
Bathing in cold water in Maha Kumbh
Arthritis and Cold Water Bath: इस साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 12 साल बाद महाकुंभ (Maha Kumbh 2025) का आयोजन किया जा रहा है। इस भव्य धार्मिक आयोजन में करोड़ों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कुम्भ स्नान का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है, लेकिन ठंडे पानी में स्नान करना हर किसी के लिए संभव नहीं होता, खासकर उन लोगों के लिए जो अर्थराइटिस जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ठंडा पानी इन मरीजों के लिए कई स्वास्थ्य समस्याओं को और गंभीर बना सकता है। डॉ. योगेश कुमार, डायरेक्टर, ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट एंड स्पोर्ट्स इंजरी ने बताया कि अर्थराइटिस मरीजों को कुम्भ स्नान के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि अर्थराइटिस के मरीजों के लिए वैसे तो ठंडे पाने से स्नान करना उचित नहीं माना जाता, और अगर महाकुंभ में ऐसे लोग भाग लेने का सोच रहे हैं तो उन्हें इससे बचना चाहिए खासकर इस ठंडे मौसम में क्योंकि इसके कारण कई प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। जैसे: ठंडे पानी से स्नान करने से जोड़ों पर दबाव बढ़ सकता है, जो अर्थराइटिस के मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है और ठंडे पानी से स्नान करने से मांसपेशियों में तनाव भी बढ़ सकता है, जो अर्थराइटिस के मरीजों के लिए दर्दनाक हो सकता है।
इसके अलावा ठंडे पानी से स्नान करने से आपके इम्यून सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जो अर्थराइटिस के मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में आप अगर आप फिर भी इस आयोजन में भाग ले रहे हैं तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। स्नान करते समय सावधानी बरतें और अपने जोड़ों और मांसपेशियों पर दबाव न डालें। स्नान के बाद आराम करें और अपने जोड़ों और मांसपेशियों को आराम दें।
सर्दियों के मौसम में नदी का पानी बेहद ठंडा होता है। डॉक्टरों के अनुसार, ठंडा पानी शरीर का तापमान अचानक गिरा सकता है, जिससे जोड़ों में खून का संचार धीमा हो जाता है। इसका नतीजा जोड़ों में दर्द और सूजन के रूप में सामने आता है। खासकर रूमेटॉयड अर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों को इस समस्या का अधिक सामना करना पड़ सकता है।
ठंडे पानी में स्नान करने से मांसपेशियों और जोड़ों में कठोरता आ सकती है। यह समस्या सामान्य व्यक्तियों की तुलना में अर्थराइटिस पेशेंट्स के लिए ज्यादा गंभीर हो जाती है। इससे जोड़ों में सूजन, दर्द और चलने-फिरने में परेशानी का खतरा बढ़ जाता है।
अर्थराइटिस कई बार बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के कारण भी होता है। ठंडे पानी में बैक्टीरिया और वायरस के पनपने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में ठंडे पानी के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है, जिससे अर्थराइटिस की समस्या गंभीर हो सकती है।
अर्थराइटिस मरीजों की हड्डियां पहले से कमजोर होती हैं। ठंडे पानी में स्नान करने से ठंडा माहौल उनके शरीर को और थका देता है। कुम्भ जैसे बड़े आयोजन में, जहां लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ता है, वहां थकान और कमजोरी की समस्या और अधिक बढ़ सकती है।
ठंडे पानी या फिसलन भरे माहौल में चोट लगने का खतरा हर किसी को हो सकता है, लेकिन अर्थराइटिस पेशेंट्स के लिए यह खतरा अधिक होता है। छोटी-सी चोट भी उनकी समस्या को बड़ा बना सकती है।
कुम्भ में जाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें। उनकी सलाह के अनुसार ही स्नान का निर्णय लें। साथ ही अपनी दवाइयां हमेशा अपने पास रखें और नियमित रूप से उन्हें लेते रहें।
स्नान से पहले हल्के गुनगुने पानी से शरीर को धो लें या थोड़ी देर हल्की एक्सरसाइज करें। यह मांसपेशियों और जोड़ों में लचीलापन लाने में मदद करेगा और ठंडे पानी के प्रभाव को कम करेगा।
स्नान के बाद जितना जल्दी हो सके गर्म कपड़े पहन लें। यह शरीर की गर्मी बनाए रखने में मदद करेगा और ठंडे पानी के असर से बचाएगा।
स्नान के बाद अगर जोड़ों में दर्द महसूस हो, तो गर्म पानी की बोतल से सिंकाई करें या गर्म तेल की मालिश करें। इससे दर्द और सूजन में राहत मिलेगी।
स्नान से पहले और बाद में हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग करें। इससे मांसपेशियों और जोड़ों की कठोरता कम होगी और लचीलापन बना रहेगा।
Cold water bathing effects on arthritis : अर्थराइटिस पेशेंट्स के लिए ठंडे पानी में स्नान करना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर कुम्भ जैसे आयोजन के दौरान। लेकिन डॉक्टर की सलाह, सही तैयारी और सावधानियों के साथ, आप इस धार्मिक अवसर का हिस्सा बन सकते हैं। ध्यान रखें कि स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ नहीं है, इसलिए अपनी स्थिति को समझते हुए ही कोई कदम उठाएं।
Updated on:
24 Jan 2025 02:36 pm
Published on:
24 Jan 2025 02:28 pm
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