
Cervical Cancer (photo- gemini ai)
Cervical Cancer: सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है। यह बीमारी गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में शुरू होती है। अगर समय रहते इसका पता न चले और इलाज न हो, तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती है। WHO के मुताबिक, यह कैंसर पूरी तरह रोकने योग्य और इलाज योग्य है, बशर्ते जांच और इलाज सही समय पर हो जाए।
2022 में दुनिया भर में करीब 6.6 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की पहचान हुई और लगभग 3.5 लाख महिलाओं की मौत इस बीमारी से हुई। यूनिसेफ के अनुसार, हर दो मिनट में एक महिला इस कैंसर के कारण अपनी जान गंवा देती है। यह आंकड़े डराने वाले जरूर हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि सही जानकारी और सावधानी से इससे बचा जा सकता है।
लगभग सभी मामलों में सर्वाइकल कैंसर का कारण HPV (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) होता है। यह एक बहुत आम वायरस है, जो यौन संपर्क से फैलता है। ज्यादातर लोगों को जीवन में कभी न कभी HPV हो सकता है, लेकिन अधिकतर मामलों में शरीर की इम्युनिटी इसे खुद ही खत्म कर देती है। समस्या तब होती है, जब HPV के कुछ खतरनाक प्रकार लंबे समय तक शरीर में बने रहते हैं। इससे सर्विक्स की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव होने लगते हैं, जो आगे चलकर कैंसर में बदल सकते हैं।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन सबसे मजबूत हथियार है। WHO की सलाह है कि 9 से 14 साल की सभी लड़कियों को यह वैक्सीन लगनी चाहिए, यानी यौन जीवन शुरू होने से पहले। इसके अलावा, 30 साल की उम्र के बाद (और HIV से संक्रमित महिलाओं के लिए 25 साल के बाद) नियमित सर्वाइकल स्क्रीनिंग कराना बहुत जरूरी है। इससे कैंसर बनने से पहले ही कोशिकाओं में हुए बदलाव पकड़ में आ जाते हैं।
अगर सर्वाइकल कैंसर की पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए, तो यह सबसे सफलतापूर्वक ठीक होने वाले कैंसरों में से एक है। समय पर इलाज से महिला पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकती है।
दुर्भाग्य से, दुनिया के कई हिस्सों में महिलाओं को वैक्सीन, जांच और इलाज की समान सुविधा नहीं मिल पाती। खासतौर पर सब-सहारा अफ्रीका, मध्य अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में इस बीमारी से मौत का खतरा ज्यादा है।
2020 में 194 देशों ने मिलकर सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने की एक वैश्विक रणनीति शुरू की। इसका लक्ष्य है कि 2030 तक 90% लड़कियों को 15 साल की उम्र तक HPV वैक्सीन मिले। 70% महिलाओं की समय पर जांच हो। 70% मरीजों को पूरा इलाज मिले। अगर यह लक्ष्य पूरा होता है, तो आने वाले वर्षों में लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है।
Published on:
03 Jan 2026 09:27 am
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