
2 महीने की बच्ची के खून में 300 गुना ज्यादा फैट सांकेतिक तस्वीर (photo- freepik)
Familial Lipoprotein Lipase Deficiency: क्या आपने कभी सोचा है कि किसी इंसान के खून में इतना ज्यादा फैट हो सकता है कि उसका रंग ही बदल जाए? मुंबई के एक अस्पताल में ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया। महज ढाई महीने की एक बच्ची को दिल से जुड़ी समस्या के कारण अस्पताल लाया गया, लेकिन जब डॉक्टरों ने उसका खून निकाला तो उसका रंग सामान्य लाल की बजाय गुलाबी और गाढ़ा दिखाई दिया।
जांच में पता चला कि बच्ची के खून में ट्राइग्लिसराइड का स्तर लगभग 42,000 mg/dL था, जो सामान्य स्तर से करीब 300 गुना अधिक था। आगे की आनुवंशिक जांच में सामने आया कि बच्ची को फैमिलियल लाइपोप्रोटीन लाइपेज डेफिशिएंसी (LPLD) नाम की एक बेहद दुर्लभ बीमारी है। यह मामला सिर्फ एक मेडिकल चमत्कार नहीं, बल्कि यह समझने का मौका भी है कि शरीर में फैट का संतुलन बिगड़ने पर क्या-क्या गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
हम जो भी वसा (फैट) वाला खाना खाते हैं, उसे शरीर ऊर्जा में बदलने के लिए एक खास एंजाइम की जरूरत होती है। इस एंजाइम का नाम लाइपोप्रोटीन लाइपेज (Lipoprotein Lipase) है।
जीन रिव्यूज और नेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर रेयर डिसऑर्डर्स (NORD) के अनुसार, अगर जन्म से ही यह एंजाइम ठीक से काम न करे या बिल्कुल न बने, तो खून में ट्राइग्लिसराइड तेजी से जमा होने लगते हैं। इसी स्थिति को पारिवारिक लिपोप्रोटीन लाइपेज की कमी (Familial Lipoprotein Lipase Deficiency) कहा जाता है। यह बीमारी बेहद दुर्लभ है और दुनिया में लगभग 10 लाख लोगों में 1 व्यक्ति को प्रभावित करती है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बच्ची को शुरू में दिल के आकार में बढ़ोतरी की वजह से अस्पताल लाया गया था। लेकिन खून की जांच के दौरान डॉक्टरों ने देखा कि उसका खून सामान्य लाल रंग का नहीं था। जांच में सामने आया कि ट्राइग्लिसराइड 42,000 mg/dL था। सामान्य स्तर 150 mg/dL से कम माना जाता है। डॉक्टरों ने 16 दिनों तक मुंह से दूध पिलाना बंद रखा। नस के जरिए पोषण दिया गया। आनुवंशिक जांच में LPLD की पुष्टि हुई। अब बच्ची को पूरी जिंदगी कम वसा वाला विशेष आहार लेना होगा।
शोध के अनुसार जब ट्राइग्लिसराइड का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
शिशुओं में कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब किसी दूसरी समस्या की जांच के दौरान खून का असामान्य रंग दिखाई देता है।
यह बीमारी जन्मजात होती है। अगर माता-पिता दोनों में इस बीमारी से जुड़ा दोषपूर्ण जीन मौजूद हो, तो बच्चे में इसका खतरा बढ़ जाता है। इसका किसी खान-पान या गर्भावस्था के दौरान की गई गलती से कोई संबंध नहीं होता।
फिलहाल इस बीमारी का स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। इलाज का मुख्य उद्देश्य ट्राइग्लिसराइड को सुरक्षित स्तर पर रखना होता है। इसके लिए डॉक्टर सलाह दे सकते हैं-
LPLD बेहद दुर्लभ बीमारी है, लेकिन उच्च ट्राइग्लिसराइड सिर्फ आनुवंशिक कारणों से ही नहीं होता। यह मोटापा, मधुमेह, ज्यादा चीनी और मीठे पेय, शराब, शारीरिक गतिविधि की कमी के वजहों से भी बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना फायदेमंद हो सकता है, खासकर अगर परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई ट्राइग्लिसराइड का इतिहास हो।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
30 Jun 2026 01:57 pm
Published on:
30 Jun 2026 01:17 pm
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