिए समिति बनाई है। परिजनों ने कहा कि कार्रवाई नहीं हुई तो सीएम से शिकायत करेंगे।

सुबह से अनदेखी करतीं रहीं डॉक्टर
वार्ड 35 के उड़ा में रहने वाले मनीष मेहरा ने बताया कि उनकी भाभी जयंती को प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें जिला अस्पताल में शनिवार सुबह साढ़े 11 बजे भर्ती किया गया था। इस दौरान वहां पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संध्या नेमा ड्यूटी पर मौजूद थीं। लेकिन उन्होंने भाभी की जांच नहीं की। नर्स ने जांच कर डॉक्टर को बताया कि बच्चे की धड़कन कम, ज्यादा आ रही है। लेकिन यह सुनने के बाद भी डॉ. नेमा ने प्रसूता का चेकअप नहीं किया। दोपहर 12 बजे ऑपरेशन करने हवाला देकर चलीं गईं। इसके बाद प्रसूता दर्द से तड़पती रही,लेकिन स्टॉफ नर्स या डॉक्टर ने उनकी सुध नहीं ली।

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सरकारी डॉक्टर से सालभर घर कराया इलाज
मनीष ने बताया कि डिलवेरी से पहले से ही पूरा इलाज डॉ. नेमा से उनके घर पर कराया। उन्होंने जब-जब भी लिखा हर बार उन्हीं के बताए सोनोग्राफी सेंटर पर सोनोग्राफी कराई। महंगी दवाएं लीं। इंजेक्शन भी लगवाए। फिर भी अस्पताल में उन्होंने प्रसूता का दर्द नहीं समझा न ही महिला डॉक्टर होने के बाद भी मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। मनीष ने बताया कि रातभर अस्पताल में कई बार मिन्नतें की,लेकिन स्टाफ हीला हवाली करता रहा।मनीष ने कहा कि नर्सों से पांच-छह बार आग्रह करने पर अभद्र व्यवहार करते हुए प्रसूता की जांच की। उसने आगे कहा कि रात 9 बजे भाभी जयंती की ज्यादा तबियत बिगड़ गई थी। जिस पर हमने नर्स से डॉक्टर को बुलाने के लिए कहा। डयूटी नर्सों ने कहा कि उनके पास डॉ.नेमा का नंबर नहीं है। तमाम प्रयास के बाद भी डॉ. नहीं आयी।इस दौरान प्रसूता की जांच करने की बजाय स्टॉफ नर्स ने कोरे कागज पर साइन करने को कहा,हमने इंकार कर दिया। जिससे नाराज नर्स ने अभ्रदता की और भाभी को नहीं देखा।

ऑपरेशन होता तो बच जाती जान
प्रसूता जयंती के परिजनों ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में सुबह से भर्ती होने के बावजूद डॉ. नेमा और स्टॉफ ने प्रसव कराने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। उनकी लापरवाही से रात 10 बजे डिलेवरी हुई तो बच्ची मृत पैदा हुई। परिजनों ने कहा कि अगर समय रहते डॉ. नेमा जयंती का ऑपरेशन करतीं तो शायद बच्ची की जान बच जाती। लेकिन जिला अस्पताल कीं उक्त डॉक्टर से लेकर स्टॉफ नर्स प्रसव कराने को लेकर सुबह से लेकर देर रात तक टाल-मटोल करतीं रहीं। उनकी इस लापरवाही की वजह से बेटी जीवित नहीं रह पाई। मनीष ने कलेक्टर ऋषि गर्ग से मामले की जांच कर दोषी डॉ. नेमा एवं ड्यूटी पर मौजूद नर्सों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। इधर पत्रिका रिपोर्टर ने डॉ.संध्या नेमा से कई बार संपर्क का प्रयास किया लेकिन उन्होंने कॉल अटैंड नहीं किया।

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इनका कहना है
- इस मामले की जांच के लिए समिति बनाई है। महिला के भर्ती होने से डिलेवरी तक के बीच जिन जिन लोगों की डयूटी रही,उन्हें नोटिस दिए हैं। डॉ.संध्या नेमा को नोटिस देकर 48 घंटे में जवाब मांगा है। जिसमें प्रसूता की जांच व समय पर ऑपरेशन न करने का कारण पूछा है।नवजात का पीएम कराया है।जांच में जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी।
डॉ. एचपी सिंह, सीएमएचओ, जिला अस्पताल, हरदा

- प्रसूता को पूर्व में तीन सामान्य डिलेवरी हुईं थी। परिजनों ने चौथा प्रसव भी नार्मल कराने के लिए कहा था। इसकी हमने कोशिश की, मगर डिलेवरी के दौरान बच्ची की धड़कन अचानक कम हो गई, जिससे उसकी मौत हो गई। हमने जांच करने से लेकर प्रसव कराने में कोई लापरवाही नहीं की है। परिजनों का मुझ पर लगाया गया आरोप बेबुनियाद है।
डॉ. संध्या नेमा, जिला अस्पताल, हरदा

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